नोएडा के सेक्टर-137 स्थित पैरामाउंट फ्लोराविले सोसायटी में एक किरायेदार से फ्लैट बेचने के झूठे वादे पर 25 लाख रुपये हड़पने का गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़िता गीता नैय्यर ने अपने मकान मालिक राहुल माथुर (जयपुर निवासी) पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने फ्लैट बेचने का सौदा तय करने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं कराई और उल्टा दूसरे खरीदारों को फ्लैट बेच दिया।
कैसे हुआ पूरा मामला?
गीता नैय्यर ने 1 मार्च 2021 को सोसायटी के टावर-16 में फ्लैट नंबर 904 किराये पर लिया था, जो राहुल माथुर के नाम पर था। करीब डेढ़ साल बाद राहुल ने फ्लैट बेचने की बात कही और गीता ने खरीदने की इच्छा जताई। 1 जनवरी 2023 को राहुल और उनके पिता ज्योति माथुर के साथ 45 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। एग्रीमेंट टू सेल कराने के बाद गीता ने चार बार में राहुल को कुल 25 लाख रुपये एडवांस दिए। इसके बाद जब गीता ने फ्लैट अपने नाम ट्रांसफर करने के लिए कहा तो राहुल टालमटोल करने लगे। जांच में पता चला कि फ्लैट राहुल की पत्नी सानू माथुर के नाम पर था, जिनकी काफी समय पहले मौत हो चुकी थी।
फ्लैट को वारिसों के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में राहुल ने काफी समय लगा दिया, जिसके बाद 9 सितंबर 2026 को 4-5 लोग फ्लैट पर पहुंचे और बताया कि उन्होंने राहुल से फ्लैट खरीद लिया है। गीता ने अपने दिए 25 लाख रुपये वापस मांगे तो आरोप है कि राहुल ने उन्हें झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी।
पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच जारी
पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। सेक्टर-142 थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर गुरुवार को राहुल माथुर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
नोएडा में प्रॉपर्टी ठगी के बढ़ते मामले
यह मामला नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी से जुड़ी ठगी की बढ़ती घटनाओं की कड़ी में एक और उदाहरण है। पहले भी सेक्टर-142 कोतवाली क्षेत्र में बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ फ्लैट का कब्जा न देने, रजिस्ट्री में धोखाधड़ी और ग्राहकों से लाखों रुपये हड़पने के कई मामले दर्ज हो चुके हैं।
खरीदारों और किरायेदारों के लिए सलाह
फ्लैट खरीदने या किराये पर लेने से पहले टाइटल चेक जरूर करें—फ्लैट किसके नाम रजिस्टर्ड है, क्या कोई लोन या विवाद तो नहीं।
एग्रीमेंट टू सेल, बैनामा और रजिस्ट्री की प्रक्रिया किसी अनुभवी वकील या रियल एस्टेट एक्सपर्ट की मदद से पूरी करें।
किसी भी बड़ी रकम का भुगतान करने से पहले सोसायटी, बिल्डर और संबंधित अधिकारियों (नोएडा अथॉरिटी/ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी) से पुष्टि कर लें। अगर धोखाधड़ी का शक हो तो तुरंत पुलिस और उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराएं।

