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दिल्ली की जहरीली हवा: CJI को वॉक करने के बाद सांस की तकलीफ – जय हिन्द जनाब दिल्ली की जहरीली हवा: CJI को वॉक करने के बाद सांस की तकलीफ – जय हिन्द जनाब

दिल्ली की जहरीली हवा: CJI को वॉक करने के बाद सांस की तकलीफ

Pollution news in Delhi-NCR: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। आज सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना (जस्टिस सूर्यकांत के साथ बेंच में थे) ने खुद अपनी तकलीफ साझा की और अदालत की लाचारी को सामने रखा।

कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (सहायक वकील) ने बेंच को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में स्थिति “हेल्थ इमरजेंसी” जैसी हो चुकी है। AQI लगातार 400-500 के पार बना हुआ है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को गंभीर खतरा है।

इस पर CJI संजीव खन्ना ने बेबाकी से कहा:
“किसी भी ज्यूडिशियल फोरम के पास कौन-सी जादू की छड़ी है जिसे घुमाते ही यह समस्या खत्म हो जाए? मैं खुद जानता हूँ कि यह दिल्ली-एनसीआर के लिए बहुत खतरनाक समय है। मैंने खुद कल 55 मिनट वॉक किया था… लौटकर आने के बाद काफी दिक्कत हुई। सुबह तक परेशानी बनी रही। मुझे बताइए कि हम ऐसा कौन-सा ऑर्डर पास करें कि तुरंत साफ हवा मिल जाए!”

CJI ने आगे कहा कि कोर्ट को अपनी सीमाएँ पता हैं। वे पराली जलाने, वाहनों के उत्सर्जन, कंस्ट्रक्शन डस्ट और इंडस्ट्रीयल पॉल्यूशन जैसे मूल कारणों को एक झटके में खत्म नहीं कर सकते। उन्होंने सभी पक्षों (केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, पंजाब-हरियाणा सरकार, CAQM आदि) से सोमवार तक ठोस और व्यावहारिक सुझाव मांगे हैं।

आज की स्थिति (27 नवंबर 2025, दोपहर 2 बजे तक):
• दिल्ली का औसत AQI: 458 (Severe+ श्रेणी)
• आनंद विहार: 499, जहांगीरपुरी: 485, पंजाबी बाग: 480
• GRAP-4 अभी भी लागू, लेकिन स्कूल बंद होने और निर्माण कार्य पर रोक के बावजूद कोई खास सुधार नहीं
• हवा की दिशा उत्तर-पश्चिमी बनी हुई है, जिससे पराली का धुआं लगातार दिल्ली में घुस रहा है

कोर्ट ने साफ कहा कि सोमवार (1 दिसंबर) को फिर सुनवाई होगी और तब तक सभी सरकारें बताएं कि वे क्या ठोस कदम उठा रही हैं। CJI ने यह भी टिप्पणी की कि “हम कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जादू की छड़ी तो किसी के पास नहीं है।”

दिल्ली वाले इस वक्त सचमुच लाचार महसूस कर रहे हैं – न सांस लेने लायक हवा, न कोई तुरंत समाधान। कोर्ट ने भी अपनी मजबूरी खुलकर स्वीकार कर ली। अब देखना यह है कि सोमवार को क्या व्यावहारिक आदेश आते हैं या एक बार फिर सिर्फ चिंता और टिप्पणियों तक बात सीमित रह जाती है।

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