Noida Workers’ Protest: नोएडा मजदूर आंदोलन के चार महीने बाद भी जेल में बंद एक्टिविस्ट-छात्र; जंतर-मंतर पर CaRWAN का जोरदार प्रदर्शन, तत्काल रिहाई की मांग

Noida Workers’ Protest: नई दिल्ली/नोएडा। अप्रैल 2026 में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए मजदूर आंदोलन के चार महीने बाद भी कई छात्र, मजदूर और सामाजिक कार्यकर्ता जेल में बंद हैं। 11 अगस्त 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर के पास कैंपेन फॉर द रिलीज ऑफ वर्कर्स एंड एक्टिविस्ट्स ऑफ नोएडा (CaRWAN) के बैनर तले छात्रों, मजदूरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जेल में बंद लोगों के परिवारों ने प्रदर्शन कर उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सृष्टि गुप्ता, आकृति चौधरी, मनीषा चौहान और रूपेश रॉय समेत कई लोग बिना ठोस सबूतों के चार महीने से सलाखों के पीछे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मजदूरों की जायज मांग को ‘बाहरी साजिश’ बताकर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) और UAPA जैसे कड़े कानून लगाए, ताकि लोकतांत्रिक आवाजों को दबाया जा सके। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए—“इंकलाब जिंदाबाद! फर्जी मुकदमे वापस लो! हमारे साथियों को रिहा करो!”

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश रोक दिया। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पहले IPC 144) का हवाला देते हुए बैरिकेडिंग की गई और FIR व हिरासत की चेतावनी दी गई। फिर भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। बैरिकेड्स के बाहर उन्होंने मंच बनाकर भाषण दिए, क्रांतिकारी गीत गाए और कविताएं सुनाईं। युवाओं ने ढोलक-डफली के साथ सांस्कृतिक विरोध जताया। मुख्य वक्ता ने कहा, “हमारे साथी जेल के अंदर भी समाज सुधार का काम कर रहे हैं—बच्चों को कला सिखा रहे हैं और लाइब्रेरी चला रहे हैं। मजदूरों के वेतन बढ़ाने की मांग को ‘साजिश’ बताकर प्रताड़ित किया जा रहा है। हम झुकेंगे नहीं। जब तक सभी रिहा नहीं होते, आंदोलन जारी रहेगा।” प्रदर्शनकारियों और मानवाधिकार संगठनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) की मांग की है। उनका तर्क है कि शांतिपूर्ण तरीके से मांग रखना अपराध नहीं है।

आंदोलन की शुरुआत और घटनाक्रम

अप्रैल 2026 में हरियाणा सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत वृद्धि के बाद नोएडा के फैक्ट्री मजदूरों ने भी समान मांग उठाई। 10 अप्रैल से शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू हुए। 13 अप्रैल को यह हिंसक हो गया। तोड़फोड़, आगजनी और पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं। पुलिस ने सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया। कई FIR दर्ज हुईं। आकृति चौधरी (पीएचडी स्कॉलर और थिएटर आर्टिस्ट), सृष्टि गुप्ता (विजुअल आर्टिस्ट), मनीषा चौहान और रूपेश रॉय (ऑटो चालक) समेत आदित्य आनंद, सत्यम वर्मा, हिमांशु ठाकुर आदि को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया। कुछ पर NSA भी लगाया गया। पुलिस का दावा है कि यह पूर्व-नियोजित साजिश थी। वहीं, कार्यकर्ता और परिवार कहते हैं कि कई लोग हिंसा के समय पहले से हिरासत में थे या मौजूद नहीं थे। जेल में बंद लोग शिक्षा और कला गतिविधियां चला रहे हैं। CaRWAN लगातार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है। जून और जुलाई में भी इसी मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। हैदराबाद समेत अन्य शहरों में भी समर्थन प्रदर्शन हुए।

ताजा विकास

11 अगस्त 2026 को ही अदालत ने सत्यम वर्मा और मनीषा चौहान को एक मामले में जमानत दे दी। लेकिन अन्य मामलों के कारण वे अभी जेल से बाहर नहीं आ पाए। अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं पहले खारिज हो चुकी हैं। यूपी सरकार ने बाद में न्यूनतम वेतन बढ़ाया, लेकिन गिरफ्तार लोगों की रिहाई का मुद्दा अभी भी लंबित है। CaRWAN और सहयोगी संगठन कहते हैं कि वे कानूनी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर लड़ाई जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों का संकल्प साफ है—जब तक बेकसूर साथी रिहा नहीं होते, आंदोलन थमेगा नहीं।
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