Noida district hospital emergency negligence: नोएडा। जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं की पोल उस वक्त खुल गई जब गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए तैनात रहने वाली ऑनकॉल विशेषज्ञ सेवा पूरी तरह ध्वस्त मिली। तीन दिन पहले लहूलुहान हालत में पहुंचे एक बच्चे को बिना एक्सरे जांच और बिना विशेषज्ञ परामर्श के ही दूसरे अस्पताल रेफर करने की तैयारी कर ली गई थी।
24 जुलाई की घटना
नोएडा के एक परिवार ने अपने सात वर्षीय बेटे आदिल को गंभीर हालत में जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया था। बच्चे की हड्डी में गहरी चोट थी और लगातार खून बह रहा था। स्टाफ ने खून साफ कर पट्टी तो बांध दी, लेकिन न तो ऑर्थोपैडिक विशेषज्ञ को इमरजेंसी कॉल किया गया और न ही चोट की सटीक स्थिति जानने के लिए एक्सरे कराया गया। इसके बावजूद स्टाफकर्मी बच्चे को दूसरे अस्पताल रेफर करने के लिए कह रहे थे।
औचक निरीक्षण में हुआ खुलासा
इसी बीच मेरठ मंडल के अपर निदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग) डॉ. मनोज कुमार सेन जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। इमरजेंसी वार्ड में मरीजों से बातचीत के दौरान व्यवस्था की खामियां सामने आईं। जब उन्होंने स्टाफ से विशेषज्ञ को आनकॉल बुलाने और एक्सरे कराने के बारे में पूछा, तो जवाब मिला कि इमरजेंसी में एक्सरे-तकनीशियन की ड्यूटी ही नहीं लगाई गई है, और विशेषज्ञ भी आनकॉल बुलाने पर नहीं आते।
अपर निदेशक भड़के, तुरंत कराया इलाज
यह सुनकर अपर निदेशक नाराज हो गए और मौके पर ही सीएमएस को निर्देश देकर व्यवस्था बनवाई। इसके बाद घायल बच्चे का समुचित उपचार शुरू कराया गया।
अगले दिन भी वही शिकायत
सूत्रों के अनुसार 25 जुलाई की दोपहर बाद भी रेडियोलॉजी विभाग में एक्सरे-तकनीशियन के उपलब्ध न होने की शिकायत सीएमएस तक पहुंची, जिससे अस्पताल प्रशासन पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
सवालों के घेरे में अस्पताल प्रशासन
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिला अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट राम-भरोसे चल रही है, या फिर जिम्मेदार डॉक्टर अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतकर शासन के आदेशों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।
सीएमएस का बयान
“इमरजेंसी विभाग में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ और एक्सरे-तकनीशियन को न बुलाने पर अपर निदेशक ने नाराजगी जाहिर की थी। उनके निर्देश पर स्टाफ को सख्त हिदायत दी गई है। किसी मरीज को स्वास्थ्य सेवा एवं उपचार में किसी तरह की दिक्कत न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। फिलहाल अपर निदेशक ने लिखित में जवाब-तलब नहीं किया है।”
— डॉ. अशोक कुमार झा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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