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Storyteller Aniruddhacharya's provocative statement: लड़कियां मुंह मार के आती हैं’ बयान पर को कोर्ट ने किया तलब – जय हिन्द जनाब Storyteller Aniruddhacharya's provocative statement: लड़कियां मुंह मार के आती हैं’ बयान पर को कोर्ट ने किया तलब – जय हिन्द जनाब

Storyteller Aniruddhacharya’s provocative statement: लड़कियां मुंह मार के आती हैं’ बयान पर को कोर्ट ने किया तलब

Storyteller Aniruddhacharya’s provocative statement: वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। महिलाओं पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर मथुरा की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने उनके खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। अखिल भारतीय हिंदू महासभा की जिला अध्यक्ष मीरा राठौर द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। अगली सुनवाई 1 जनवरी 2026 को निर्धारित है, जिसमें अनिरुद्धाचार्य को पेश होना होगा।

विवाद की शुरुआत अक्टूबर 2025 में एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें अनिरुद्धाचार्य ने कहा था, “आजकल बेटियों की शादी 25 साल की उम्र में होती है, तब तक वे चार जगह मुंह मार चुकी होती हैं।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि लड़कियों की शादी 14 वर्ष की आयु में ही कर देनी चाहिए, ताकि ‘चरित्र की रक्षा’ हो सके। इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी, जहां महिलाओं के अधिकारों की पैरवी करने वाले संगठनों ने इसे लिंग-विरोधी और अपमानजनक करार दिया। अनिरुद्धाचार्य ने बाद में सफाई दी कि उनका इरादा महिलाओं का अपमान करना नहीं था, बल्कि सामाजिक मूल्यों पर जोर देना था। फिर भी, मीरा राठौर ने भारतीय दंड संहिता की धारा 294 (अश्लील कृत्य) और 509 (महिलाओं का अपमान) के तहत शिकायत दर्ज कराई।

अनिरुद्धाचार्य का जीवन परिचय: गांव के बालक से कथावाचन के सितारे तक
अनिरुद्धाचार्य, जिनका असली नाम अनिरुद्ध राम तिवारी है, का जन्म 27 सितंबर 1989 को मध्य प्रदेश के दमोह जिले के छोटे से गांव रिवझा में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता पंडित थे, लेकिन परिवार आर्थिक तंगी से जूझता रहा। बचपन अभावों भरा था, और उन्होंने औपचारिक शिक्षा केवल पांचवीं कक्षा तक ही प्राप्त की। फिर भी, उनकी आध्यात्मिक पिपासा ने उन्हें धार्मिक ग्रंथों की ओर खींचा।

युवावस्था में वृंदावन पहुंचे अनिरुद्धाचार्य ने संत श्री गिरिराज शास्त्री जी महाराज से दीक्षा ली। अयोध्या की अंजनी गुफा में श्री राम कथा का गहन अध्ययन किया, साथ ही वेद, पुराण और अन्य हिंदू ग्रंथों का स्वाध्याय किया। उनका आध्यात्मिक सफर भजनों से शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे भागवत कथा और प्रवचनों तक पहुंचा। 2019 में वृंदावन में ‘गौरी गोपाल आश्रम’ की स्थापना की, जो अब भक्तों का प्रमुख केंद्र है।

शिक्षा के मामले में उन्होंने सीमाओं को पार किया। 2024 में एक अमेरिकी विश्वविद्यालय से ‘ह्यूमैनिटी एंड स्पिरिचुअल एजुकेशन’ में पीएचडी प्राप्त की, जो उनकी दूसरी डॉक्टरेट उपाधि थी। उनकी लोकप्रियता सोशल मीडिया पर चरम पर है—यूट्यूब पर उनके वीडियो लाखों-करोड़ों बार देखे जाते हैं, खासकर युवाओं में। वे ‘बिग बॉस’ और ‘लाफ्टर शेफ्स’ जैसे रियलिटी शोज में अतिथि के रूप में नजर आ चुके हैं। एक दिन की कथा के लिए 1-3 लाख और सात दिवसीय भागवत कथा के लिए 10-15 लाख रुपये फीस वसूलते हैं, जो उनकी आर्थिक मजबूती दर्शाता है। गृहस्थ जीवन जीने वाले अनिरुद्धाचार्य का विवाह आरती तिवारी से हुआ है, और उनके दो पुत्र हैं।

विवादों की लंबी फेहरिस्त: धार्मिक से सामाजिक मुद्दों तक
अनिरुद्धाचार्य की लोकप्रियता जितनी तेज है, उतने ही विवादास्पद हैं उनके बयान। वे अक्सर सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं, जो समर्थकों को पसंद आते हैं लेकिन आलोचकों को भड़काते हैं। यहां कुछ प्रमुख विवादित बयान हैं:
• महिलाओं पर टिप्पणी (2022): एक प्रवचन में कहा कि सीता और द्रौपदी को कष्ट इसलिए सहना पड़ा क्योंकि वे “आवश्यकता से अधिक सुंदर” थीं। इस पर सोशल मीडिया और महिला संगठनों ने कड़ी निंदा की।
• भगवान शिव पर बयान (2024): शिव से जुड़े एक बयान पर हिंदू संगठनों की आपत्ति हुई, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक माफी मांगी।
• लिव-इन रिलेशनशिप पर (अगस्त 2025): एक कथा के दौरान कहा, “कलयुग में वैश्या को वैश्या नहीं कह सकते।” इसे महिलाओं के जीवनशैली पर हमला माना गया।
• चीफ जस्टिस बीआर गवई पर (सितंबर 2025): सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पर टिप्पणी कर विवाद खड़ा किया। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इसे “संविधान पर हमला” बताते हुए निंदा की।
• हालिया बयान (अक्टूबर 2025): लड़कियों की शादी और “मुंह मारने” वाली टिप्पणी, जो अब कोर्ट पहुंच गई।
ये बयान सोशल मीडिया पर मीम्स और बहस का विषय बन जाते हैं। समर्थक उन्हें “खरी-खरी बोलने वाला संत” मानते हैं, जबकि आलोचक लिंग-भेदभाव और धार्मिक संवेदनशीलता का उल्लंघन बताते हैं। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर हाल के पोस्ट्स में भी यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, जहां #AniruddhacharyaControversy टैग के साथ सैकड़ों प्रतिक्रियाएं दर्ज हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सामाजिक कार्यकर्ता और वकील मीरा राठौर ने कहा, “ऐसे बयान समाज में विषाक्तता फैलाते हैं। कोर्ट का यह फैसला महिलाओं के सम्मान की रक्षा का संदेश है।” वहीं, अनिरुद्धाचार्य के समर्थक आश्रम से जुड़े एक भक्त ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “महाराज जी सत्य बोलते हैं, जो असहज लगता है। विवाद मीडिया की देन है।”

यह मामला अनिरुद्धाचार्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन उनकी फैन फॉलोइंग मजबूत बनी हुई है। सुनवाई के बाद ही साफ होगा कि कोर्ट क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल, वृंदावन में उनके आश्रम पर भक्तों का तांता लगा हुआ है, जो इस विवाद को “षड्यंत्र” बता रहे हैं।

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