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राज नगर एक्सटेंशन: 70-80 करोड़ की धोखाधड़ी से त्रस्त निवेशकों ने जिलाधिकारी से मांगी सामूहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति – जय हिन्द जनाब राज नगर एक्सटेंशन: 70-80 करोड़ की धोखाधड़ी से त्रस्त निवेशकों ने जिलाधिकारी से मांगी सामूहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति – जय हिन्द जनाब

राज नगर एक्सटेंशन: 70-80 करोड़ की धोखाधड़ी से त्रस्त निवेशकों ने जिलाधिकारी से मांगी सामूहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति

राज नगर एक्सटेंशन में आशियाने का सपना संजोए दर्जनों निवेशकों के साथ हुई करीब 70 से 80 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। महीनों से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे पीड़ित निवेशकों ने अब हताश होकर जिलाधिकारी को पत्र लिखकर सामूहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। निवेशकों का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के चलते मुख्य आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे तंग आकर वे यह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हुए हैं।

पीड़ितों के अनुसार, राज नगर एक्सटेंशन में मेसर्स एएसआर रीयलटेक लिमिटेड (सेंट्रल एवेन्यू) और राइट अर्थ इंफ्रा लिमिटेड नाम से दो निर्माणाधीन प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनके मालिक संदीप गुप्ता और अरुण मक्कड़ हैं। आरोप है कि इन बिल्डरों ने अपने सेल्स हेड दीपक शर्मा उर्फ निखिल शर्मा, शिवानी त्यागी, सारिका शर्मा और अन्य स्टाफ के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से निवेशकों को लुभावने वादों के साथ फ्लैट आवंटित किए और करोड़ों रुपये वसूल लिए। बाद में पूरा स्टाफ गायब हो गया और बिल्डर निवेशकों को दिए गए दस्तावेजों को ही फर्जी बताने लगे जबकि पीड़ितों के पास आरटीजीएस और बैंक लेनदेन के पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं। इस मामले में हाल ही में सामने आई एक ताजा शिकायत में आंकड़ा और स्पष्ट हुआ है। राजनगर एक्सटेंशन में इन्हीं दोनों कंपनियों एएसआर रियलटेक लिमिटेड और राइट अर्थ इंफ्रा एलएलपी पर करीब 29.41 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप औपचारिक रूप से दर्ज कराया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ठगी को अंजाम देने के लिए अलग-अलग नामों से बैंक खाते खोले गए और इसके लिए फर्जी आधार कार्ड व कंपनी की मुहर लगे दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया, जिन्हें अब कंपनियां मानने से ही इनकार कर रही हैं।

पीड़ितों ने आर्थिक अपराध शाखा से मामले की गहन जांच के साथ-साथ अदालत और प्रशासन से कंपनियों के बैंक खाते फ्रीज करने और संपत्तियां कुर्क कर निवेशकों की रकम सुरक्षित कराने की अपील की है। निवेशकों ने पुलिस पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि मामले की गंभीरता को कमजोर करने के लिए बेहद हल्की धाराओं में केस दर्ज किया गया है, जिससे आरोपियों को खुला संरक्षण मिल रहा है। जिलाधिकारी को सौंपे पत्र में निवेशकों ने मांग की है कि पूरे मामले की विभिन्न संबंधित विभागों से निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोनों विवादित प्रोजेक्ट तत्काल सीज किए जाएं। पीड़ितों का कहना है कि उनकी जीवन भर की जमापूंजी इन प्रोजेक्ट्स में फंस चुकी है और अगर जल्द न्याय व पैसा वापस नहीं मिला, तो प्रशासन उन्हें सामूहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति दे। यदि आप या आपका कोई परिचित आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव के कारण आत्मघाती विचारों से जूझ रहा है, तो कृपया तुरंत किसी हेल्पलाइन या नज़दीकी परामर्श केंद्र से संपर्क करें।

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