वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार रात स्वीकार किया कि ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध और उससे बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने 2026 के मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया। फिर भी उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे उसी फैसले को दोहराएंगे।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “ईरान इसका एक हिस्सा था।” उन्होंने जोड़ा, “मैं इसके बारे में नहीं सोचता। मैंने सही काम किया। मैं फिर वही करूंगा।” फॉक्स न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा कि लोग ईरान पर उनकी कार्रवाई की अहमियत समझते हैं, लेकिन अल्पकालिक पेट्रोल महंगाई बर्दाश्त करने को तैयार नहीं थे। “मुझे लगता है कि यह युद्ध नहीं, बल्कि गैसोलीन की कीमत है। लोग ईरान पर जो मैं कर रहा हूं उससे सहमत हैं, लेकिन महंगे पेट्रोल का अल्पकालिक असर सहन नहीं करना चाहते।”
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने और साफ शब्दों में कहा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “हम हारे इसका कारण युद्ध है। राष्ट्रपति ने खुद पिछले रात कहा।” उन्होंने आगे लिखा कि अगर कोई कहे कि सीनेट छह साल के लिए हारना भी युद्ध के लायक था, तो वह तर्क दे, लेकिन ईमानदार चर्चा यहीं से शुरू होनी चाहिए।
डेमोक्रेट्स की ‘ब्लू वेव’
3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों पर कब्जा कर लिया। यह रिपब्लिकनों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। डेमोक्रेट्स ने कंसस, साउथ कैरोलिना, टेक्सास, आयोवा और मेन जैसे रिपब्लिकन गढ़ों में सीनेट सीटें फ्लिप कीं। टेक्सास में जेम्स तलारिको ने सीनेट सीट जीतकर इतिहास रच दिया, जबकि राज्यपाल पद पर भी डेमोक्रेट जीना हिनोजोसा ने जीत दर्ज की। हाउस में भी डेमोक्रेट्स ने दो दर्जन से ज्यादा सीटें छीन लीं।
युद्ध लगभग नौ महीने पुराना है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। इसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना बताया गया। लेकिन युद्ध ने तेल आपूर्ति प्रभावित की, जिससे अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। मतदाताओं ने इसे अपनी जेब पर सीधा हमला माना। एग्जिट पोल के अनुसार कई मतदाताओं ने युद्ध को अपने वोट का प्रमुख कारण बताया।
रिपब्लिकनों में नया यथार्थ
सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव नतीजों के बाद रिपब्लिकन खेमे में सुबह से ही आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। कई नेताओं ने निजी कॉल और मैसेज में दक्षिण में रिडिस्ट्रिब्यूटिंग जैसी रणनीतियों और ईरान युद्ध को राजनीतिक रूप से नुकसानदेह बताया। पार्टी अब डेमोक्रेट नियंत्रित कांग्रेस के साथ काम करने की नई हकीकत से जूझ रही है। ट्रंप ने हालांकि नतीजों को अपनी प्रेसीडेंसी का विरोध नहीं माना। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात यह थी कि वे खुद बैलट पर नहीं थे।
ट्रंप ने कैबिनेट में किसी बदलाव से इनकार किया और वीटो पावर इस्तेमाल करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जब ईरान संकट सुलझेगा और पेट्रोल सस्ता होगा, तब डेमोक्रेट्स को वोट देने वाले मतदाताओं को पछतावा होगा।
ईरान ने चुनाव नतीजों को अमेरिकी जनता का युद्ध विरोध बताया है। वहीं, ट्रंप प्रशासन अभी भी तैयार है, लेकिन नए कांग्रेस सत्र से पहले बड़े हमले की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है। विश्लेषकों का कहना है कि कमजोर ट्रंप अब डील की दिशा में बढ़ सकते हैं, क्योंकि डेमोक्रेट्स सैन्य विकल्पों पर लगाम लगा सकते हैं। यह नतीजा ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के आखिरी दो सालों के लिए बड़ा संदेश है। रिपब्लिकन पार्टी अब खुद को फिर से संगठित करने और मतदाताओं के गुस्से को समझने की कोशिश कर रही है, जबकि ट्रंप अपने फैसले पर अड़े हुए हैं।

