RG Kar rape case: कोलकाता/बैरकपुर, पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 2024 में हुई जूनियर डॉक्टर की बलात्कार और हत्या के मामले में गुरुवार (13 अगस्त 2026) को बड़ा एक्शन देखने को मिला। पूर्व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक निर्मल घोष को ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर पीड़िता के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराने और सबूत मिटाने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, घोष को पुरी के पास एक होटल से सुबह करीब 9 बजे गिरफ्तार किया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद वे ओडिशा चले गए थे और नया सिम कार्ड इस्तेमाल कर रहे थे। टावर लोकेशन के आधार पर पुलिस ने उन्हें ट्रैक किया। घोष पर सबूत नष्ट करने, आपराधिक साजिश और जबरदस्ती किसी काम के लिए मजबूर करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। उन्हें पहले ओडिशा की अदालत में पेश किया जाएगा, फिर ट्रांजिट रिमांड पर पश्चिम बंगाल लाया जाएगा। शुक्रवार को बैरकपुर अदालत में पेशी होने की संभावना है।
यह नया मामला मुख्य बलात्कार-हत्या की सीबीआई जांच से अलग है। 10-11 अगस्त 2026 को खरदह पुलिस स्टेशन में पीड़िता के पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें निर्मल घोष के अलावा पूर्व पानीहाटी नगरपालिका चेयरमैन/काउंसलर सोमनाथ डे और पीड़िता के पड़ोसी संजीव (संजीब) मुखर्जी का नाम शामिल है। आरोप है कि तीनों ने शव को परिवार की सहमति के बिना जल्दबाजी में दाह संस्कार करवाया ताकि दूसरा पोस्टमार्टम न हो सके और सबूत नष्ट हो जाएं।
पृष्ठभूमि और आरोप
31 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर का शव 9 अगस्त 2024 को आरजी कर अस्पताल के सेमिनार रूम में मिला था। जांच में साबित हुआ कि उससे रात को बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। शव को पानीहाटी के श्मशान (नटगढ़/कादमतला क्षेत्र) ले जाकर कतार में दो अन्य शवों को पीछे छोड़ते हुए जल्दबाजी में दाह संस्कार कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि उन्हें शव देखने या धार्मिक रीति-रिवाज निभाने तक का मौका नहीं दिया गया। अंतिम संस्कार के दस्तावेजों पर परिवार के सदस्यों के बजाय पड़ोसियों या टीएमसी कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर थे। फीस भी माफ कर दी गई थी। पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ (अब पानीहाटी से भाजपा विधायक) और पिता लंबे समय से इन आरोपों को उठा रहे थे। मई 2026 में उन्होंने सीलदह अदालत में तीनों की गिरफ्तारी और कस्टोडियल पूछताछ की मांग की थी। सीबीआई ने जून 2026 में निर्मल घोष से पूछताछ भी की थी। परिवार का दावा है कि घोष और उनके साथी शव को “हाईजैक” करके घर ले आए और दबाव बनाकर अंतिम संस्कार कराया। भारी पुलिस बल भी तैनात था।
सीएम के निर्देश के बाद कार्रवाई
9 अगस्त 2026 को पीड़िता की दूसरी पुण्यतिथि पर पानीहाटी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने बैरकपुर पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया था कि अंतिम संस्कार से जुड़े आरोपों की अलग से जांच की जाए। उन्होंने कहा था कि निर्मल घोष, सोमनाथ डे और संजीव मुखर्जी की भूमिका की जांच जरूरी है। फीस माफ होना और परिवार के हस्ताक्षर न होना संदिग्ध है। इसके बाद पिता ने शिकायत दर्ज कराई और एफआईआर हुई।
बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नया मामला कोलकाता पुलिस क्षेत्राधिकार वाले आरजी कर बलात्कार-हत्या केस (जिसकी सीबीआई जांच चल रही है) से अलग है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें आपराधिक साजिश, सबूत से छेड़छाड़, गलत तरीके से रोकना और सामान्य आशय शामिल हैं। आरजी कर मामला 2024 में पूरे देश में बड़े आंदोलन का कारण बना था। सीबीआई जांच में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन परिवार सबूतों की छेड़छाड़ और कवर-अप के आरोप लगाता रहा है। निर्मल घोष की गिरफ्तारी से परिवार को न्याय की उम्मीद बढ़ी है। पुलिस आगे अन्य आरोपियों से भी पूछताछ करेगी।

