Nepal-Tibet border: नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण भूस्खलन और बाढ़ का कहर, 9 की मौत; सैकड़ों पर्यटक लापता

Nepal-Tibet border: काठमांडू/बीजिंग, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा पर बुधवार को हिमालयी क्षेत्र में मलबे और कीचड़ की एक विशाल दीवार नदी में समा गई, जिससे नेपाली हिस्से में विनाशकारी बाढ़ आ गई। इस आपदा में अब तक कम से कम नौ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं। कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 17 से लेकर 31 तक बताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी स्पष्ट नहीं हैं और स्थिति लगातार बदल रही है।

रासुवा जिले में सबसे ज़्यादा तबाही

आपदा का सबसे बुरा असर नेपाल के रासुवा जिले में देखा गया, खासतौर पर तिमुरे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्रों में, जहां नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से घर, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं बह गईं। नेपाली सेना के प्रवक्ता राजा राम बस्नेत के अनुसार, बाढ़ग्रस्त इलाकों में पानी इतना ऊंचा है कि बचाव हेलीकॉप्टर अभी वहां नहीं उतर पा रहे हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बताया कि 384 यात्री लापता हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशियों में करीब 105 भारतीय नागरिक, साथ ही ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और मलेशिया के पर्यटक भी शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा 41 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं।

तिब्बत के ग्यीरोंग में भी “बड़ी क्षति” की आशंका

सीमा पार चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित ग्यीरोंग काउंटी में भी भूस्खलन ने एक प्रमुख सीमा व्यापार चौकी को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह चौकी चीन-नेपाल व्यापार और बेल्ट एंड रोड परियोजना का अहम हिस्सा मानी जाती है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार अधिकारियों को यहां “बड़ी क्षति” की आशंका है और कई लोग लापता हैं। संचार और बिजली व्यवस्था भी बाधित हो गई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश के लिए व्यापक बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, और प्रभावित क्षेत्र में तंबू, हीटर तथा कंबल जैसी राहत सामग्री भेजी जा रही है।

भूकंप या हिमखंड धंसना बना वजह?

आपदा का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। जर्मनी के जीएफज़ेड रिसर्च सेंटर के अनुसार, घटना से करीब सात मिनट पहले क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। वहीं काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के विशेषज्ञ छ्यांगगोंग झांग के मुताबिक, नेपाली हिस्से की लेंदे खोला नदी में हिमखंड-चट्टान का स्खलन इस आपदा की वजह बना, हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। झांग ने चेताया कि सीमा नदी में ऊपरी हिस्से में अब भी मलबे का अवरोध बना हुआ है, जिससे दूसरी बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र पहले भी आपदाओं का सामना कर चुका है जुलाई 2025 में भी यहां बाढ़ ने पुल बहा दिया था, जिससे व्यापार करीब छह महीने तक बंद रहा था।

राहत और बचाव कार्य जारी

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। नेपाली सेना, सशस्त्र प्रहरी बल और नेपाल पुलिस को रासुवा में बचाव और राहत कार्यों में लगाया गया है। रासुवा के अलावा नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों में भी नदी किनारे के निवासियों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की गई है| यह घटना अभी भी विकसित हो रही है और मृतकों व लापता लोगों की संख्या में बदलाव संभव है। ताज़ा और आधिकारिक जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन के बयानों पर नज़र रखी जानी चाहिए।

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