नई दिल्ली, भारत सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश की थोक मूल्य आधारित महंगाई दर (WPI) अगस्त महीने में सालाना आधार पर बढ़कर 9.92% पर पहुंच गई। तेल और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है। यह आंकड़ा जुलाई महीने की 9.78% की दर से अधिक है और रॉयटर्स के एक सर्वेक्षण में अर्थशास्त्रियों के औसत अनुमान 9.89% से भी ऊपर रहा।
खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल
अगस्त में थोक खाद्य महंगाई दर सालाना आधार पर 7.05% रही, जबकि जुलाई में यह 6.65% थी। यानी खाद्य पदार्थों की कीमतों में महीने-दर-महीने और तेजी देखी गई।
विनिर्मित उत्पादों और ईंधन की कीमतें भी बढ़ीं
विनिर्मित उत्पादों (मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स) की कीमतें अगस्त में सालाना आधार पर 8.37% बढ़ीं, जबकि जुलाई में यह वृद्धि 8.29% थी। वहीं ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई — अगस्त में इनकी कीमतें 22.93% बढ़ीं, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 20.05% था।पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में सबसे तीव्र उछाल देखने को मिला। अगस्त में इनमें सालाना आधार पर 34.41% की वृद्धि हुई, जो जुलाई की 26.99% की बढ़ोतरी से काफी अधिक है।
उत्पादक मूल्यों में भी इजाफा
रॉयटर्स के आकलन के मुताबिक, अगस्त में उत्पादक कीमतें (प्रोड्यूसर प्राइसेज) सालाना आधार पर 9.8% बढ़ीं, जबकि पिछले महीने यह वृद्धि 9.57% थी। समग्र रूप से देखें तो अगस्त के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में थोक स्तर पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है, खासकर ऊर्जा और खाद्य क्षेत्र में, जिसका असर आने वाले महीनों में खुदरा कीमतों पर भी देखा जा सकता है।
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