झीरम घाटी माओवादी हमला, NIA कोर्ट ने 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई

जगदलपुर (बस्तर)। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में 25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में बुधवार (16 सितंबर 2026) को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने आपराधिक साजिश (आईपीसी धारा 120-बी) और हत्या (धारा 302) के आरोपों में उन्हें मृत्युदंड दिया। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने इन 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था।

यह हमला छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेतृत्व को लगभग खत्म कर देने वाला था। प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सशस्त्र कैडरों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इसमें कम से कम 27 लोग मारे गए (कुछ रिपोर्टों में 29) और 38 घायल हुए। मारे गए लोगों में 10 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे।

दोषियों के नाम

अदालत ने निम्नलिखित 10 लोगों को दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई:

  1. प्रमिला मोडियम
  2. चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
  3. सुमिता उर्फ पुनेम मोडियम (कुछ रिपोर्टों में सुमित्रा)
  4. मुक्का मंडवी
  5. कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
  6. आयता मरकाम
  7. मड़कामी देवा
  8. जोगा मड़कामी
  9. बंजामी सन्ना उर्फ चमरू
  10. महादेव नाग

मामले में मूल रूप से 11 आरोपी गिरफ्तार हुए थे, जिनमें से एक की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई। चार्जशीट में नामित अन्य 28 आरोपी फरार बताए गए हैं। इनमें प्रमुख माओवादी नेता थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवूजी (फरवरी में तेलंगाना में सरेंडर), बार्से देवा (जनवरी में सरेंडर, PLGA बटालियन 1 के कमांडर) और गणेश उइके (दिसंबर 2025 में ओडिशा मुठभेड़ में मारे गए) शामिल हैं।

हमले का ब्योरा

25 मई 2013 को दोपहर करीब 4:15 बजे बस्तर और सुकमा जिलों की सीमा के पास झीरम घाटी (दरभा थाना क्षेत्र, NH-221) में माओवादियों ने काफिले पर हमला किया। जांच के अनुसार, यह हमला मुख्य रूप से महेंद्र कर्मा को निशाना बनाकर किया गया था। कर्मा सालवा जुडूम के प्रमुख संस्थापक और माओवादियों के खिलाफ आदिवासी आवाज थे। माओवादियों ने लाल बोलेरो वाहन के नीचे लैंडमाइन विस्फोट कर सड़क अवरुद्ध की। आसपास की पहाड़ियों से दो घंटे तक अंधाधुंध फायरिंग और ग्रेनेड हमले किए गए। काफिले के 20 वाहन फंस गए। माओवादियों ने हथियार भी लूटे—9 मिमी पिस्तौल, दो एके-47 राइफलें, मैगजीन, गोलियां, हैंड ग्रेनेड और संचार उपकरण।

मारे गए प्रमुख लोगों में शामिल थे:

महेंद्र कर्मा (तत्कालीन विपक्ष के नेता)
नंद कुमार पटेल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष) और उनके बेटे दिनेश
उदय मुदलियार (वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक)
विद्या चरण शुक्ल (पूर्व केंद्रीय मंत्री, घायल होने के बाद मृत्यु)

NIA के अनुसार, हमला CPI (माओवादी) की टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन (TCOC) का हिस्सा था। 2013 की शुरुआत में मीटिंग्स में “क्लास एनिमी” को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी।

कानूनी पहलू

NIA ने हमले के दो दिन बाद जांच अपने हाथ में ली। 25 सितंबर 2014 को नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और 28 सितंबर 2015 को 30 और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल की गई। आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं—147, 148, 149, 121, 121-ए, 122, 341, 302, 307, 396, 397, 427, 120-बी—के साथ आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराओं 16, 18, 20, 38, 39, 40 के तहत दोषी पाया गया। मौत की सजा मुख्य रूप से आपराधिक साजिश (120-बी) और हत्या (302) के लिए दी गई। ट्रायल 10 साल से ज्यादा चला। कुल 294 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष ने 101 गवाह पेश किए। अंतिम दलीलें इस महीने पूरी होने के बाद 5 सितंबर को दोषसिद्धि और 16 सितंबर को सजा का फैसला सुनाया गया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषियों को 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील का अधिकार है। बचाव पक्ष ने अपील करने का संकेत दिया है। यह फैसला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े माओवादी हमलों में से एक में 13 साल बाद आया है। NIA की जांच और लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद निचले स्तर के कैडरों को सजा मिली है, जबकि कई वरिष्ठ माओवादी नेता अभी भी फरार हैं या सरेंडर/मुठभेड़ में शामिल हो चुके हैं।

यह भी पढ़ें: लखनऊ हिट एंड रन, शहनावाज ने अनामिका को कार से घसीटा, गिरफ्तार, वायरल वीडियो

यहां से शेयर करें