उत्तर प्रदेश पुलिस को लंबे इंतजार के बाद स्थिरता मिल गई है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 को 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश का स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त कर दिया। अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कार्यवाहक डीजीपी के रूप में कार्यरत राजीव कृष्ण अब पूर्णकालिक जिम्मेदारी संभालेंगे। यह नियुक्ति मई 2022 के बाद पहली स्थायी नियुक्ति है, जब मुकुल गोयल को हटाए जाने के बाद से प्रदेश में पांच कार्यवाहक डीजीपी बदले जा चुके थे। राजीव कृष्ण को इस पद पर कम से कम दो वर्षों का कार्यकाल मिलने की संभावना है। वे 30 जून 2029 तक सेवा में रहेंगे। इस नियुक्ति से यूपी पुलिस के करीब 2.3 लाख कर्मियों को नेतृत्व की निरंतरता मिलेगी, खासकर कानून-व्यवस्था, चुनावी तैयारियों और अपराध नियंत्रण की चुनौतियों के बीच।
UPSC पैनल और सीनियर अधिकारियों को पीछे छोड़ने का फैसला
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा भेजे गए तीन अधिकारियों के पैनल में राजीव कृष्ण का नाम शामिल था। पैनल में वरिष्ठतम रेणुका मिश्रा (1990 बैच), पीयूष आनंद (1991 बैच, केंद्र में NDRF के डीजी) और अन्य शामिल थे, लेकिन राज्य सरकार ने राजीव कृष्ण को प्राथमिकता दी। रेणुका मिश्रा पिछले दो वर्षों से बिना पद के डीजीपी कार्यालय से संबद्ध थीं और 2024 के कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले में उनकी भूमिका पर सवाल उठे थे। पीयूष आनंद केंद्र में तैनात थे। राजीव कृष्ण ने 11 सीनियर अधिकारियों को सुपरसीड करते हुए जून 2025 में कार्यवाहक डीजीपी का पद संभाला था। उनकी प्रशासनिक छवि, विजिलेंस और इंटेलिजेंस में अनुभव तथा राज्य नेतृत्व से निकटता को इस फैसले का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
राजीव कृष्ण कौन हैं?
राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को गौतमबुद्ध नगर में हुआ। उनके पिता एचके मित्तल हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की। 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में उन्होंने इलाहाबाद से ट्रेनिंग शुरू की। बरेली, कानपुर, अलीगढ़ में एएसपी, फिरोजाबाद, इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, लखनऊ और बरेली में एसएसपी के रूप में सेवा दी। मायावती शासनकाल में लखनऊ के डीआईजी और मेरठ रेंज के आईजी रहे। वे डीजी विजिलेंस, डीजी हेडक्वार्टर्स सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। राष्ट्रपति पुलिस पदक (PMG), प्रधानमंत्री पदक समेत कई सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। उनकी छवि एक तेज तर्रार और प्रौद्योगिकी-उन्मुख अधिकारी की है। नियुक्ति के बाद राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। उम्मीद है कि वे पुलिस में सुधार, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, साइबर क्राइम नियंत्रण और इंटेलिजेंस-आधारित पोलिसिंग पर जोर देंगे।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे “कार्यवाहक से स्थायी” बनाने की प्रक्रिया पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था ने पुलिस प्रशासन को प्रभावित किया है। यह नियुक्ति योगी सरकार के लिए पुलिस नेतृत्व में स्थिरता लाने का महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। राजीव कृष्ण के कार्यकाल में यूपी पुलिस की चुनौतियों से निपटने की क्षमता पर सबकी नजर रहेगी।

