सुपरटेक के अटके प्रोजेक्ट्स के फ्लैट खरीदारों को अभी और करना पड़ेगा इंतजार

नोएडा/ग्रेटर नोएडा। दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक के अधूरे प्रोजेक्ट्स में निर्माण कार्य शुरू होने की राह एक बार फिर लंबी होती दिखाई दे रही है। कंपनी के 16 अटके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने की प्रक्रिया में तय समयसीमा के मुताबिक प्रगति नहीं होने पर राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने कड़ी नाराजगी जताई है। इससे उन हजारों फ्लैट खरीदारों की चिंता बढ़ सकती है, जो लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं।

ताजा सुनवाई में NCLAT ने परियोजनाओं में काम शुरू करने में हो रही देरी और इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) की नियुक्ति लंबित रहने पर संबंधित पक्षों को फटकार लगाई। न्यायाधिकरण ने NCLT और भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर IRP के नाम सुझाएं।

6 मई के आदेश में तय हुई थी समयसीमा

सुपरटेक के प्रोजेक्ट्स को पटरी पर लाने के लिए NCLAT ने 6 मई 2026 के आदेश में कई शर्तें और समयसीमाएं तय की थीं। इसके तहत निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं निर्धारित समय में पूरी की जानी थीं।

रिपोर्टों के मुताबिक 31 जुलाई 2026 तक काम के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होनी थी और इसके बाद करीब एक महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू किया जाना था। लेकिन निर्धारित समयसीमा गुजरने के बावजूद कई जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो सकीं।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अक्टूबर 2026 की समयसीमा निर्धारित की गई थी, लेकिन 10 सितंबर को दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में भी NBCC के सामने कई शर्तों और प्रक्रियात्मक अड़चनों का उल्लेख किया गया।

16 प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी NBCC से जुड़ी

सुपरटेक के मामले में NCLAT पहले ही प्रोजेक्ट-वार समाधान की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के 5 फरवरी 2026 के आदेश में भी सुपरटेक के अधूरे प्रोजेक्ट्स और NCLAT द्वारा बनाए गए गवर्नेंस फ्रेमवर्क का उल्लेख है। 2024 में NCLAT ने चिन्हित परियोजनाओं के लिए NBCC को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट की भूमिका दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक सुपरटेक के 16 अधूरे प्रोजेक्ट्स का मामला लंबे समय से न्यायिक निगरानी में है। कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) मार्च 2022 में शुरू हुआ था।

Eco Village-1 और Eco Village-2 के खरीदारों की भी नजर

सुपरटेक के Eco Village-1 और Eco Village-2 से जुड़े खरीदार भी इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। सुपरटेक की आधिकारिक वेबसाइट पर Eco Village I और Eco Village II से संबंधित अलग-अलग CIRP रिकॉर्ड, क्रेडिटर लिस्ट और होमबायर्स से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं।

ऐसे में जिन खरीदारों को अपने फ्लैट की रजिस्ट्री, कब्जे या निर्माण की अगली प्रक्रिया को लेकर उम्मीद थी, उनके लिए मौजूदा घटनाक्रम का मतलब यह है कि परियोजनाओं से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक कदमों के पूरा होने तक उन्हें और इंतजार करना पड़ सकता है।

हालांकि, रजिस्ट्री की स्थिति प्रत्येक प्रोजेक्ट और संबंधित न्यायिक/प्रशासनिक आदेशों पर निर्भर करती है, इसलिए सभी सुपरटेक परियोजनाओं के लिए एक जैसी समयसीमा मानना सही नहीं होगा।

सुपरटेक खरीदारों की बढ़ी चिंता

सुपरटेक के खरीदार लंबे समय से अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने की मांग कर रहे हैं। ताजा मामले में NCLAT की सख्ती इस बात को रेखांकित करती है कि न्यायिक आदेशों में तय समयसीमा के बावजूद निर्माण शुरू कराने की प्रक्रिया में व्यावहारिक और प्रक्रियात्मक अड़चनें बनी हुई हैं।

हाल की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कई परियोजनाओं में कानूनी मामलों और फंड की कमी के कारण काम आगे बढ़ाने में परेशानी आ रही है।

अब आगे क्या होगा?

NCLAT के निर्देश के बाद अब NCLT और IBBI को एक सप्ताह के भीतर IRP के नाम सुझाने हैं। इसके बाद नियुक्ति और संबंधित जिम्मेदारियों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। नए IRP की भूमिका अटकी परियोजनाओं की निगरानी और निर्धारित व्यवस्था के तहत आगे की प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

फिलहाल सुपरटेक के फ्लैट खरीदारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि निर्माण कार्य वास्तव में कब शुरू होगा और उन्हें अपने घर का कब्जा कब मिलेगा। NCLAT की सख्ती से प्रक्रिया को गति देने की कोशिश जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन तय समयसीमाओं के पहले ही खिसकने के कारण खरीदारों को फिलहाल किसी निश्चित कब्जा तारीख का इंतजार करना होगा।

 

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