गाजियाबाद। विजयनगर थाना क्षेत्र स्थित गौर सिद्धार्थम सोसाइटी के आई टावर में मंगलवार (15 सितंबर) शाम करीब 6:45 बजे एक दुखद घटना घटी। 16 वर्षीय शनाया बिष्ट, जो इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल में कक्षा 10 की छात्रा थीं, अपने फ्लैट (नंबर 1576) की 15वीं मंजिल से नीचे गिर गईं। मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। विजयनगर पुलिस को डायल-112 के माध्यम से करीब 7 बजे सूचना मिली। SHO धर्मपाल सिंह के नेतृत्व में पुलिस मौके पर पहुंची। परिवार और सोसाइटी के गार्ड भी तुरंत घटनास्थल पर मौजूद रहे। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। बुधवार शाम पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
परिवार और पृष्ठभूमि
मृतका के पिता देवेंद्र सिंह वित्त सलाहकार (फाइनेंस एडवाइजर) हैं। परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं शनाया और छोटी बहन रिद्धि। परिवार में कोई बेटा नहीं है। पिता देवेंद्र सिंह ने भावुक होते हुए कहा, “यदि पढ़ाई का प्रेशर था तो बताना चाहिए था। अपनी मम्मी से भी कभी कुछ नहीं कहा। बेटी ही हमारे लिए बेटे के समान थी। लेकिन बेटी की मौत के बाद परिवार पूरी तरह से टूट गया।”
सुसाइड नोट
पुलिस को मौके से दो पेज का सुसाइड नोट मिला। इसमें शनाया ने लिखा—
“मैं पढ़ाई का प्रेशर नहीं झेल सकती। पढ़ाई के दबाव की वजह से सुसाइड कर रही हूं। किसी को दोष नहीं देती। इसकी जिम्मेदार खुद को मानती हूं। मम्मी-पापा… I Love You.
आप सब लोग जो भी मेरी चिंता कर रहे हैं, अब न करें। अपनी जिंदगी खुशी-खुशी जियो। जितने भी मेरे दोस्त हैं, कृपया मेरी वजह से आप लोग अपनी जिंदगी खराब मत करो। मम्मी-पापा आप दोनों की एक और बेटी है रिद्धि, कृपया मेरी वजह से उसका भविष्य खराब मत करना। मम्मी-पापा अपना, दादी का और रिद्धि का ध्यान रखना। मौसी-मौसा जी, मामा-मामी, चाचा-चाची और नानी आप सब भी खुश रहो। रिद्धि और मिष्ठी सॉरी यार, तुम लोग भी मेरे बारे में ज्यादा मत सोचो। सफल बनो।”
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट
SHO धर्मपाल सिंह ने बताया कि छात्रा जहां से गिरीं, उसकी ऊंचाई करीब 150 फीट थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पैर, हाथ, सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में लगभग 20 हड्डियां टूटी हुईं पाई गईं। सिर के पिछले हिस्से में गंभीर चोटें थीं।
कानूनी स्थिति
भारतीय कानून के अनुसार, आत्महत्या करने का प्रयास अब अपराध नहीं है (आईपीसी की धारा 309 को निरस्त कर दिया गया है)। हालांकि, किसी को आत्महत्या के लिए उकसाने (अभेटमेंट) का मामला धारा 306 आईपीसी के तहत दर्ज किया जा सकता है। इस मामले में सुसाइड नोट में साफ लिखा है कि छात्रा किसी को दोष नहीं देतीं और खुद को जिम्मेदार मानती हैं। परिजनों ने भी पुलिस से आगे की कोई कार्रवाई न करने का अनुरोध किया है। पुलिस ने मामले को आत्महत्या के रूप में दर्ज कर जांच पूरी कर ली है। कोई संदेहपूर्ण परिस्थिति सामने नहीं आई। यह घटना फिर से छात्रों पर पढ़ाई के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरों को समय रहते मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
मदद के लिए
यदि आप या आपके आसपास कोई मानसिक तनाव या आत्महत्या के विचार से जूझ रहा है, तो तुरंत मदद लें।
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन: 14416
- किशोर हेल्पलाइन: 1098
- आपातकालीन: 112
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