ऋषिकेश में गंगा की पवित्रता पर तमाचा: देवभूमि उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल ऋषिकेश में गंगा नदी की मर्यादा भंग करने वाली घटना ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया है। गंगा के बीच में खड़े होकर बीयर पीते और बोतल फेंकते युवकों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राफ्टिंग करते हुए गुजर रहे ग्रुप ने युवकों को रंगे हाथों पकड़ा, उनसे माफी मंगवाई और घटनास्थल से भगा दिया।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ युवक गंगा नदी के पानी में खड़े हैं और बीयर की बोतलें पी रहे हैं। पास से गुजर रहे राफ्टिंग ग्रुप के सदस्यों ने इसे देखते ही तुरंत विरोध जताया। उन्होंने युवकों को समझाया कि गंगा केवल पर्यटक आकर्षण नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। युवकों ने गलती मान ली, हाथ जोड़कर माफी मांगी और बोतलें समेत वहां से भाग गए।
घटना की प्रक्रिया इस प्रकार रही:
राफ्टिंग गाइड और ग्रुप के सदस्यों ने सबसे पहले युवकों को टोका और उनकी गतिविधि पर कड़ी आपत्ति जताई। युवकों से माफी मंगवाई गई और उन्हें गंगा की पवित्रता का महत्व समझाया गया। खाली बीयर की बोतलें/केन युवकों से लेकर जिम्मेदारी से निपटाई गईं ताकि नदी में प्रदूषण न फैले। कोई शारीरिक हिंसा नहीं हुई, बल्कि समझाइश और सामाजिक दबाव से मामला सुलझाया गया।
स्थानीय लोगों और भक्तों ने राफ्टिंग ग्रुप की सजगता की सराहना की है। कई लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में तुरंत हस्तक्षेप जरूरी है, वरना गंगा घाटों पर अनुशासनहीनता बढ़ती जा रही है। हालांकि कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि पुलिस या स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी क्यों नहीं थी और क्यों ऐसे मामलों में सिर्फ माफी पर छोड़ दिया जाता है।
ऋषिकेश में गंगा किनारे शराब पीना न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि उत्तराखंड एक्साइज पॉलिसी और गंगा प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का भी उल्लंघन है। गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा प्राप्त है और यहां शराब पीने पर जुर्माना, गिरफ्तारी या सामुदायिक सेवा जैसी सजाएं हो सकती हैं।
यह घटना मार्च के अंत में हुई बताई जा रही है, लेकिन वीडियो अब अप्रैल में तेजी से वायरल हो रहा है। इससे पहले भी लक्ष्मण झूला, गरुड़ चट्टी और गंगा घाटों पर शराब पीने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पर्यटन विभाग और पुलिस को अब गंगा तटों पर सख्त निगरानी बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है।
सामाजिक प्रतिक्रिया:
सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा — “मां गंगा को बार बनाकर इस्तेमाल करना बंद करो”, “राफ्टिंग वालों ने अच्छा काम किया, अब पुलिस भी जागे”। कुछ ने इसे “टूरिज्म vs आस्था” की बहस का मुद्दा बना दिया है। ऋषिकेश पुलिस और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद जांच शुरू होने की संभावना है।
सलाह: गंगा घाटों पर शराब, प्लास्टिक या किसी भी प्रकार का प्रदूषण फैलाना गैरकानूनी है। पर्यटकों से अपील है कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा का सम्मान करें। संदिग्ध गतिविधि देखने पर तुरंत पुलिस (100) या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।

