Ankita Bhandari murder case: उत्तराखंड की 19 साल की बेटी अंकिता भंडारी की 2022 में हुई हत्या के मामले में न्याय की लड़ाई फिर जोर पकड़ रही है। 8 फरवरी 2026 को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित महापंचायत में हजारों की संख्या में लोग उमड़े। अंकिता के माता-पिता, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा CBI जांच को ‘ढकोसला’ और ‘मिलावटी’ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में नई जांच की मांग की।
मुख्य मांगें और आक्रोश के कारण
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच: वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान CBI जांच परिवार की FIR पर नहीं, बल्कि पर्यावरणविद् अनिल जोशी जैसे सरकार से करीबी व्यक्ति की शिकायत पर शुरू हुई है। इसलिए यह विश्वसनीय नहीं।
वीआईपी का नाम उजागर: अंकिता ने कथित तौर पर एक ‘वीआईपी गेस्ट’ को स्पेशल सर्विस देने से इनकार किया था, जिसके बाद उनकी हत्या हुई। प्रदर्शनकारी सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह इस प्रभावशाली व्यक्ति को बचा रही है।
सबूतों से छेड़छाड़ और पुलिस की भूमिका: आरोप है कि घटना के बाद सबूत मिटाने की कोशिश हुई और स्थानीय पुलिस शुरू से संदिग्ध रवैया अपनाए हुए थी।
मुख्यमंत्री का इस्तीफा: कुछ वक्ताओं ने CM पुष्कर सिंह धामी से इस्तीफे की भी मांग की। महापंचायत में पांच प्रस्ताव पारित किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर परिवार की मूल शिकायत पर आधारित जांच की मांग की गई।
प्रमुख व्यक्तियों के बयान
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी: “मेरी बेटी झुकी नहीं, मैं कैसे झुकूं? CM से मिलने पर भी न्याय नहीं मिला।”
पूर्व CM हरीश रावत: जांच तभी सही होगी जब सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में नए सिरे से हो।
सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल: इसे ‘मिलावटी CBI जांच’ करार दिया।
केस की पृष्ठभूमि और ताजा स्थिति
2022 में रिसॉर्ट रिसेप्शनिस्ट अंकिता की हत्या के बाद तीन आरोपियों – पुलकित आर्य (पूर्व BJP नेता के बेटे), सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता – को मई 2025 में उम्रकैद की सजा हुई। दिसंबर 2025 में एक वायरल ऑडियो क्लिप ने केस को फिर गरमाया, जिसके बाद फरवरी 2026 में CBI ने अननोन वीआईपी के खिलाफ नई FIR दर्ज की और जांच शुरू की। लेकिन महापंचायत में लोगों ने इसे ‘दिखावा’ बताया और कहा कि असली दोषियों को बचाया जा रहा है।
यह मामला अब सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा और राज्य के स्वाभिमान का सवाल बन गया है। CBI जांच जारी है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का आक्रोश कम नहीं हो रहा। आने वाले दिनों में और प्रदर्शन हो सकते हैं।

