नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत हासिल की, जिनमें अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद शामिल हैं। हालांकि उपाध्यक्ष पद पर एनएसयूआई (NSUI) से अलग हुए निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने बड़ी जीत दर्ज कर ABVP की संभावित क्लीन स्वीप को रोक दिया।

अध्यक्ष पद पर कांटे की टक्कर
गिनती के 20वें राउंड के अंत में ABVP के यश दबास ने 24,576 वोट हासिल कर एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा (22,523 वोट) को 2,053 वोटों के अंतर से हराया। यह मुकाबला शुरुआती दौर में बेहद रोमांचक रहा — 11वें राउंड में मीणा 338 वोटों से आगे थे, जबकि 14वें राउंड में यह अंतर घटकर महज एक वोट रह गया था, जब मीणा को 16,107 और दबास को 16,106 वोट मिले थे।
सचिव और संयुक्त सचिव पद पर भी ABVP आगे
सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर एनएसयूआई की नम्रता चौधरी (14,869 वोट) को पछाड़ा। संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह 16,615 वोटों के साथ विजयी रहे, जबकि समाजवादी छात्र सभा (SCS) के विशेष यादव को 15,778 और एनएसयूआई के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले।
उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की बड़ी जीत
निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर 30,615 वोट हासिल कर भारी जीत दर्ज की। ABVP की ईशु मौर्या को 16,910 वोट और एनएसयूआई के वीर चतरथ को महज 4,313 वोट मिले। शौकीन ने 13,705 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। 21 वर्षीय शौकीन शहीद भगत सिंह कॉलेज में छात्र प्रतिनिधि रह चुके हैं और 2023 से छात्र राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने 2023 और 2024 के चुनावों में एनएसयूआई के लिए प्रचार किया था, लेकिन इस बार टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। शौकीन ने नंगे पांव प्रचार किया और छात्र आवास को अपना मुख्य मुद्दा बनाया, खासकर 6 सितंबर को सत्य निकेतन में हुए पीजी बिल्डिंग हादसे के बाद, जिसमें पांच डीयू छात्रों की मौत हो गई थी। उन्होंने बुनियादी ढांचे, फीस बढ़ोतरी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन और पारदर्शिता के मुद्दे भी उठाए। जीत के बाद पहली प्राथमिकता पूछे जाने पर शौकीन ने एक शब्द में जवाब दिया — “हॉस्टल”।
40.46 प्रतिशत हुआ मतदान
इस साल हुए पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में यह चुनाव खासा अहम माने जा रहे थे। चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान हुआ। छात्र कल्याण, कैंपस सुविधाओं, हॉस्टल आवास और सुरक्षा जैसे मुद्दे चुनाव प्रचार के दौरान प्रमुखता से उठे, खासकर सत्य निकेतन पीजी बिल्डिंग हादसे के बाद। मतदान के लिए 1,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) तैनात की गई थीं, जिनमें से 960 का इस्तेमाल मतदान के दिन हुआ। मतदान के बाद पुलिस ने EVM को मल्टीपर्पज हॉल पहुंचाया, जहां गिनती की गई। गिनती के दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात रहे, साथ ही फुट पेट्रोलिंग, मोटरसाइकिल टीमें और पीसीआर वैन भी कैंपस में मुस्तैद रहीं। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों के मद्देनजर चुनाव अधिकारियों ने विजयी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों से कैंपस के अंदर या बाहर विजय जुलूस न निकालने की अपील की।
पूर्व अध्यक्ष अरुण हुड्डा का बयान
गिनती के दौरान पूर्व DUSU अध्यक्ष और एनएसयूआई नेता अरुण हुड्डा ने दावा किया कि भाजपा और ABVP चुनाव हार रहे हैं, और यह नतीजा उनके कार्यों का परिणाम है।
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