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ग्रेटर नोएडा वेस्ट सोसाइटी में उल्लू का हमला बंद, एओए-बिल्डर का आतंक जारी ग्रेटर नोएडा वेस्ट सोसाइटी में उल्लू का हमला बंद, एओए-बिल्डर का आतंक जारी

ग्रेटर नोएडा वेस्ट सोसाइटी में उल्लू का हमला बंद, एओए-बिल्डर का आतंक जारी

ग्रेटर नोएडा वेस्ट। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ला रेजिडेंशिया सोसाइटी में पिछले तीन दिनों से उल्लुओं के हमलों से मची दहशत सोमवार को उस वक्त खत्म हुई, जब वन विभाग की टीम ने सोसाइटी परिसर से कुल 8 उल्लुओं को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। रेस्क्यू किए गए उल्लुओं में 2 वयस्क और 6 बच्चे शामिल हैं। रिहायशी इलाके में लगातार हो रहे इन हमलों ने सोसाइटी के लोगों को गहरे डर में डाल दिया था, जिसके बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

कैसे शुरू हुआ मामला

स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, सोसाइटी परिसर में कुछ समय से उल्लुओं का एक जोड़ा लगातार दिखाई दे रहा था, जो अक्सर सड़कों, पेड़ों और स्ट्रीट लाइट के आसपास बैठा नजर आता था। रात के समय जब लोग पैदल गुजरते थे, तो इनमें से एक या दोनों अचानक उनकी ओर झपट्टा मार देते थे। धीरे-धीरे यह हमले बढ़ते गए और तीन दिनों के भीतर करीब आधा दर्जन लोग इनका शिकार बन चुके थे।

निवासियों को लगी चोटें, अस्पताल तक पहुंचना पड़ा

हमलों में कई लोगों के सिर और शरीर पर उल्लुओं की चोंच से गहरी चोटें आईं, कुछ मामलों में सिर से खून भी बहा। सोसाइटी निवासी बिजॉय त्रिपाठी के साथ हुई घटना खासी चर्चा में रही। बुधवार रात करीब 11 बजे ऑफिस से लौटने के बाद जब वे गाड़ी पार्क कर अपने फ्लैट की ओर बढ़ रहे थे, तभी पीछे से एक उल्लू ने उनके सिर पर हमला कर दिया। पहली बार उन्हें समझ नहीं आया कि क्या हुआ, लेकिन दोबारा हमला होने पर उन्होंने उल्लू को देखा और तब तक उनके सिर से खून बहने लगा था। इसके बाद उन्हें अस्पताल जाकर इलाज कराना पड़ा। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, तीन दिनों में 4 से 5 लोग इस तरह के हमलों में घायल हुए, और शुक्रवार रात को एक और निवासी को निशाना बनाया गया, जिसके बाद कुल पीड़ितों की संख्या और बढ़ गई।

शाम ढलते ही सहमे रहते थे लोग

लगातार हो रहे हमलों के डर से सोसाइटी के लोग शाम और रात के समय अपने फ्लैटों से बाहर निकलने से बचने लगे थे। परिवार वाले महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से हिचकने लगे थे। पार्किंग, लॉबी और सोसाइटी परिसर में आना-जाना करते समय लोग हर वक्त ऊपर की ओर चौकन्नी नजर रखते थे, क्योंकि कभी भी अचानक ऊपर से हमला होने का खतरा बना रहता था। गौरतलब है कि इस सोसाइटी में इससे पहले आवारा कुत्तों की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई थी, ऐसे में उल्लुओं के हमलों ने निवासियों की परेशानी और बढ़ा दी थी।

वन विभाग से लगाई गुहार, डीएफओ से भी की शिकायत

परेशान निवासियों ने पहले सोसाइटी प्रबंधन और फिर वन विभाग के अधिकारियों से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेजिडेंट्स ने जिला वन अधिकारी (डीएफओ) से भी सीधे हस्तक्षेप की मांग की, ताकि उल्लुओं को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर किसी प्राकृतिक स्थान पर छोड़ा जा सके। निवासियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मकसद पक्षियों को कोई नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि इंसान और पक्षी दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

वन विभाग की टीम पहुंची, चला रेस्क्यू अभियान

शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की टीम सोसाइटी परिसर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। शुरुआती दौर में अधिकारियों ने यह भी कहा था कि उल्लुओं को पकड़ना आसान काम नहीं है और यह भी जांचा जाएगा कि आखिर उल्लू अचानक आक्रामक क्यों हो गए। बहरहाल, लगातार प्रयासों के बाद सोमवार को टीम ने सोसाइटी से कुल 8 उल्लुओं को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया, जिनमें 2 वयस्क और 6 बच्चे शामिल थे।

निवासियों को मिली राहत

वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद सोसाइटी के लोगों ने राहत की सांस ली है। स्थानीय लोगों की मांग है कि रेस्क्यू किए गए सभी उल्लुओं को सोसाइटी परिसर से दूर किसी उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों और मानव-वन्यजीव टकराव की स्थिति खत्म हो सके। विशेषज्ञों के मुताबिक, उल्लू आमतौर पर शांत और निशाचर पक्षी होते हैं, लेकिन प्रजनन काल के दौरान अपने घोंसले या बच्चों की सुरक्षा को लेकर आक्रामक हो सकते हैं, जिससे इंसानों के करीब आने पर वे हमलावर रुख अपना लेते हैं। सोसाइटी में मिले 6 बच्चों की मौजूदगी इस ओर इशारा करती है कि यही वजह इन हमलों के पीछे रही हो सकती है।

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