Jharkhand Student Protest: अनशन जारी, सरकार का दावा- 95% मांगें मानी, BJP पर राजनीति का आरोप

Jharkhand Student Protest: रांची, झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन बुधवार को 19वें दिन भी जारी रहा। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और अनशन पर बैठे छात्र JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने तथा मामले की CBI जांच की अपनी प्रमुख मांगों पर अड़े हुए हैं। सरकार ने दावा किया है कि 90-95 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं, जबकि भाजपा पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया जा रहा है।

सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ था। इसके विरोध में मंगलवार को भाजपा ने राज्यव्यापी बंद रखा और ABVP ने भी प्रदर्शन किया। मंगलवार शाम छात्रों ने रांची की सड़कों पर मौन जुलूस निकाला। कई छात्रों ने पुलिसकर्मियों को गुलाब भेंट किए और कहा, “आप मुझे लाठी मारिए, मैं आपको गुलाब दूंगा।” अस्पताल में भर्ती छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने लाठीचार्ज की जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे बातचीत की अपील की। उन्होंने कहा, “हम छात्र हैं, राजनीति नहीं जानते। हमारी मांगें जायज हैं। एक बार हमसे मिलकर बात कीजिए।”

सरकार की ओर से बुधवार को चार मंत्रियों ने प्रेसवार्ता की। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा, “हम युवाओं के हित में काम कर रहे हैं। 90 से 95 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं। बाकी के लिए वैकल्पिक समाधान निकाला जाएगा। भाजपा राहुल गांधी को निशाना बना रही है, जो चांद पर थूकने जैसा है। आप दिल्ली में झारखंड की छवि खराब कर रहे हैं।” ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आरोप लगाया कि परीक्षा माफिया भाजपा चला रही है और 2015 से देशभर में 152 पेपर लीक हुए हैं। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि भाजपा छात्रों के हितों से नहीं, बल्कि कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाना बनाने के लिए आंदोलन में शामिल हुई है। सरकार का दावा है कि 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने सहित कई मांगें स्वीकार कर ली गई हैं और जांच प्रक्रिया चल रही है। पूर्व JPSC चेयरपर्सन समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

छात्र पक्ष का कहना है कि राजनीतिक हस्तक्षेप के बावजूद आंदोलन सिर्फ छात्र आंदोलन है। उन्होंने स्वीकार किया कि विधानसभा घेराव के दौरान कुछ असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे, लेकिन संगठन ने शांति बनाए रखने की अपील की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा आंदोलन का फायदा जरूर उठाना चाहती है, लेकिन उसे पूरी तरह हाईजैक नहीं कर पाई है। आंदोलन की शुरुआत 25 जुलाई से हुई थी। छात्र पारदर्शिता, परीक्षा रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। कई छात्र अनशन पर हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने अनशन तोड़ने की अपील की, लेकिन छात्र मांगें पूरी होने तक अड़े हुए हैं।

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