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Small business isn't easy: नोएडा के विश्वास वर्मा की रील वायरल, चाय-जूस दुकान के अनुभव से खोली हकीकत; लाखों लोग कर रहे सराहना – जय हिन्द जनाब Small business isn't easy: नोएडा के विश्वास वर्मा की रील वायरल, चाय-जूस दुकान के अनुभव से खोली हकीकत; लाखों लोग कर रहे सराहना – जय हिन्द जनाब

Small business isn’t easy: नोएडा के विश्वास वर्मा की रील वायरल, चाय-जूस दुकान के अनुभव से खोली हकीकत; लाखों लोग कर रहे सराहना

Small business isn’t easy: कॉर्पोरेट जॉब करने वाले अक्सर चाय या छोले-भटूरे की ठेली देखकर सोचते हैं कि यह बिजनेस कितना आसान और फायदेमंद है। लेकिन ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विश्वास वर्मा ने अपना पर्सनल एक्सपीरीएंस शेयर कर इस मिथक को तोड़ दिया है। इंस्टाग्राम पर @gptnlife हैंडल से पोस्ट की गई उनकी रील तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने छोटे बिजनेस की चुनौतियां बताईं गई है। अब तक रील को 6 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं, 25 हजार लाइक्स और सैकड़ों कमेंट्स आ चुके हैं।

विश्वास ने रील में बताया कि उन्होंने 15 रुपये की चाय पीते हुए सोचा – दुकानदार दिन भर में कितनी बेचता होगा? लेकिन खुद बिजनेस ट्राई करने के बाद समझ आया कि बात इतनी सिंपल नहीं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक जिम (ब्लैक विगोर) के सामने 10 हजार रुपये किराए की दुकान ली। दोस्त के साथ जूस, प्रोटीन शेक, बोइल्ड एग और मैगी बेचने लगे, क्योंकि जिम जाने वाले कस्टमर आते हैं।

लेकिन हकीकत अलग थी:
• फ्रेश पाइनएप्पल जूस 90 रुपये में बेचते थे, लेकिन कॉस्ट भी इतनी ही आती थी – कोई प्रॉफिट नहीं।
• अंडा 5-8 रुपये में खरीदते, लेकिन बनाने में फट जाता या एक्स्ट्रा खर्च।
• प्रोटीन शेक महंगे (150 रुपये से शुरू), डिमांड कम।
• मैगी 11 रुपये की 30 में बेची, फिर भी रेंट, मेहनत और स्टैंडिंग टाइम जोड़कर घाटा।

विश्वास ने हंसते हुए कहा, “जिम बेसमेंट में था, ऊपर कोई ट्रैफिक नहीं। सस्ती दुकान इसलिए मिली क्योंकि लोकेशन खराब थी। ज्यादा रेंट वाली जगह पर ही फुटफॉल आता है।” उन्होंने मैसेज दिया कि बिजनेस में रिसर्च, समझ और धैर्य जरूरी – देखादेखी में मत कूदो। रील के कैप्शन में विश्वास ने लिखा, “छोटे व्यवसाय को आसान पैसा समझना गलती थी। यह अनुभव शेयर कर रहा हूं ताकि लोग डरें नहीं, बल्कि तैयार होकर शुरू करें।”

कमेंट्स में लोगों की प्रतिक्रिया
• एक यूजर: “दूसरे की थाली में खाना ज्यादा लगता है – बिल्कुल सही कहावत!”
• दूसरा: “अंडे वाली बात तो 100% सच, मैं भी सहमत।”
• तीसरा: “सच बोलने वालों को सलाम, नौकरी से बेहतर मेहनत का बिजनेस।”
• कई ने लिखा: “हंसते-हंसते सच्चाई बता दी, थैंक्स भाई!”

यह रील युवाओं को छोटे बिजनेस की ग्राउंड रियलिटी समझा रही है। विशेषज्ञ भी कहते हैं कि स्ट्रीट फूड या छोटी दुकान में मार्जिन कम, कॉम्पिटिशन ज्यादा और अनप्रेडिक्टेबल खर्चे होते हैं। अगर आप बिजनेस प्लान कर रहे हैं तो लोकेशन, कॉस्ट कैलकुलेशन और मार्केट रिसर्च पहले कर ले उसके बाद ही कोई भी बिज़नेस शुरू कीजिए। विश्वास जैसे अनुभव सिखाते हैं कि चमक बाहर से ही अच्छी लगती है!

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