गोद लिए बेटे को संभालने में असमर्थ विधवा मां, दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची

नई दिल्ली। नोएडा की एक विधवा महिला ने अपने 14 वर्षीय गोद लिए बेटे की कस्टडी सरकारी या निजी संस्था को सौंपने की अनुमति के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। महिला ने स्पष्ट किया है कि वह गोद लेने की प्रक्रिया को कानूनी रूप से खत्म नहीं करना चाहती, बल्कि बेटे की देखभाल की जिम्मेदारी किसी संस्था को सौंपना चाहती है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने केंद्र सरकार, केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA), संबंधित बाल कल्याण समिति (CWC) और नाबालिग को नोटिस जारी किया है। याचिका 17 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई थी और अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

आठ साल पहले असम से गोद लिया था बच्चा

कोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार, महिला और उसके तत्कालीन पति ने 2018 में CARA के माध्यम से असम के एक अनाथालय से इस बच्चे को गोद लिया था, जब वह मात्र छह वर्ष का था। महिला ने बताया कि 2021 में उसके पति का निधन हो गया, जिसके बाद से वह अकेले ही बच्चे की परवरिश कर रही है। फिलहाल वह अपनी बुजुर्ग मां और बहन के साथ रहती है।

इस साल हुआ दिव्यांगता का खुलासा

याचिका में महिला ने बताया कि इस साल बच्चे को “हल्की मानसिक दिव्यांगता” (माइल्ड इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटी) से ग्रस्त पाया गया। महिला ने कोर्ट को यह भी बताया कि बच्चे में “अनुचित व्यवहार”, “आक्रामकता” और “चोरी” जैसी प्रवृत्तियां सामने आई हैं। बच्चे को कई स्कूलों से निकाला भी जा चुका है, जिसके कारण महिला का कहना है कि वह अब अकेले उसकी देखभाल कर पाने में असमर्थ है।

गोद लिए बच्चों को वापस भेजने के आंकड़े

गौरतलब है कि 2020 में एक RTI के जवाब में CARA द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच गोद लिए गए लगभग 4-5% बच्चों को वापस दत्तक ग्रहण एजेंसी को लौटा दिया गया था। यह मामला एक बार फिर गोद लेने की प्रक्रिया और उसके बाद परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर बहस छेड़ सकता है। कोर्ट अब CARA और अन्य पक्षों के जवाब के बाद इस संवेदनशील मामले पर आगे की सुनवाई करेगा।

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