नोएडा सेक्टर-62 की रामलीला में दिखा हनुमान का पराक्रम, लंका दहन देख भावविभोर हुए दर्शक

नोएडा। सेक्टर-62 के रामलीला मैदान में श्रीराम मित्र मंडल नोएडा रामलीला समिति की ओर से चल रही श्रीरामलीला के आठवें दिन भक्ति और उत्साह का माहौल रहा। सुग्रीव मित्रता से लेकर लंका दहन, विभीषण की शरणागति और सेतु बंधन तक के प्रसंगों का मंचन देखने के लिए शहर के हजारों श्रद्धालु पहुंचे।

दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ

आठवें दिन के मुख्य अतिथि कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के अपर पुलिस आयुक्त राजीव नारायण मिश्रा रहे। उनके साथ अपर पुलिस उपायुक्त अभय कुमार मिश्रा, श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं श्रीदुधेश्वरनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर श्री महंत नारायण गिरी जी महाराज और गोरखपुर विश्वविद्यालय के उप कुलपति केपी सिंह मौजूद रहे।

इनके अलावा नोएडा पंजाबी समाज के अध्यक्ष पंकज अजमानी, एनआरआई सिद्धार्थ श्रीवास्तव, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भारतेंदु कुमार और आर्य समाज नोएडा के सचिव कैप्टन अशोक गुलाटी ने भी संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर रामलीला का शुभारंभ किया। समिति के चेयरमैन उमाशंकर गर्ग, अध्यक्ष धर्मपाल गोयल और महासचिव डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए और अंगवस्त्र ओढ़ाकर उनका स्वागत किया।

सुग्रीव मित्रता से सीता की खोज तक

मंचन की शुरुआत श्रीराम और सुग्रीव की भेंट से हुई, जो गहरी मित्रता में बदल गई। इसके बाद श्रीराम ने बाली का वध किया और सुग्रीव का राजतिलक हुआ। राजसुख में डूबकर सुग्रीव ने सीता की खोज में कोई प्रयास नहीं किया, तो श्रीराम और लक्ष्मण उन पर क्रोधित हुए। इसके बाद अंगद, नील, जाम्वन्त और हनुमान को दक्षिण दिशा में भेजा गया। खोज के दौरान वानर दल की भेंट जटायु के भाई सम्पाती से हुई। उन्होंने बताया कि सीता लंका में हैं और वहां वही पहुंच सकता है जो सौ योजन समुद्र लांघ सके। समुद्र तट पर जाम्वन्त ने हनुमान जी को उनके बल की याद दिलाई। श्रीराम का नाम स्मरण कर हनुमान जी लंका की ओर चल पड़े।

सुरसा की परीक्षा और अशोक वाटिका

मार्ग में सुरसा ने हनुमान जी की परीक्षा ली। सुरसा ने अपना शरीर सोलह योजन तक फैलाया, तो हनुमान जी ने बत्तीस योजन तक विस्तार कर लिया। सुरसा संतुष्ट हो गईं और हनुमान जी सिर नवाकर आगे बढ़ गए।

अशोक वाटिका पहुंचकर हनुमान जी उस वृक्ष पर छिप गए जहां सीता जी बैठी थीं। उन्होंने ऊपर से श्रीराम नाम की मुद्रिका (अंगूठी) गिराई, जिसे देखकर सीता जी के मन में विस्मय हुआ। सीता जी की आज्ञा पाकर हनुमान जी ने वाटिका के फल खाए और पेड़ उखाड़ने लगे। रखवालों की सूचना पर रावण ने अक्षय कुमार को भेजा, जिसका हनुमान जी ने वध कर दिया।

रावण दरबार में हनुमान की चेतावनी

मेघनाद हनुमान जी को पकड़कर रावण के दरबार में ले आया। वहां हनुमान जी ने रावण से कहा कि अब भी समय है, अपने कुकर्मों के लिए श्रीराम से क्षमा मांग लो, वे दया की मूर्ति हैं और निश्चित ही क्षमा कर देंगे। अहंकार में डूबे रावण ने इनकार कर दिया। दरबारी हनुमान को मृत्युदंड देने की बात करने लगे, लेकिन विभीषण के समझाने पर रावण ने पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। इसके बाद हनुमान जी एक महल से दूसरे महल पर कूदते गए और पूरी लंका जला दी। लंका दहन के दृश्य पर दर्शकों ने जमकर जयकारे लगाए।

विभीषण का त्याग और सेतु बंधन

लंका दहन के बाद रावण के दरबार में युद्ध की रणनीति पर चर्चा हुई। रावण ने विभीषण की राय पूछी, तो उन्होंने फिर श्रीराम की शरण में जाने की सलाह दी। क्रोधित रावण ने विभीषण को लात मारकर लंका से निकल जाने का आदेश दिया। इसके बाद विभीषण श्रीराम की शरण में पहुंचे। अगले दृश्य में श्रीराम ने रामेश्वरम की स्थापना के लिए भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। इसके बाद नल और नील ने सेतु बंधन का कार्य शुरू किया। श्रीराम का नाम लिखकर फेंके गए पत्थर समुद्र में नहीं डूबे, तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।

इस बार हाईटेक अंदाज़ में रामलीला

सेक्टर-62 की यह रामलीला इस साल अपनी तकनीकी प्रस्तुति के लिए भी चर्चा में है। पत्रिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रामलीला का आयोजन 10 अक्टूबर से शुरू होना था और इस बार इसे हाईटेक तरीके से पेश करने की तैयारी थी, जिसमें लोग ऐप पर भी रामलीला देख सकेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक मंच पर सीता स्वयंवर के समय जनकनगरी, वनवास की लीला के समय जंगल और सीता हरण के समय लंका के दृश्य दिखाए जाने थे। उसी रिपोर्ट में समिति अध्यक्ष धर्मपाल गोयल के हवाले से रावण का पुतला 80 फुट, कुंभकर्ण का 70 फुट और मेघनाद का 60 फुट का होने की जानकारी दी गई थी।

अगले दिन के प्रसंग

महासचिव डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि 19 अक्टूबर को अंगद-रावण संवाद, मेघनाद-लक्ष्मण युद्ध, लक्ष्मण मूर्छा, संजीवनी बूटी, कुंभकर्ण वध और मेघनाद वध जैसे प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार गर्ग, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र गर्ग, सलाहकार मनोज शर्मा, सह-कोषाध्यक्ष अनिल गोयल, मीडिया प्रभारी मुकेश गुप्ता, गिरिराज बहेड़िया, चक्रपाणि गोयल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतनारायण गोयल, चौधरी रविन्द्र सिंह, दयाशंकर तिवारी, तरुणराज, पवन गोयल, मुकेश गोयल, बजरंग लाल गुप्ता, एस एम गुप्ता, गौरव मेहरोत्रा, मुकेश अग्रवाल, भानुप्रताप सिंह, अनंत वर्मा, राजेश माथुर, साहिल चौधरी, नवीन पोरवाल, बीके राय, रामकुमार शर्मा, दिनेश मित्तल, अर्जुन अरोड़ा, आर के उप्रेती, बाबूराम शर्मा, संतोष त्रिपाठी, अर्जुन प्रजापति, नरेंद्र आर्य, मनीष सिंह चौहान और उमेश यादव सहित समिति के सदस्य और शहर के हजारों गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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