Scene Movie Review: सूर्या की फिल्म कैसी है? जानें पूरा रिव्यू

मनोरंजन डेस्क। तमिल सिनेमा के चहेते स्टार सूर्या की नई फिल्म ‘सीन’ (Scene) सिनेमाघरों में दर्शकों को खूब गुदगुदा रही है। ‘रोमांचम’ और ‘आवेशम’ जैसी हिट फिल्में दे चुके निर्देशक जीतू माधवन की यह फिल्म सीरियल किलर थ्रिलर होने के साथ-साथ ठेठ कॉमेडी भी है। फिल्म में सूर्या के साथ नज़रिया नज़ीम और नस्लेन अहम किरदारों में हैं।

क्या है फिल्म की कहानी?

सूर्या ने इंस्पेक्टर इनबराज का किरदार निभाया है। वह चेन स्मोकर है और पुलिस की नौकरी से परेशान होकर पांच बार इस्तीफा दे चुका है। उसके सीनियर स्टीफन (लाल) हर बार इस्तीफा टाल देते हैं और उसे बड़े केस सौंप देते हैं। इनबराज के काम करने का तरीका भी अनोखा है। वह सामने वाले से फॉरेंसिक रिपोर्ट छह-छह बार पढ़वाता है, ताकि कोई छोटी से छोटी कड़ी न छूटे। जब उसके सामने एक सीरियल किलर का केस आता है, तो उसे यह पुराने ‘परफ्यूम किलर’ केस जैसा लगता है। लेकिन इस बार हत्याएं बेहद सटीक योजना से हो रही हैं और इनके पीछे एक क्रूर युवा कातिल ईश्वरन (नस्लेन) है। जांच में माया (नज़रिया) भी इनबराज के साथ जुड़ती है। इसके बाद कहानी में मस्ती, सस्पेंस और कई अप्रत्याशित मोड़ आते हैं।

निर्देशन और पटकथा

फिल्म की शुरुआत धीमी है और किरदारों व कहानी की नींव रखने में काफी समय लेती है, जिससे शुरुआती हिस्से में दर्शक बेचैन हो सकते हैं। हालांकि पहले हिस्से में बोए गए ज्यादातर बीज आगे चलकर शानदार तरीके से सामने आते हैं और तब फिल्म अपनी पूरी रफ्तार पकड़ती है।जीतू माधवन ने जांच-पड़ताल वाली फिल्म को गंभीर बनाने के बजाय हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया है। हर किरदार की अपनी सनक और कमजोरी है, और वही कहानी की ताकत बन जाती है। इनबराज के पिता याददाश्त की समस्या से जूझते हैं और मां शराब की आदी हैं। यह अजीबोगरीब परिवार कहानी में अलग रंग भरता है। फिल्म में सूर्या के पुराने मशहूर संवादों की झलक और एक सरप्राइज कैमियो भी है, जो फैंस को खुश करेगा, पर बात संदर्भों की भरमार नहीं बनती।

कलाकारों का अभिनय

सूर्या ने अपने स्टारडम को पीछे रखकर किरदार की कमजोरियों, सनक और कॉमिक टाइमिंग को उभरने दिया है। रिव्यू के मुताबिक ‘करुप्पु’ और ‘विश्वनाथ एंड संस’ के बाद यह उनकी लगातार तीसरी कामयाबी है। नज़रिया सिर्फ सहायक की भूमिका में नहीं हैं। उनके किरदार का अपना ट्रॉमा, इमोशनल आर्क, कॉमेडी, एक्शन सीक्वेंस और हल्का रोमांस भी है। वहीं नस्लेन अपने बेफिक्र और ठंडे अंदाज में ईश्वरन के रोल में छा गए हैं। ‘लुंगी बॉयज’ फेम राजप्रियन और सुरेश मथियाझगन भी अपने हिस्से में असर छोड़ते हैं।

कहां रह गई कमी?

फिल्म का पहला हिस्सा किरदारों और माहौल को सेट करने में कुछ ज्यादा समय लेता है। शुरुआती कुछ दृश्यों में कॉमेडी उतनी असरदार नहीं लगती, और कई जगह सुविधा के हिसाब से घटनाएं होने से तर्क पर सवाल उठते हैं। लेकिन पहला आमना-सामना, तीनों मुख्य किरदारों का ट्रीटमेंट और कमजोरियों को ताकत में बदलने की चतुराई इन कमियों की भरपाई कर देती है।

फाइनल वर्डिक्ट

‘सीन’ एक प्रयोगधर्मी इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा है, जिसमें सूर्या को स्टार इमेज से बाहर निकलकर किरदार का मजा लेने का मौका मिला है। जब कोई बड़ा स्टार कहानी के आगे झुकता है, तो फिल्म और दिलचस्प बन जाती है। सूर्या के फैंस और थ्रिलर-कॉमेडी पसंद करने वालों के लिए यह फिल्म अच्छा विकल्प है।

यह भी पढ़ें: मुंबई में बम की धमकी: अमिताभ बच्चन के बंगले ‘जलसा’, बॉम्बे हाईकोर्ट और BSE को निशाना बनाने की चेतावनी

यहां से शेयर करें