फिल्म समीक्षा : भव्य दृश्यों और दमदार अभिनय से सजी नितेश तिवारी की ‘रामायण’

‘Ramayana’ मुंबई। कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जिन्हें बार-बार देखने और सुनने के बाद भी उनका आकर्षण कम नहीं होता। ‘रामायण’ भी ऐसी ही एक कहानी है, जो हर भारतीय के दिल और भावनाओं से जुड़ी हुई है। इस कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करना आसान नहीं है, क्योंकि दर्शक इसके हर किरदार और प्रसंग से परिचित हैं। ऐसे में निर्देशक नितेश तिवारी ने ‘रामायण’ के जरिए एक बार फिर इस महागाथा को नए अंदाज और भव्यता के साथ पेश करने की कोशिश की है। रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म केवल पौराणिक कहानी नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, मर्यादा, अहंकार और धर्म की लड़ाई को बड़े सिनेमाई स्तर पर दिखाती है। फिल्म की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कहानी की मूल भावना को बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल्स का इस्तेमाल किया गया है।

कहानी

फिल्म की कहानी वाल्मीकि रामायण पर आधारित है। शुरुआत देवताओं और असुरों के संघर्ष से होती है, जिसके बाद लंका में रावण के उदय की कहानी दिखाई जाती है। यश ने रावण के किरदार में एक ऐसे शासक को पेश किया है, जिसके अंदर अपार शक्ति, बुद्धिमत्ता और तीनों लोकों पर राज करने की महत्वाकांक्षा है। तपस्या, ब्रह्मा से वरदान, इंद्र को पराजित करना और कुबेर से लंका पर अधिकार करने जैसे प्रसंग रावण के व्यक्तित्व को विस्तार देते हैं। इसके बाद कहानी अयोध्या पहुंचती है, जहां राजा दशरथ के घर भगवान विष्णु राम के रूप में जन्म लेते हैं। राम का बचपन, उनकी शिक्षा और शस्त्र विद्या के साथ विश्वामित्र के साथ उनकी यात्रा दिखाई जाती है। ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और मिथिला में सीता स्वयंवर जैसे प्रसंग कहानी को आगे बढ़ाते हैं।

राम और सीता का विवाह फिल्म का खूबसूरत हिस्सा है। इसके बाद कैकेयी के दो वरदान मांगने से कहानी में बड़ा मोड़ आता है। वह भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगती हैं। राम बिना किसी विरोध के पिता के वचन का सम्मान करते हुए वन जाने का फैसला करते हैं। सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वनवास पर निकल पड़ते हैं। दूसरी ओर लंका में रावण की महत्वाकांक्षा और शूर्पणखा से जुड़ी घटनाएं कहानी को आगे बढ़ाती हैं। आखिरकार रावण सीता का हरण कर उन्हें लंका ले जाता है। फिल्म का पहला भाग यहीं तक की कहानी दिखाता है और आगे होने वाले राम-रावण युद्ध की भूमिका तैयार करता है। ‘Ramayana’

निर्देशन

नितेश तिवारी ने इस महागाथा को पर्दे पर उतारने में काफी मेहनत की है। ‘रामायण’ की कहानी से दर्शक पहले से परिचित हैं, इसलिए इसमें सबसे जरूरी था कि कहानी को बिना उसकी मूल भावना से छेड़छाड़ किए एक नया सिनेमाई रूप दिया जाए। निर्देशक इस काम में सफल नजर आते हैं। उन्होंने फिल्म को केवल वीएफएक्स और बड़े सेट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि किरदारों के रिश्तों और भावनाओं को भी अच्छी जगह दी है। राम और लक्ष्मण का भाईचारा, राम-सीता का प्रेम, कैकेयी के साथ राम का संवाद और रावण की महत्वाकांक्षा जैसे प्रसंग फिल्म को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाते हैं।

फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं, जो दर्शकों को कहानी से जोड़ते हैं। रामायण लोगों के लिए सिर्फ एक फिल्म या कहानी नहीं, बल्कि आस्था और भावनाओं का विषय है। ऐसे में इसके किरदारों और संवादों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी थी। फिल्म में अनावश्यक बदलाव करने के बजाय मूल प्रसंगों को भव्य तरीके से दिखाने पर ध्यान दिया गया है। यही बात इसे खास बनाती है। हालांकि कुछ जगह कहानी थोड़ी धीमी जरूर पड़ती है, लेकिन निर्देशक ने कहानी को जल्दबाजी में खत्म करने के बजाय हर किरदार को समय दिया है।

तकनीकी पक्ष

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका तकनीकी स्तर है। अयोध्या की भव्यता, मिथिला की खूबसूरती, लंका के महल, जंगल और युद्ध से जुड़े दृश्य काफी शानदार हैं। फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन और सिनेमैटोग्राफी इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। DNEG के विजुअल इफेक्ट्स फिल्म को बड़े स्तर पर पेश करने में अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर रावण से जुड़े दृश्य और जटायु-रावण का संघर्ष देखने लायक हैं। कुछ जगह सीजीआई (कंप्यूटर-जेनरेटेड इमेजरी) थोड़ा कृत्रिम जरूर लगता है, लेकिन ज्यादातर दृश्य बड़े पर्दे पर शानदार प्रभाव छोड़ते हैं। पंकज कुमार और महेश लिमये की सिनेमैटोग्राफी तारीफ के काबिल है। हर लोकेशन और दृश्य को खूबसूरती से फिल्माया गया है।

एआर रहमान और हैंस जिमर का संगीत फिल्म का एक और मजबूत पक्ष है। दोनों का संगीत कहानी के भावनात्मक और पौराणिक माहौल को बेहतर बनाता है। कई दृश्यों में बैकग्राउंड स्कोर आपको कहानी के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ देता है। तीन घंटे से ज्यादा की फिल्म होने के बावजूद इसके शानदार विजुअल्स दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं। खासकर नई पीढ़ी के दर्शकों के लिए यह फिल्म रामायण की पुरानी कहानी को एक नए और आधुनिक अंदाज में देखने का मौका देती है।

अभिनय

रणबीर कपूर ने भगवान राम के किरदार को बेहद शालीनता और संयम के साथ निभाया है। उनके चेहरे पर शांति, व्यवहार में मर्यादा और संवादों में गंभीरता दिखाई देती है। खासकर वनवास स्वीकार करने और कैकेयी के साथ भावनात्मक दृश्यों में उनका अभिनय अच्छा लगता है। उन्होंने राम के किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने की कोशिश नहीं की है। यश रावण के किरदार में काफी प्रभावशाली हैं। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और संवाद अदायगी किरदार को अलग पहचान देती है। वह रावण के अहंकार, शक्ति और महत्वाकांक्षा को अच्छी तरह पर्दे पर उतारते हैं। जब भी वह स्क्रीन पर आते हैं, दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं।

साई पल्लवी सीता के किरदार में बेहद सहज और खूबसूरत लगती हैं। उनके अभिनय में सादगी और गरिमा दिखाई देती है। रवि दुबे ने लक्ष्मण के रूप में अच्छा काम किया है। राम के प्रति उनका समर्पण और भाई के साथ उनकी केमिस्ट्री देखने लायक है। रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा के किरदार में प्रभावित करती हैं। लारा दत्ता कैकेयी के रूप में अच्छी लगती हैं, वहीं अरुण गोविल राजा दशरथ के किरदार में भावनात्मक प्रभाव छोड़ते हैं। अनुपम खेर की आवाज में जटायु का किरदार खास है। जटायु से जुड़ा दृश्य भावुक कर सकता है। आदिनाथ कोठारे भरत, विवेक ओबेरॉय विद्युतजिह्वा और सौरभ सचदेवा मारीच के किरदार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं।

क्या है खास

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी भव्यता और कहानी को पेश करने का अंदाज है। रामायण की कहानी पहले भी कई बार पर्दे पर दिखाई जा चुकी है, लेकिन इस बार तकनीक और विजुअल्स के कारण इसका अनुभव बिल्कुल अलग है। राम-लक्ष्मण का रिश्ता, राम-सीता की भावनाएं, रावण का व्यक्तित्व और लंका की भव्यता फिल्म को खास बनाते हैं। कमियों की बात करें तो फिल्म की लंबाई थोड़ी ज्यादा है। कुछ दृश्यों को छोटा किया जा सकता था। वहीं कुछ जगह सीजीआई को और बेहतर बनाने की जरूरत महसूस होती है। हालांकि ये कमियां फिल्म के कुल अनुभव को ज्यादा प्रभावित नहीं करतीं।

कुल मिलाकर नितेश तिवारी की ‘रामायण’ एक शानदार सिनेमाई अनुभव है। रणबीर कपूर ने राम के किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी है, यश रावण के रूप में दमदार नजर आते हैं और साई पल्लवी ने सीता के किरदार को खूबसूरती से निभाया है। फिल्म की भव्यता, शानदार विजुअल्स, बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी और एआर रहमान-हैंस जिमर का संगीत इसे बड़े पर्दे पर देखने लायक बनाते हैं। कुछ जगह फिल्म की लंबाई और वीएफएक्स में सुधार की गुंजाइश जरूर है, लेकिन इसकी खूबियां इन कमियों पर भारी पड़ती हैं। बचपन से ‘रामायण’ की कहानी जानने वाले दर्शकों को भी इसमें कुछ नया देखने को मिलेगा। खासकर नई पीढ़ी के लिए यह फिल्म भारतीय महाकाव्य से जुड़ने का शानदार माध्यम बन सकती है।

अगर आप रामायण की कहानी, भव्य सिनेमा और शानदार विजुअल्स के शौकीन हैं, तो यह फिल्म थिएटर में जरूर देखनी चाहिए। आईमैक्स और 3डी में इसका अनुभव और भी शानदार हो सकता है। फिल्म को लेकर जितनी हाइप थी, वह काफी हद तक सही साबित होती है।  ‘Ramayana’

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