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9/11 हमले की 25वीं बरसी, नई पीढ़ी के लिए यह अब इतिहास का पन्ना 9/11 हमले की 25वीं बरसी, नई पीढ़ी के लिए यह अब इतिहास का पन्ना

9/11 हमले की 25वीं बरसी, नई पीढ़ी के लिए यह अब इतिहास का पन्ना

वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क। अमेरिका के इतिहास के सबसे भीषण आतंकी हमले को आज, 11 सितंबर 2026 को पूरे 25 साल हो गए। एक चौथाई सदी पहले हाइजैक किए गए विमानों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन और पेंसिल्वेनिया के एक खेत को निशाना बनाया था, जिसमें लगभग 2,977 लोगों की जान चली गई थी। इस दर्दनाक घटना की याद में शुक्रवार को पूरे अमेरिका में श्रद्धांजलि सभाएं और स्मृति समारोह आयोजित किए जा रहे हैं, जहां पीड़ितों के परिजन, बचावकर्मी और देश के शीर्ष नेता एक साथ जुटे।

न्यूयॉर्क, पेंटागन और शैंक्सविल में श्रद्धांजलि

न्यूयॉर्क के लोअर मैनहट्टन स्थित 9/11 मेमोरियल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और देश के चारों जीवित पूर्व राष्ट्रपति जिनमें हमले के समय पद पर रहे जॉर्ज डब्ल्यू बुश भी शामिल हैं पीड़ितों के परिजनों के साथ शामिल हुए। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी भी इस समारोह का हिस्सा बने। कार्यक्रम में उन क्षणों पर मौन रखा गया जब दोनों विमानों ने ट्विन टावर्स को टक्कर मारी थी और जब दोनों इमारतें ढह गई थीं। परिजनों ने न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन और पेंसिल्वेनिया में मारे गए सभी 2,977 पीड़ितों के साथ-साथ 1993 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर बम धमाके में मारे गए छह लोगों के नाम भी पढ़े।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मौके पर पेंटागन में श्रद्धांजलि दी, जबकि पेंसिल्वेनिया के शैंक्सविल में उस स्थान पर भी समारोह हुआ, जहां यात्रियों ने हाइजैकरों से संघर्ष करते हुए चौथे विमान को दुर्घटनाग्रस्त कर दिया था, जिससे वॉशिंगटन डीसी को बड़े हमले से बचा लिया गया था।

पीड़ित परिवारों का दर्द आज भी ताज़ा

अमेरिकन एयरलाइंस के उस विमान के पायलट जॉन ओगोनोव्स्की की बेटी कैरोलिन ओगोनोव्स्की, जो अब 39 साल की हैं, इस साल मां बनी हैं। उन्होंने अपने नवजात बेटे का नाम पिता के नाम पर ‘जॉन’ रखा है। हाल ही में वे अपने बेटे को लेकर पिता की कब्र पर गईं और शुक्रवार को बोस्टन में एक स्मृति समारोह में शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि इस बार दुख की एक नई परत जुड़ गई है — उनके पिता कभी अपने पोते को नहीं जान पाएंगे, और उनका बेटा कभी अपने दादा को नहीं जान पाएगा।

25 साल बाद भी हमले का असर सिर्फ उस दिन तक सीमित नहीं रहा। ग्राउंड ज़ीरो पर हफ्तों-महीनों तक काम करने वाले कई बचावकर्मी और आसपास रहने वाले लोग जहरीले धुएं और मलबे के संपर्क में आने से बाद में गंभीर बीमारियों का शिकार हुए। न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट ने हमले के दिन 343 फायरफाइटर खोए थे, जबकि उसके बाद से 9/11 से जुड़ी बीमारियों के कारण 600 से अधिक अतिरिक्त फायरफाइटर्स की मौत हो चुकी है — अकेले इस साल 26 लोगों की जान गई है।

नई पीढ़ी के लिए 9/11 अब ‘स्मृति’ नहीं, ‘इतिहास’

25 साल बीत जाने के बाद अमेरिका में करीब 10 करोड़ (100 मिलियन) लोग ऐसे हैं जो या तो उस दिन पैदा ही नहीं हुए थे, या इतने छोटे थे कि उन्हें उस घटना की कोई याद नहीं। यही वजह है कि 9/11 मेमोरियल एंड म्यूज़ियम अब सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित न रहकर शिक्षा और नई पीढ़ी तक इस इतिहास को पहुंचाने पर ज़ोर दे रहा है। संस्था के अनुसार, जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए यह अब भी जीवित पीड़ा है, लेकिन युवा पीढ़ी के लिए यह किताबों और स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनता जा रहा है — ठीक वैसे ही जैसे पर्ल हार्बर या अन्य ऐतिहासिक घटनाएं रही हैं।

अमेरिकी नीति और समाज पर गहरा असर

9/11 के हमलों ने अमेरिका की विदेश और घरेलू नीति की दिशा हमेशा के लिए बदल दी। इसी के बाद ‘वॉर ऑन टेरर’ शुरू हुआ, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का गठन हुआ और अमेरिका अफगानिस्तान व इराक में लंबे युद्धों में उलझा। इसके साथ ही घरेलू स्तर पर मुस्लिम अमेरिकियों और मुस्लिम बहुल देशों से आए प्रवासियों के खिलाफ नफरत और भेदभाव की घटनाओं में भी उछाल देखा गया, जिसका असर आज तक अमेरिकी समाज की सोच पर दिखाई देता है। न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर मामदानी को इस समारोह में शामिल न होने के लिए कुछ रिपब्लिकन नेताओं के दबाव का सामना करना पड़ा, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया।

अल-कायदा और सुरक्षा परिदृश्य पर भी नज़र

25 साल बाद यह सवाल भी बार-बार उठ रहा है कि हमले के मास्टरमाइंड संगठन अल-कायदा का अब क्या हाल है। नेतृत्व खोने और लगातार सैन्य कार्रवाइयों के बावजूद विश्लेषक इसे अब भी पूरी तरह खत्म खतरा नहीं मानते, और यह चर्चा इस बरसी के मौके पर एक बार फिर सुर्खियों में है।

निष्कर्ष

25 साल बाद भी 9/11 अमेरिका की सामूहिक स्मृति में गहराई से बसा हुआ है पीड़ित परिवारों के लिए यह आज भी उतना ही ताज़ा दर्द है जितना उस दिन था, जबकि देश की एक नई पीढ़ी के लिए यह धीरे-धीरे स्मृति से इतिहास के पन्नों में बदल रहा है। यही वजह है कि इस बरसी पर श्रद्धांजलि के साथ-साथ इस घटना को आने वाली पीढ़ियों तक सही तरीके से पहुंचाने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है।

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