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ममता को दो बार हराने वाले शुभेंदु अधिकारी संभालेंगे सत्ता ममता को दो बार हराने वाले शुभेंदु अधिकारी संभालेंगे सत्ता

बंगाल में ‘दादा’ राज की शुरुआत: ममता को दो बार हराने वाले शुभेंदु अधिकारी संभालेंगे सत्ता

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Bengal CM : कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से चल रहे सियासी संघर्ष के बीच अब एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद यह लगभग तय हो गया कि राज्य की सत्ता की कमान शुभेंदु अधिकारी के हाथों में होगी। बीते कुछ वर्षों में जिस तेजी से शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक कद बढ़ा, उसने उन्हें भाजपा का सबसे प्रभावशाली बंगाली चेहरा बना दिया। खास बात यह रही कि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दो बार चुनावी मैदान में शिकस्त देकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। पहले 2021 में नंदीग्राम और फिर 2026 में भवानीपुर सीट पर जीत ने उन्हें बंगाल की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया।

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कोलकाता के न्यू टाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट संकेत दिया कि उनकी सरकार “मैं नहीं, हम” की सोच पर आधारित होगी। उन्होंने सामूहिक नेतृत्व और संगठन आधारित राजनीति को सरकार की कार्यशैली का आधार बताया।

राजनीतिक परिवार से आते हैं शुभेंदु

शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के चर्चित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रह चुके हैं। उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी और सैमेंदु अधिकारी भी राज्य की सक्रिय राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से करने वाले शुभेंदु 1998 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और दो दशक तक ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते रहे। उन्होंने ममता सरकार में परिवहन और सिंचाई मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। दिसंबर 2020 में उन्होंने तृणमूल छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया।

तमलुक लोकसभा सीट से सांसद रह चुके शुभेंदु ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से मास्टर्स की पढ़ाई की है। निजी जीवन में उन्होंने विवाह नहीं किया है।

नंदीग्राम आंदोलन ने बदल दी राजनीतिक दिशा

शुभेंदु अधिकारी का सबसे बड़ा राजनीतिक उभार नंदीग्राम आंदोलन से जुड़ा माना जाता है। वर्ष 2007-08 में वाममोर्चा सरकार ने इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप के विशेष आर्थिक क्षेत्र परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू किया था। इसके विरोध में नंदीग्राम में बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ, जिसका नेतृत्व शुभेंदु अधिकारी ने किया।

14 मार्च 2007 को आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में 14 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना ने पूरे बंगाल की राजनीति को बदल दिया और वामपंथी शासन के खिलाफ जनाक्रोश तेज हो गया। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यही आंदोलन आगे चलकर बंगाल में 34 वर्षों के वाम शासन के अंत का कारण बना।

Bengal CM : भ्रष्टाचार और चर्चित मामलों की होगी जांच

मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले ही शुभेंदु अधिकारी ने कई बड़े प्रशासनिक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में संस्थागत भ्रष्टाचार और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठित किया जाएगा।

इसके अलावा संदेशखाली प्रकरण और आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मामले की भी जांच कराए जाने की बात कही गई है। भाजपा सरकार का दावा है कि प्रशासन को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जाएगा।

‘चरैवेति’ होगा सरकार का मूल मंत्र

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का “चरैवेति” यानी निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश उनकी सरकार की कार्यशैली का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक जड़ता और योजनाओं में देरी की शिकायतों को खत्म करने के लिए तेज निर्णय प्रणाली लागू की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर विकास योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जाएगा।

ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बदलेगा राजनीतिक इतिहास

कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहली बार भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का गवाह बनने जा रहा है। पिछले कई दशकों से यह मैदान बंगाल की राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का केंद्र रहा है।

1955 में सोवियत नेताओं निकिता ख्रुश्चेव और निकोलाई बुलगानिन की सभा से लेकर इंदिरा गांधी और शेख मुजीबुर रहमान के ऐतिहासिक कार्यक्रम तक इस मैदान ने कई बड़े राजनीतिक क्षण देखे हैं।

1977 के बाद यह मैदान वाम मोर्चा की ताकत का प्रतीक बन गया था, जबकि 2011 के बाद तृणमूल कांग्रेस की बड़ी रैलियों का केंद्र बना। अब पहली बार यहां भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होने जा रहा है, जिसे बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

Bengal CM : बंगाल की संस्कृति की भी दिखेगी झलक

रवींद्र जयंती के अवसर पर होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं की भी झलक दिखाई देगी। कार्यक्रम में रवींद्र संगीत की विशेष प्रस्तुति होगी। कई नेता पारंपरिक बंगाली धोती-कुर्ता में नजर आ सकते हैं।

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