नोएडा। सेक्टर-61 स्थित रामा अस्पताल में इलाज के दौरान स्वर्गीय पुष्पा देवी (52) की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर सोमवार (5 अक्टूबर 2026) सुबह सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल नोएडा महानगर के आह्वान पर हुए इस धरने में क्षत्रिय करणी सेना नोएडा महानगर ने भी सक्रिय समर्थन दिया। पीड़ित परिवार के सदस्यों और संगठनों के कार्यकर्ताओं ने रामा अस्पताल के संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ संज्ञान लेने तथा निष्पक्ष व समयबद्ध जांच की मांग की।
धरना सुबह 11 बजे शुरू हुआ। बजरंग दल नोएडा महानगर के संयोजक विनोद चौहान के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षत्रिय करणी सेना के नोएडा महानगर अध्यक्ष ठाकुर संग्राम सिंह चौहान, प्रदेश प्रवक्ता विपिन सिंह सूर्यवंशी समेत सुरेश राठौड़, नवदीप, सूरज, आकाश, मुकेश, राहुल, बुद्धू सौरम, कुलदीप, पंकज, मोहित, विशाल सहित कई कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के साथ मौजूद रहे। संगठनों ने साफ कहा कि यह धरना पूर्णतः शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से रखा गया।
परिजनों के आरोप: हल्के बुखार से भर्ती, CECT के बाद हालत बिगड़ी
परिजनों का आरोप है कि 52 वर्षीय पुष्पा देवी को 14 अप्रैल 2026 को हल्के बुखार और उल्टी की शिकायत के साथ रामा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उनकी हालत स्थिर बताई जा रही थी। 15 अप्रैल को Contrast CECT जांच के बाद हालत अचानक बिगड़ गई। परिवार का दावा है कि उपचार कर रहे डॉक्टर ने इस जांच पर आपत्ति जताई थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल रेफर किया गया, जहां 16 अप्रैल को उनका निधन हो गया। बेटे मोहित शर्मा ने इस पूरे प्रकरण को चिकित्सकीय लापरवाही करार दिया है।
भारत शर्मा (परिवार से जुड़े) और मोहित शर्मा ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए रामा अस्पताल के दो डॉक्टरों—रामातुल्ला खान और श्रुति—पर संज्ञान लेने की मांग की। पीड़ित की माता को बिना किसी इलाज के 4-5 दिन बैठाए रखने तथा इस दौरान किसी डॉक्टर द्वारा निरीक्षण न किए जाने का आरोप भी दर्ज है। जिला अस्पताल के CMO द्वारा आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
मोहित शर्मा ने पहले जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्रियों तक शिकायत पहुंचाई थी। 28 अप्रैल 2026 को CMO कार्यालय की ओर से सात दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच और वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन मिला था, लेकिन समय बीतने के बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। निराश होकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।
संगठनों की मांग: निष्पक्ष जांच, साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं
क्षत्रिय करणी सेना नोएडा महानगर की ओर से कहा गया कि संगठन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही या दोष सिद्ध होता है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। धरने के दौरान “न्याय चाहिए, केवल आश्वासन नहीं” के नारे लगे।
ठाकुर संग्राम सिंह चौहान (नोएडा महानगर अध्यक्ष, क्षत्रिय करणी सेना) ने कहा कि 14 सितंबर 2026 को चेतना मंच द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद अब VHP, बजरंग दल एवं करणी सेना भी पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। धरने के दौरान अधिकारियों के समक्ष स्पष्ट रूप से मांग रखी गई कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच हो, अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, CECT से संबंधित दस्तावेज, नर्सिंग नोट्स एवं अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित कराया जाए तथा जांच में यदि चिकित्सकीय लापरवाही अथवा किसी अन्य की जिम्मेदारी सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
सूचना मिलते ही ACP प्रथम प्रवीण कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार तथा प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद अधिकारियों द्वारा मामले को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि जांच के आधार पर जिम्मेदारी सामने आने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार FIR एवं अन्य आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
करणी सेना का स्पष्ट संदेश है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था को बदनाम करने के लिए नहीं, बल्कि स्वर्गीय श्रीमती पुष्पा देवी के परिवार को न्याय दिलाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने के लिए है। यदि निर्धारित समय में न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं मिलती है, तो करणी सेना, VHP एवं बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही है। माता जी पुष्पा देवी को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
अस्पताल और आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं
फिलहाल रामा अस्पताल या संबंधित चिकित्सकों का आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। CMO कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच की प्रगति या किसी नई कार्रवाई की घोषणा का इंतजार है। नोएडा में निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान कथित लापरवाही और जवाबदेही के मुद्दे पर यह मामला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। पीड़ित परिवार और संगठनों की मांग है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसे मामले दोहराए न जाएं।
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