नोएडा। सेक्टर-65 स्थित एक फिनटेक कंपनी के सर्वर को हैक कर साइबर ठगों ने करीब 2.42 करोड़ रुपये की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। आरोपियों ने कंपनी के API पोर्टल का इस्तेमाल करते हुए करीब आठ घंटे के भीतर 497 ट्रांजेक्शन किए। ठगी की रकम देश के 28 अलग-अलग बैंकों में खुले 58 खातों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले में कंपनी के डायरेक्टर राजकुमार की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मंगलवार को केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब सर्वर हैक करने वाले आरोपियों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और रकम के ट्रांजेक्शन की कड़ियों को खंगाल रही है।
13 सितंबर को हैक हुआ कंपनी का सर्वर
पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक, 13 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे से शाम 8 बजे के बीच कंपनी के सर्वर से छेड़छाड़ की गई। इसी दौरान साइबर अपराधियों ने कंपनी के API पोर्टल के जरिए रकम ट्रांसफर करनी शुरू कर दी। लगभग आठ घंटे तक लगातार किए गए ट्रांजेक्शन के बाद कंपनी को करोड़ों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी का पता चला।
28 बैंकों के 58 खातों में भेजी गई रकम
जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों ने रकम को एक ही खाते में रखने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया। करीब 2.42 करोड़ रुपये को 28 अलग-अलग बैंकों के 58 खातों में भेजा गया। इतनी बड़ी संख्या में खातों में रकम ट्रांसफर किए जाने से पुलिस को आशंका है कि ठगी के पीछे संगठित साइबर अपराधियों का नेटवर्क हो सकता है।
क्या है API पोर्टल और कैसे हुई ठगी?
फिनटेक कंपनियां अलग-अलग डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं को संचालित करने के लिए API (Application Programming Interface) का इस्तेमाल करती हैं। इसी API पोर्टल तक साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर अनधिकृत पहुंच हासिल की और उसके जरिए लगातार ट्रांजेक्शन किए।
मोबाइल रिचार्ज से लेकर मनी ट्रांसफर तक सेवाएं देती है कंपनी
सेक्टर-65 स्थित रिनोवा पेटेक प्राइवेट लिमिटेड मोबाइल रिचार्ज, बिल पेमेंट, आधार आधारित कैश निकासी और डोमेस्टिक मनी ट्रांसफर जैसी फिनटेक सेवाएं उपलब्ध कराती है। ऐसे में कंपनी के सर्वर और API पोर्टल से करोड़ों रुपये की रकम ट्रांसफर होने से डिजिटल वित्तीय सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
साइबर थाना पुलिस जांच में जुटी
केस दर्ज होने के बाद साइबर थाना पुलिस ट्रांजेक्शन की पूरी जानकारी जुटा रही है। पुलिस की जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सर्वर और API पोर्टल तक आरोपियों ने किस तरीके से पहुंच बनाई, किन डिवाइस या डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया और 58 बैंक खातों तक रकम पहुंचाने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस ट्रांजेक्शन की कड़ियों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
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