राजपाल यादव का सुप्रीम कोर्ट में छलका दर्द

 

नई दिल्ली, बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अपने लंबे चेक बाउंस मामले की सुनवाई के दौरान खुद अदालत को संबोधित करते नजर आए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने अभिनेता ने पिछले 13-16 वर्षों की वित्तीय और पेशेवर मुश्किलों का जिक्र करते हुए अपना दर्द छलकाया। सुनवाई के दौरान अदालत में हल्के-फुल्के माहौल के बीच राजपाल यादव ने अपनी अगली फिल्म का टाइटल भी बता दिया—‘सोलह सावन झेल के’।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। राजपाल यादव ने अदालत को बताया कि उन्होंने करीब 200-250 फिल्मों में काम किया है, लेकिन पिछले 13 साल में उन्हें लगभग 200-250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अपनी निर्देशन डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ (2012) में अकेले 17 करोड़ रुपये डूब गए।

उन्होंने कहा, “सर, प्रणाम करता हूं। दो-ढाई सौ फिल्में की हैं। पिछले 13 साल में दो-ढाई सौ करोड़ का नुकसान भी कर चुका हूं। ‘अता पता लापता’ में मेरा 17 करोड़ डूबा। यह मर्चेंट ऑफ वेनिस वाला केस है हुजूर। चाहो जब चाहो, जहां भेज दो, मैं हर समय रेडी हूं। लेकिन कुल 22 करोड़ था। 5 करोड़ ने मेरे 17 करोड़ को 2013 से मिट्टी में मिला दिया और एक रुपया नहीं कमाने दिया।”

राजपाल यादव ने दावा किया कि फिल्म 1200 थिएटरों में रिलीज होनी थी, लेकिन एक में भी नहीं हो पाई। उनके खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई और ब्रांडिंग तबाह हो गई। उन्होंने बताया कि 2012 में संबंधित व्यक्ति उनके दोस्त थे और कहते थे कि वे हजार-डेढ़ हजार करोड़ के आदमी हैं, 5 करोड़ कहां आता-जाता है। बाद में अदालत में रगड़ने की धमकी दी गई।

कोर्ट में हल्का माहौल और CJI की सलाह

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अभिनेता से पूछा, “कुछ नया बना रहे हो नहीं?” जब राजपाल यादव ने अपनी मुश्किलें बताईं तो CJI ने हल्के अंदाज में कहा, “कोई नई मूवी आ रही है? कोई अच्छी सी मूवी बनाके लोगों को दोबारा एंटरटेन करो। आपकी इमेज दोबारा बन जाएगी। हमारे यहां कुछ एडवोकेट भी अच्छे एक्टर हैं, उनको लेकर कोई मूवी बनाओ।”

इस पर राजपाल यादव ने जवाब दिया, “सर, 2010 से 2026 तक जो हुआ, उसका टाइटल भी हमने सोचा है—सोलह सावन झेल के।” कुछ रिपोर्ट्स में CJI ने फिल्म के टाइटल का जिक्र करते हुए मजाक में कहा कि जैसे फिल्म का नाम ‘अता पता लापता’ है, वैसे ही पैसा भी लापता हो गया।

पैसे जमा करने का प्रस्ताव स्वीकार

अभिनेता ने अदालत को बताया कि वे तत्काल 2 करोड़ रुपये जमा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने 1.15 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट पेश किए। बाकी 85 लाख रुपये उनकी पैतृक संपत्ति के संभावित खरीदार द्वारा दिए जाएंगे। खरीदार अदालत में मौजूद भी थे। पितृ पक्ष के कारण रजिस्ट्रेशन में देरी हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए कहा कि 13 अक्टूबर तक शेष 85 लाख जमा कर दिए जाएं। इसके बाद बाकी रकम के भुगतान का शेड्यूल तय किया जाएगा। पीठ ने साफ किया कि यह राहत मुख्य रूप से शिकायतकर्ता को पैसा दिलाने के लिए दी जा रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 2010 का है जब राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने दिल्ली की मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए करीब 5 करोड़ रुपये का वित्तीय सहयोग लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। 2012-13 में समझौते के तहत भुगतान के लिए सात चेक (प्रत्येक लगभग 1.05 करोड़ रुपये के) जारी किए गए, जो बाउंस हो गए।

ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया। जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखते हुए तीन महीने की साधारण कैद सुनाई और बड़ी रकम जमा करने को कहा। हाईकोर्ट ने अभिनेता के रवैये को ‘संदिग्ध’ बताया था। सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए 2 करोड़ जमा करने का आखिरी मौका दिया था। अक्टूबर की शुरुआत में अनुपालन न होने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी।

आज की सुनवाई में राजपाल यादव के वकील ने इसे बड़ी राहत बताया। अभिनेता ने बाहर आकर कहा कि वे देश, सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं और जो भी फैसला होगा, उसे स्वीकार करेंगे। यह मामला अभी भी जारी है। अदालत अब 13 अक्टूबर तक की स्थिति देखकर आगे का रुख तय करेगी। राजपाल यादव की अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति और सीधी बातचीत ने इस लंबे कानूनी संघर्ष को एक अलग रंग दे दिया है।

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