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जिला अस्पताल में बड़ा लापरवाही का मामला: इंसानों के लिए मंगाई गईं 60,000 ‘पशुओं वाली’ सिरिंज, गलती तीन स्तरों की नजर से बच गई – जय हिन्द जनाब जिला अस्पताल में बड़ा लापरवाही का मामला: इंसानों के लिए मंगाई गईं 60,000 ‘पशुओं वाली’ सिरिंज, गलती तीन स्तरों की नजर से बच गई – जय हिन्द जनाब

जिला अस्पताल में बड़ा लापरवाही का मामला: इंसानों के लिए मंगाई गईं 60,000 ‘पशुओं वाली’ सिरिंज, गलती तीन स्तरों की नजर से बच गई

जिला अस्पताल में बड़ा लापरवाही का मामला: गौतमबुद्ध नगर के नोएडा जिला अस्पताल में एक चौंकाने वाला कांड सामने आया है। अस्पताल प्रशासन ने इंसानों के इलाज के लिए 60,000 सिरिंज का ऑर्डर दिया, लेकिन सप्लाई में वेटरनरी (पशु चिकित्सा) वाली सिरिंज आ गईं, जिन पर साफ-साफ लिखा था — “For Animal Use Only” या “पशुओं के इलाज के लिए”।

घटना का विवरण

ऑर्डर 25 दिसंबर 2025 को GKM/JEM पोर्टल के माध्यम से लखनऊ की एक एजेंसी से प्लेस किया गया था। लगभग एक महीने बाद (जनवरी 2026) सिरिंज की खेप अस्पताल पहुंची। स्टोर रूम में बॉक्स खोलने पर ही गलती का पता चला। पैकेट पर पशुओं के उपयोग का स्पष्ट उल्लेख था। सिरिंज तीन स्तरों की जांच (फार्मासिस्ट, SMO स्टोर और CMS) से गुजरने के बावजूद अस्पताल में पहुंच गईं। सौभाग्य से सिरिंज मरीजों को इस्तेमाल में नहीं लाई जा सकीं, क्योंकि गलती स्टोर में ही पकड़ ली गई।

अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया

अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (CMS) डॉ. अजय राणा ने कहा,
“गलती एजेंसी की है और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। यदि स्टाफ की गलती हुई है तो उसकी भी जांच कराई जाएगी।” प्रशासन ने सप्लाई तुरंत रद्द कर दी है और एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, अस्पताल सूत्रों के अनुसार मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से खुलकर जवाब नहीं दिया जा रहा है।

सवाल उठे कई

यह घटना अस्पताल की खरीद प्रक्रिया, गुणवत्ता जांच और बहु-स्तरीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अगर गलती पकड़ में न आती तो मरीजों के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता था। नोएडा जिला अस्पताल हजारों मरीजों को रोजाना इलाज मुहैया कराता है। ऐसे में चिकित्सा उपकरणों में इतनी बड़ी लापरवाही को स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य कर्मियों ने “बड़ी फजीहत” बताया है। फिलहाल प्रशासन आंतरिक जांच में जुटा है। CMO ऑफिस या जिला प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह मामला सरकारी अस्पतालों में मेडिकल सप्लाई की खरीद और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत को एक बार फिर रेखांकित करता है।

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