ग्रेटर नोएडा/जेवर: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी YEIDA क्षेत्र में जमीन और प्रॉपर्टी बाजार को रफ्तार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अभी पूरी तरह बदलती नजर नहीं आ रही है। क्षेत्र में एंड यूजर की कमी, खाली पड़े आवासीय सेक्टर, निवेश के लिए खरीदे गए भूखंड और किसानों से जुड़े भूमि विवादों के कारण प्रॉपर्टी बाजार की गतिविधियों पर असर पड़ने की चर्चा है।
हालांकि, यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि YEIDA की ओर से जारी आधिकारिक आवंटन दर और खुले बाजार की रीसेल कीमत एक जैसी नहीं होतीं। YEIDA की वर्ष 2026 की आवासीय योजना में सेक्टर-15C, 18 और 24A के 973 भूखंडों के लिए ₹36,260 प्रति वर्ग मीटर की दर निर्धारित की गई थी। इस योजना के लिए बड़ी संख्या में आवेदन भी आए थे।
एंड यूजर की कमी बनी बड़ी चुनौती
YEIDA क्षेत्र में लंबे समय से प्रॉपर्टी को लेकर निवेश की उम्मीदें एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, औद्योगिक परियोजनाओं और भविष्य के शहरी विस्तार से जुड़ी रही हैं। लेकिन किसी भी नए शहर को वास्तविक रूप से बसाने के लिए सिर्फ जमीन की खरीद-फरोख्त पर्याप्त नहीं होती। वहां लोगों का रहना, दुकानें खुलना, उद्योगों में उत्पादन शुरू होना और रोजगार पैदा होना भी जरूरी है। इसी वजह से आवासीय और छोटे औद्योगिक भूखंडों में यदि बड़ी हिस्सेदारी ऐसे खरीदारों की है जो उन्हें भविष्य में बेचने के उद्देश्य से रखते हैं, तो इससे वास्तविक आबादी बढ़ने की गति प्रभावित हो सकती है।
बड़े उद्योग आए, लेकिन निर्माण के सामने जमीन से जुड़े सवाल
YEIDA क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार भूखंडों का आवंटन किया जा रहा है। प्राधिकरण की वेबसाइट पर औद्योगिक भूखंडों से जुड़ी योजनाओं और ऐसे मामलों की सूचनाएं भी उपलब्ध हैं जिनमें लीज डीड होने के बावजूद नक्शा आवेदन या निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
दूसरी तरफ, जमीन अधिग्रहण और किसानों से जुड़े मुद्दे अभी भी क्षेत्र के विकास की महत्वपूर्ण चुनौती बने हुए हैं। हाल में उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्राधिकरणों के सामने किसानों ने मुआवजे और विकसित आबादी की जमीन से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया है। YEIDA क्षेत्र में भी किसानों और प्राधिकरण के बीच विकसित भूखंड तथा अन्य अधिकारों से जुड़े विवादों का समाधान तेजी से होना औद्योगिक परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी औद्योगिक परियोजना के निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर विरोध या जमीन से संबंधित विवाद सामने आते हैं, तो परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
एयरपोर्ट शुरू होने के बाद भी खालीपन क्यों?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से YEIDA क्षेत्र को लेकर वर्षों से बनी उम्मीदों को नया आधार मिला है। लेकिन एयरपोर्ट अपने आप में किसी पूरे शहर को रातोंरात आबादी वाला शहर नहीं बना देता।
शहर के विकास के लिए आवास, सड़क, सार्वजनिक परिवहन, बाजार, स्कूल, अस्पताल, रोजगार और नियमित औद्योगिक गतिविधियों का एक साथ विकसित होना जरूरी है। यही वजह है कि एयरपोर्ट के आसपास के कई इलाकों में अभी भी निर्माण और शहरीकरण की प्रक्रिया जारी है। प्रॉपर्टी बाजार में भी अब निवेशकों का ध्यान केवल भविष्य की घोषणा पर नहीं बल्कि इस बात पर है कि जमीन पर वास्तविक विकास कितनी तेजी से दिखाई देता है।
निवेशकों के सामने बदल रहा है सवाल
YEIDA क्षेत्र में पहले सवाल यह था कि एयरपोर्ट कब बनेगा? अब एयरपोर्ट शुरू होने के बाद सवाल बदलकर यह हो गया है कि एयरपोर्ट के आसपास वास्तविक शहर कब दिखाई देगा और यहां नियमित आर्थिक गतिविधियां कितनी तेजी से बढ़ेंगी?
यही बदलाव प्रॉपर्टी बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। यदि किसी क्षेत्र में एंड यूजर की संख्या कम रहती है और अधिकांश खरीदार केवल निवेश अथवा भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद से संपत्ति रखते हैं, तो रीसेल मार्केट में उतार-चढ़ाव अधिक दिखाई दे सकता है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों से पूरे YEIDA क्षेत्र में प्रॉपर्टी कीमतों के लगातार गिरने की एक समान तस्वीर स्थापित नहीं होती। अलग-अलग सेक्टर, प्लॉट की लोकेशन, विकास की स्थिति और एयरपोर्ट से दूरी के आधार पर बाजार भाव अलग हो सकते हैं। इसलिए रीसेल मार्केट में कमजोरी की स्थानीय रिपोर्टों को YEIDA की आधिकारिक जमीन दरों में गिरावट के रूप में देखना सही नहीं होगा।
YEIDA के सामने असली चुनौती क्या?
अब YEIDA के सामने चुनौती सिर्फ नई जमीन विकसित करने की नहीं, बल्कि आबंटित भूखंडों को वास्तविक आर्थिक गतिविधियों में बदलने की है। औद्योगिक भूखंडों पर समय से निर्माण, किसानों से जुड़े विवादों का समाधान, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और आवासीय क्षेत्रों में वास्तविक आबादी बढ़ना इस क्षेत्र के भविष्य के लिए अहम होगा। अगर बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट समय पर उत्पादन शुरू करते हैं और उनके साथ रोजगार तथा आवास की मांग बढ़ती है, तो एंड यूजर बेस मजबूत हो सकता है। इसके उलट यदि जमीन का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक खाली रहता है और निर्माण प्रक्रिया धीमी रहती है, तो प्रॉपर्टी बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी पर दबाव बना रह सकता है।
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