यरूशलम/तेल अवीव। इजराइल में मंगलवार (27 अक्टूबर 2026) को देश के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक का मतदान हुआ। यह 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद पहला आम चुनाव है, जिसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता और नेतृत्व पर लोगों ने फैसला दिया। मुख्य चुनौती पूर्व सैन्य प्रमुख गदी आइजेंकोट की ओर से है, जिनकी नई पार्टी याशर विपक्षी खेमे की अगुवाई कर रही है।
मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और रात 10 बजे समाप्त होना था। केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार शुरुआती घंटों में मतदान दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सात घंटे में ही 44.9 प्रतिशत और नौ घंटे में 55.7 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाल दिया, जो 1973 के बाद सबसे तेज गति है। बाद में यह आंकड़ा और ऊपर गया। करीब 73 लाख पात्र मतदाता हैं।
नेतन्याहू का अलर्ट और अरब मतदाताओं का मुद्दा
चुनाव के दिन नेतन्याहू और उनके दक्षिणपंथी सहयोगियों ने समर्थकों को मतदान केंद्रों की ओर खींचने के लिए जोरदार अपील की। उन्होंने अरब समुदायों में बढ़ते मतदान की चेतावनी दी। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने अरब इलाकों में लंबी कतारों और बसों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उनके समर्थक नहीं जागे तो “मंसूर अब्बास और अहमद तिबी की सरकार” बन जाएगी। उन्होंने इसे “घर के लिए युद्ध” बताया और कहा कि अरब मतदाता “मतदान केंद्रों पर हमला” कर रहे हैं तथा चुनाव “चुराने” की कोशिश हो रही है।
अरब नेताओं ने इस रणनीति को नस्लवादी और भड़काऊ बताया। अहमद तिबी और अन्य नेताओं ने कहा कि मजबूत अरब मतदान वैकल्पिक सरकार का रास्ता खोलेगा और हकीकत बदलेगा। अरब नागरिक इजराइल की आबादी का करीब 21 प्रतिशत हैं और परंपरागत रूप से उनकी मतदान दर कम रही है। इस बार उम्मीद जताई जा रही थी कि यह बढ़कर 63 प्रतिशत के आसपास पहुंच सकती है, जिससे छोटे दक्षिणपंथी दलों की सीमा पार करने में मुश्किल हो सकती है और विपक्ष को फायदा हो सकता है।
सर्वे और संभावित नतीजे
अंतिम सर्वेक्षणों (कानूनी ब्लैकआउट से पहले) में आइजेंकोट की याशर पार्टी अक्सर लिंकुड से आगे दिख रही थी (करीब 20-23 सीटें)। नेतन्याहू के दक्षिणपंथी-धार्मिक गठबंधन को करीब 48-53 सीटें और विपक्षी ब्लॉक (याशर, बेनेट के साथी दल आदि) को 52-56 सीटों के आसपास अनुमानित किया जा रहा था। 120 सदस्यीय कनेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। दोनों मुख्य खेमे पूर्ण बहुमत से दूर दिख रहे थे। अरब पार्टियां (जॉइंट लिस्ट और राअम) 12-16 सीटें पा सकती हैं, जो किंगमेकर बन सकती हैं।
नेतन्याहू ने सुरक्षा रिकॉर्ड, ईरान खतरे और ट्रंप समर्थन पर जोर दिया। आइजेंकोट ने 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता की जवाबदेही, अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स की सैन्य भर्ती और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाया। कई मतदाता इसे नेतन्याहू के लंबे शासन और युद्धकालीन नेतृत्व पर जनमत संग्रह मान रहे हैं।
मतदान समाप्त होने के बाद एग्जिट पोल और शुरुआती नतीजे सामने आने की उम्मीद है। अंतिम आधिकारिक परिणाम कुछ दिनों में आ सकते हैं। अगर कोई स्पष्ट बहुमत नहीं बनता तो गठबंधन वार्ता हफ्तों या महीनों तक खिंच सकती है। इजराइल की राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इस चुनाव का गहरा असर पड़ने वाला है।
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