निठारी कांड के मुख्य आरोपी ने हरिद्वार में चाय की दुकान में फांसी लगाई

हरिद्वार। वर्ष 2006 के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली (जिन्हें सुरिंदर कोली भी कहा जाता है) ने शुक्रवार को उत्तराखंड के हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, उनका शव उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने एक चाय की दुकान में रस्सी से लटकता हुआ मिला।

कोली पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार में चाय बेचने का काम कर रहे थे। सप्त ऋषि पुलिस चौकी को सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा के अनुसार, दुकान से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस ने सभी संभावित कोणों से जांच शुरू कर दी है और उनके अल्मोड़ा स्थित परिजनों को सूचना दे दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, परिवारिक क्लेश को संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि आधिकारिक जांच जारी है। यह घटना नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें पूरी तरह बरी किए जाने और जेल से रिहा किए जाने के लगभग एक साल के भीतर हुई है।

निठारी कांड की पृष्ठभूमि

दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर (या पंधेर) के बंगले डी-5 के पीछे नाले और खुले क्षेत्र से कई बच्चों और युवतियों के कंकाल, खोपड़ियां और हड्डियां बरामद हुई थीं। कुल मिलाकर लगभग 19 पीड़ितों (ज्यादातर गरीब परिवारों के बच्चे और युवतियां) के अवशेष मिले। पंढेर के घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को 29 दिसंबर 2006 को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर अपहरण, बलात्कार, हत्या और सबूत मिटाने के आरोप लगे। मीडिया और जांच एजेंसियों ने कोली को “निठारी का राक्षस” और नरभक्षी करार दिया था। कोली पर कुल 13 मामलों में मुकदमा चला। निचली अदालतों ने उन्हें कई मामलों में मौत की सजा सुनाई। एक मामले (रिम्पा हलदार की हत्या) में उनकी मौत की सजा सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में बरकरार रखी थी। 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दया याचिका में देरी के आधार पर मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। पंढेर को ज्यादातर मामलों में बरी कर दिया गया था।

कानूनी प्रक्रिया और बरी होना

अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में कोली और संबंधित मामलों में पंढेर को सबूतों की कमी, स्वीकारोक्ति की अविश्वसनीयता और जांच में गंभीर खामियों का हवाला देते हुए बरी कर दिया। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और उत्तर प्रदेश सरकार की अपीलों को खारिज करते हुए इन बरी करने के फैसलों को सही ठहराया। इसके बाद कोली ने अंतिम बचे हुए मामले (रिम्पा हलदार) में क्यूरेटिव पिटीशन दायर की। 11 नवंबर 2025 को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने इस याचिका को मंजूर करते हुए उन्हें बरी कर दिया और तुरंत रिहाई का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 12 अन्य मामलों में एक ही स्वीकारोक्ति और बरामदगी को अविश्वसनीय और अस्वीकार्य माना गया था। उसी सबूत के आधार पर एक मामले में सजा कायम रखना “न्याय की स्पष्ट विफलता” (manifest miscarriage of justice) के बराबर होगा। अदालत ने कहा कि संदेह, चाहे कितना भी गंभीर हो, उचित संदेह से परे सबूत का स्थान नहीं ले सकता। जांच में प्रक्रियात्मक खामियां, चेन ऑफ कस्टडी की कमी और फॉरेंसिक सबूतों की कमजोरी को रेखांकित किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि वास्तविक अपराधी की पहचान कानूनी मानकों के अनुसार स्थापित नहीं हो सकी। कोली 13 नवंबर 2025 को ग्रेटर नोएडा की लक्सर जेल से रिहा हुए थे। उन्होंने लगभग 19 साल जेल में बिताए थे और दो बार फांसी से बाल-बाल बचे थे।

वर्तमान स्थिति

कोली अल्मोड़ा जिले के मंगरुखाल गांव के रहने वाले थे। रिहाई के बाद वे हरिद्वार में रह रहे थे। पुलिस जांच जारी है। निठारी कांड भारत के सबसे चर्चित और विवादास्पद आपराधिक मामलों में से एक रहा, जिसमें जांच की खामियों और न्याय व्यवस्था की चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई।
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