नोएडा, हलाल सर्टिफिकेशन बोर्ड की अनिवार्यता और इससे जुड़ी कथित आर्थिक-सामाजिक चिंताओं के खिलाफ बुधवार 30 सितंबर 2026 को नोएडा के सेक्टर-18 स्थित बिजलीघर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। आयोजक संगठन ‘हलाल सर्टिफिकेट बोर्ड विरोध मंच’ के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में स्थानीय उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारे लगाए—“हलाल सर्टिफिकेशन बोर्ड बंद करो-बंद करो!” और “जागो उपभोक्ता जागो”।

प्रदर्शन शाम 6 बजे शुरू हुआ। आयोजकों ने लोगों से शाम 5 बजे तक पहुंचने की अपील की थी। मौके पर मौजूद लोगों ने हलाल प्रमाणन व्यवस्था को धर्म के नाम पर व्यापार और समानांतर आर्थिक व्यवस्था बताते हुए इसकी अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की।
प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने निम्नलिखित मांगें रखीं:
हलाल बोर्ड की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
सभी नागरिकों और व्यवसायों के लिए समान नियम लागू किए जाएं।
उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाए।
धर्म के नाम पर चल रहे व्यापार पर रोक लगाई जाए।
क्या कहा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने
उद्योग व्यापार मंत्री मंडल उत्तर प्रदेश की नोएडा इकाई से जुड़े मनोज भाटी ने कहा कि खाड़ी देशों में भारत से निर्यात होने वाले सामान पर हलाल सर्टिफिकेट की स्टैम्प लगाई जाती है। इसके लिए इंजीनियर और पैसा वसूला जाता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए और अब तक एकत्र किए गए पैसे का ऑडिट कराया जाए।
सर्व हिंदी समाज के गणेश महावर, राजपूत करणी सेना उत्तर प्रदेश के प्रभारी ठाकुर विपिन सिंह सूर्यवंशी और नोएडा महानगर अध्यक्ष ठाकुर संग्राम सिंह चौहान समेत कई लोगों ने एक स्वर में कहा कि हलाल सर्टिफिकेट बोर्ड को बंद किया जाना चाहिए। उनका आरोप था कि इस व्यवस्था के कारण पशुओं, खासकर हिंदू धर्म की भावनाओं से जुड़ी गौमाता की हत्याओं में बढ़ावा मिल रहा है।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
हाल के दिनों में हलाल प्रमाणन व्यवस्था को लेकर देशभर में चर्चा और विरोध बढ़ा है। सितंबर 2026 के अंत में हलाल नियंत्रण मंच जैसे संगठनों ने विभिन्न राज्य राजधानियों में प्रदर्शनों की घोषणा की थी। आलोचकों का कहना है कि यह व्यवस्था मांस से आगे बढ़कर कई उत्पादों तक फैल चुकी है और इससे आर्थिक तथा धार्मिक चिंताएं पैदा होती हैं। उत्तर प्रदेश में पहले भी गैर-मांस हलाल प्रमाणित उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाए जा चुके हैं, हालांकि निर्यात संबंधी प्रावधान अलग रहते हैं।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि अनिवार्य हलाल प्रमाणन उपभोक्ताओं की पसंद को प्रभावित करता है और समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। वे चाहते हैं कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति बनाए, ताकि कोई भी समुदाय या व्यवसाय विशेषाधिकार या बाध्यता के दायरे में न रहे। स्थानीय स्तर पर यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। आयोजकों ने कहा कि वे आगे भी जागरूकता अभियान चलाएंगे और सरकार से अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की अपेक्षा रखते हैं।
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