नई दिल्ली। राजधानी के एक पार्क में हुए गैंगरेप ने दिल्ली के पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छह पार्कों की पड़ताल में अंधेरे कोने, कमजोर निगरानी और सुरक्षा इंतज़ामों में खामियां साफ नजर आईं। कई जगह गेट बंद थे, गार्ड तैनात थे और पास में पुलिस वैन भी खड़ी थी, फिर भी सुरक्षा की परतें भेदी जा सकती थीं।
हौज़ खास में गेट फांदकर घुसे तीन युवक
पड़ताल के दौरान 24 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे हौज़ खास स्थित डीडीए पार्क में तीन युवक स्टील के बंद गेट पर चढ़कर अंदर कूद गए। पार्क रात 8 बजे से बंद था। तीनों अंधेरे में दौड़ते हुए आगे बढ़े, लेकिन करीब 100 मीटर बाद दो गार्डों ने उनमें से एक को रोक लिया। गार्ड गुड्डू ने उससे पूछा कि वह पार्क में कैसे घुसा और कौन है। इसके बाद युवक ने अपनी पहचान बताने की कोशिश की। पार्क के तीनों गेट बंद थे और हर गेट पर दो गार्ड थे। कुछ सौ मीटर दूर पुलिस की गाड़ी भी खड़ी थी। इसके बावजूद तीनों का आसानी से भीतर पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी दिखाता है।
कालकाजी में क्या हुआ था
पुलिस के मुताबिक 21 सितंबर 2026 की शाम किशोरी अपने 17 साल के दोस्त के साथ कालकाजी मंदिर गई थी। दर्शन के बाद दोनों करीब 7:30 बजे मंदिर और इस्कॉन मंदिर के पास बने आस्था कुंज पार्क पहुंचे। वहां 25 से 30 साल की उम्र के तीन युवक आए और खुद को पुलिसकर्मी बताकर दोनों को धमकाया। आरोप है कि उन्होंने लड़की को उसके दोस्त से अलग कर दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी आसिफ ने पिस्तौल और चाकू दिखाकर लड़की को धमकाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। जांच में सामने आया कि आरोपी पीछा करने के बाद पार्क में अलग-अलग जगहों पर एक-दूसरे को बुलाकर बारी-बारी से वारदात को अंजाम देते रहे।
तीनों आरोपी गिरफ्तार, एक मुठभेड़ में घायल
पुलिस ने आसिफ, हेमंत और मुकेश को गिरफ्तार किया है। 22 सितंबर तक तीनों पुलिस की गिरफ्त में थे। गिरफ्तारी के दौरान आसिफ ने पुलिस टीम पर गोली चलाई और जवाबी कार्रवाई में घायल हो गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज है, जिनमें पॉक्सो की धारा 6 और 17 शामिल हैं। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर करीब 20 लोगों को संदिग्धों की सूची में रखा और फिर तीन आरोपियों तक पहुंची। ये सभी स्थानीय हैं और कथित तौर पर पार्क में अक्सर आते थे। पीड़िता ने आरोपियों का हुलिया, उनके उपनाम, रंग और कपड़ों के बारे में जो बताया, उससे जांच में काफी मदद मिली। तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गए हैं। पुलिस उनके मोबाइल फोन और तकनीकी सबूतों की जांच कर रही है, ताकि वारदात से पहले और बाद की गतिविधियों का ब्योरा जुटाया जा सके।
CCTV और रोशनी की कमी, गार्ड भी नहीं मिला
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक घटना के समय मौके पर कोई सुरक्षा गार्ड नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि जहां वारदात हुई, वहां रोशनी अपर्याप्त थी और कैमरे नहीं लगे थे। पुलिस अब पार्क में गार्ड की तैनाती और सुरक्षा इंतज़ामों की भी जांच कर रही है।
उठते सवाल
इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि शाम ढलने के बाद पार्कों में निगरानी, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कैसे सुनिश्चित होगी। पड़ताल के अनुसार बंद गेट और गार्ड होना काफी नहीं है, जब भीतर के अंधेरे हिस्सों में कैमरे और नियमित गश्त न हो।
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