नई दिल्ली: देश में धार्मिक स्थलों, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक बुधवार, 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित की जा रही है। बैठक की अध्यक्षता जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी कर रहे हैं। बैठक में देशभर से जमीयत से जुड़े पदाधिकारियों और उलमा के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
मस्जिदों के विध्वंस और धार्मिक स्वतंत्रता पर होगी चर्चा
बैठक के प्रमुख एजेंडे में देश में धार्मिक स्थलों से जुड़े हालिया घटनाक्रम, मस्जिदों के कथित विध्वंस, धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और सभी नागरिकों के समान अधिकारों से जुड़े विषय शामिल हैं। जमीयत की ओर से इन मुद्दों को लेकर पहले भी विभिन्न राज्यों में हुई कार्रवाइयों पर चिंता जताई गई है।
जमीयत ने जून 2026 में राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों, मजारों और अन्य धार्मिक स्थलों के विध्वंस पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता और पूजा के अधिकार से जुड़ा विषय बताया था। संगठन ने प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिनिधिमंडल भेजकर कानूनी विकल्पों पर भी चर्चा की थी।
इसके अलावा सितंबर में सहारनपुर की कलेक्ट्रेट मस्जिद के विध्वंस के बाद भी जमीयत का केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंचा था और मामले की कानूनी एवं सामाजिक स्थिति की समीक्षा की थी। जमीयत ने इस मामले में आगे कानूनी रास्ते अपनाने की बात कही थी।
शरीयत से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप का मुद्दा भी एजेंडे में
बैठक में प्रशासन और न्यायपालिका के कुछ हालिया फैसलों तथा कदमों के संदर्भ में शरीयत से जुड़े मामलों में कथित हस्तक्षेप पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही देश में धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण और इस्लामी मदरसों के सामने मौजूद चुनौतियों की भी समीक्षा की जाएगी।
मदरसों को लेकर जमीयत पहले भी अपना पक्ष रखती रही है। अप्रैल 2026 में संगठन की कार्यकारिणी ने मदरसों की स्वायत्तता और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किया था।
संविधान और समान अधिकारों पर जमीयत का जोर
जमीयत उलमा-ए-हिंद का कहना है कि संविधान की सर्वोच्चता, कानून का शासन, धार्मिक स्वतंत्रता और सभी नागरिकों के समान अधिकार देश की एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण हैं। संगठन की ओर से मौजूदा परिस्थितियों पर गंभीर विचार-विमर्श की जरूरत बताई गई है।
जमीयत ने जून 2026 में भी देश में बढ़ते ध्रुवीकरण और असुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और समान नागरिकता की सुरक्षा पर जोर दिया था।
यूपी चुनाव से पहले मुद्दों पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर धार्मिक स्थलों, धार्मिक स्वतंत्रता, संविधान और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा भी तेज है। हालांकि, किसी मुद्दे को चुनावी रणनीति के तहत उठाए जाने का निष्कर्ष अलग से राजनीतिक दलों और संबंधित संगठनों के बयानों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
दिल्ली में हो रही जमीयत की यह बैठक ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब संगठन पहले से ही धार्मिक स्थलों और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कई मामलों पर अपनी प्रतिक्रिया देता रहा है। बैठक के बाद जमीयत की ओर से आगे की रणनीति और कार्ययोजना को लेकर कोई विस्तृत निर्णय या बयान सामने आता है तो उससे संगठन के अगले कदमों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

