ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश को ‘एक ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के औद्योगिक पार्क मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इसी क्रम में आज, अपर मुख्य सचिव (औद्योगिक विकास) एवं अध्यक्ष (YEIDA), आलोक कुमार ने मेडिकल डिवाइस पार्क स्थित एडमिनिस्ट्रेशन बिल्डिंग में विभिन्न इंडस्ट्रियल पार्कों की प्रगति की समीक्षा की और स्थलीय निरीक्षण कर जमीनी हकीकत परखी।इस दौरान उनके साथ एसीईओ शैलेंद्र भाटिया मौजूद रहे।

प्रस्तुतीकरण के जरिए पार्कों की स्थिति का जायजा
बैठक के दौरान अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) श्री शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्राधिकरण के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स की वर्तमान स्थिति और विकास कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। इस समीक्षा में निम्नलिखित पार्कों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई:
- मेडिकल डिवाइस पार्क एवं अपेरल पार्क
- MSME पार्क, टॉय पार्क और हेंडीक्राफ्ट पार्क
- सेमीकंडक्टर पार्क एवं डाटा सेंटर पार्क
- इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC) और जनरल इंडस्ट्री सेक्टर
धरातल पर उतरे अधिकारी, जल्द उत्पादन शुरू करने के निर्देश
समीक्षा बैठक के बाद अपर मुख्य सचिव ने स्वयं सभी इंडस्ट्रियल पार्कों और संबंधित सेक्टरों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा पर संतोष जताया, लेकिन साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन आवंटियों को भूमि मिल चुकी है, वहां औद्योगिक इकाइयों की स्थापना (Unit Setting) के कार्य में तेजी लाई जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उद्यमियों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, ताकि ये इकाइयां जल्द से जल्द अपना उत्पादन शुरू कर सकें और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हों।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक और निरीक्षण के दौरान यमुना प्राधिकरण के आला अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें:
- राजेश कुमार (अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी)
- शैलेंद्र कुमार सिंह (ओ.एस.डी.)
- महराम सिंह (ओ.एस.डी.)
- राजेन्द्र भाटी (जी.एम. प्रोजेक्ट)
- इसके साथ ही परियोजना, नियोजन और विद्युत विभाग के वरिष्ठ अभियंता एवं अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।
विकास की नई उड़ान
अपर मुख्य सचिव का यह दौरा इस मायने में अहम है कि यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र अब केवल रिहायशी या कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश के सबसे बड़े मल्टी-मॉडल इंडस्ट्रियल हब के रूप में उभर रहा है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स उत्तर प्रदेश को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने के लिए तैयार हैं।

