हाईकोर्ट ने पुलिस की अवैध हिरासत को बताया गलत, रिहाई करने और मुआवजा देने का आदेश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए एक व्यक्ति की गिरफ्तारी को पूरी तरह अवैध करार दिया है। कोर्ट ने न सिर्फ पीड़ित को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, बल्कि पुलिस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, मेजा क्षेत्र के रहने वाले कमलेश कुमार को पुलिस ने 15 अगस्त को हिरासत में लिया था, लेकिन उसकी गिरफ्तारी आधिकारिक रूप से चार दिन बाद, 19 अगस्त को दिखाई गई। मामला तब सामने आया जब पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने कमलेश पर बांग्लादेशी नागरिक होने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रहने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कमलेश को हिरासत में ले लिया, लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई को प्रक्रिया के विपरीत और पूरी तरह अवैध माना।

कोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि हिरासत में लेने और गिरफ्तारी दिखाने के बीच चार दिन का अंतर कानूनी प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने पुलिस की इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए कमलेश कुमार को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़ित को 50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाए, जिसकी वसूली मामले में लापरवाही बरतने वाले संबंधित पुलिसकर्मियों से की जाएगी।

पहले ही सस्पेंड हो चुके हैं जिम्मेदार अधिकारी

बताया जा रहा है कि मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित थाना प्रभारी (SHO) और विवेचक (IO) को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और मामले की आगे भी जांच जारी रहने की संभावना है।

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