Greater Noida GST Fraud: स्पेशल 26 की तर्ज पर 29 लाख रुपये की रंगदारी वसूलने वाले 5 अभियुक्त गिरफ्तार

Greater Noida GST Fraud:  बिसरख (ग्रेटर नोएडा), अक्षय कुमार की सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म ‘स्पेशल 26’ का वह सीन तो आपको याद ही होगा, जिसमें नकली सीबीआई और इनकम टैक्स अफसर बनकर लोग फर्जी छापेमारी करते हैं और करोड़ों रुपये साफ कर देते हैं। ठीक उसी तर्ज पर देश की राजधानी से सटे ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में भी एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। खुद को जीएसटी (GST) का बड़ा अधिकारी बताकर एक जीएसटी कंसल्टेंट को फर्जी ई-वे बिल और जेल भेजने का डर दिखाकर 29 लाख रुपये हड़पने वाले 5 शातिर बदमाशों को बिसरख थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से शत-प्रतिशत वसूली (29 लाख रुपये) करते हुए 24.50 लाख रुपये नकद और 4.50 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र सिंह और एडीसीपी स्वतंत्र सिंह ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए पुलिस टीम की इस सफलता की जानकारी दी।

कैसे अंजाम दी गई यह वारदात?

यह फिल्मी घटना 20 जुलाई 2026 की है। पीड़ित संदीप, जो कि एक जीएसटी कंसल्टेंट हैं, अपनी आवासीय सोसाइटी से अपनी कार में लैपटॉप और पालतू कुत्ते (Pet Dog) के साथ निकले थे। जैसे ही वह एस एस्पायर सोसाइटी के पास पहुंचे, कार सवार बदमाशों ने उनकी गाड़ी के आगे अपनी कार लगा दी। खुद को जीएसटी विभाग का सीनियर अधिकारी बताते हुए बदमाश जबरन संदीप की कार में सवार हो गए। उन्होंने दो कंपनियों के नाम लेकर फर्जी ई-वे बिल के नाम पर संदीप को बुरी तरह डराया और ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। जेल भेजने और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर आरोपियों ने संदीप से 29 लाख रुपये कैश की मांग की। पुलिस की तत्परता और 100% शत-प्रतिशत बरामदगी पीड़ित की शिकायत पर थाना बिसरख में तुरंत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। डीसीपी और एडीसीपी के मार्गदर्शन में बिसरख पुलिस ने सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और लोकल इंटेलिजेंस (मुखबिरों) की मदद से पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। पुलिस ने मुख्य अभियुक्त कशिश चौहान उर्फ ईशू समेत कुल 5 आरोपियों को जलपुरा रोड स्थित इस्कॉन मंदिर के पास से धर दबोचा।

बरामदगी की सूची: नकद राशि: ₹24,50,000/- (चोबीस लाख पचास हजार रुपये) ज्वेलरी: ₹4,50,000/- मूल्य की सोने की चेन, चांदी का कड़ा और अंगूठी (कुल बरामदगी: शत-प्रतिशत 29 लाख रुपये) वाहनों की जब्ती: घटना में प्रयुक्त 2 लग्जरी कारें (मारुति XL-6 और बिना नंबर प्लेट की हुंडई वेन्यू) वर्दी और फर्जी पहचान: 1 जोड़ी उत्तर प्रदेश पुलिस के Sub-Inspector (दरोगा) की वर्दी, 1 जोड़ी दिल्ली सिविल डिफेंस (DCD) की लोगो व बेल्ट लगी वर्दी।

अन्य: विभिन्न कंपनियों के 07 मोबाइल फोन।  पुरानी पहचान और गहरी साजिश का खुलासा पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। पूछताछ के दौरान पता चला कि पीड़ित संदीप और मुख्य अभियुक्त कशिश उर्फ ईशू साल 2021 से एक-दूसरे को जानते थे। दरअसल, 2021 में जीएसटी विभाग द्वारा जारी एक नोटिस को निस्तारित कराने के दौरान संदीप और कशिश की मुलाकात हुई थी। कशिश को यह बात अच्छी तरह पता थी कि संदीप जीएसटी के बिलों और अभिलेखों में हेरफेर करके मोटा मुनाफा कमाता है। संदीप की इसी कमजोरी को हथियार बनाकर कशिश और उसके साथियों ने एक बड़ी रकम ऐंठने का मास्टरप्लान तैयार किया। कई दिनों तक संदीप की हर गतिविधि की रेकी (Reconstitution/Tracking) की गई और 20 जुलाई को मौका मिलते ही इस फर्जी रेड को अंजाम दिया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि पकड़ा गया कोई भी आरोपी असली पुलिसकर्मी नहीं है।

हालांकि, इनमें से कई संविदा व अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़े रहे हैं: 1. कशिश चौहान उर्फ ईशू (मुख्य आरोपी): निवासी बिजनौर (हाल पता: सलारपुर, नोएडा)। यह यशोभूमि द्वारका (दिल्ली) में DCPO (ड्राइवर कम पंप ऑपरेटर) के पद पर तैनात है। 2. राजेश पवार: निवासी जैतपुर एक्सटेंशन, महरौली (दिल्ली)। यह दिल्ली नागरिक सुरक्षा बल (Civil Defence) से जुड़ा हुआ है। 3. विवेक शर्मा: निवासी नौझील, मथुरा। यह बल्लभगढ़ (हरियाणा) में DCPO के पद पर कार्यरत रहा है। 4. अंकित शाही: निवासी खामपार, देवरिया (हाल पता: सलारपुर, नोएडा)। यह लोहे की ग्रिल/गेट बनाने का काम करता है और घटना में इस्तेमाल XL-6 कार का मालिक है। 5. अंशुल: निवासी शांति नगर, एटा। यह दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। पुलिस फिलहाल इन सभी आरोपियों के आपराधिक इतिहास (Criminal Antecedents) की गहनता से छानबीन कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्होंने पहले भी इस तरह की वारदातें की हैं या नहीं।

पुलिस की सीख और अपील सेंट्रल नोएडा पुलिस ने नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर डराता-धमकाता है या मौके पर रिश्वत/रंगदारी की मांग करता है, तो तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन या आपातकालीन नंबर पर सूचना दें। बिना आधिकारिक पहचान पत्र देखे और बिना विभागीय प्रक्रिया के किसी भी संदिग्ध लेन-देन से बचें।

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