नोएडा केंद्रीय विहार-2: केंद्रीय विहार-2 सोसायटी में मासूम पर कुत्तों का हमला, उपभोक्ता आयोग ने RWA को ठहराया दोषी, 1.5 लाख मुआवजे का आदेश

नोएडा केंद्रीय विहार-2: नोएडा। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में रहने वाली हाईराइज सोसायटियों की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का एक फैसला नजीर बनकर सामने आया है। नोएडा के सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसायटी परिसर में चार वर्षीय बच्ची पर आवारा कुत्तों के हमले के मामले में आयोग ने RWA को सेवा में कमी (डेफिशिएंसी इन सर्विस) का दोषी माना है। आयोग ने आदेश दिया है कि पीड़ित बच्ची के परिजनों को 30 दिनों के भीतर 1.5 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जाएं।

क्या है पूरा मामला

शिकायतकर्ता आशीष कुमार अग्रवाल के मुताबिक, 29 जून 2022 की रात करीब 9:20 बजे उनकी चार वर्षीय बेटी शायरा सोसायटी के आरडब्ल्यूए कार्यालय के पीछे बने ग्रीन पार्क में खेल रही थी, तभी आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। बच्ची गंभीर रूप से जख्मी हो गई। घटनास्थल पर मौजूद एक राहगीर ने किसी तरह हस्तक्षेप कर बच्ची को बचाया, जिसके बाद उसे तुरंत यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना के करीब छह महीने बाद, 16 दिसंबर 2022 को आशीष कुमार अग्रवाल ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि सोसायटी में लंबे समय से आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ था और इससे पहले भी बच्चों, बुजुर्गों और घरेलू सहायिकाओं पर हमले हो चुके थे। बावजूद इसके, RWA और नोएडा प्राधिकरण को कई बार लिखित शिकायतें देने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बावजूद सोसायटी में कुत्तों के लिए अलग फीडिंग जोन नहीं बनाया गया था, न ही उनके टीकाकरण और प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की गई थी।

RWA और प्राधिकरण की दलीलें

सुनवाई के दौरान RWA ने आयोग के समक्ष दलील दी कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता और सोसायटी परिसर में आवारा कुत्तों का प्रवेश किसी सेवा में कमी का मामला नहीं माना जा सकता। वहीं नोएडा प्राधिकरण ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शिकायत उसे मिलते ही RWA को अग्रसारित कर दी गई थी। चूंकि रखरखाव शुल्क RWA ही वसूलती है, इसलिए सोसायटी परिसर में आवारा कुत्तों से जुड़ी व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी उसी की बनती है।

आयोग ने क्या कहा

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब RWA निवासियों से मेंटेनेंस और सुरक्षा शुल्क वसूलती है, तो वह सेवा प्रदाता की भूमिका में आ जाती है, और ऐसे में सोसायटी परिसर को सुरक्षित रखना उसका दायित्व बन जाता है। आयोग ने पाया कि RWA आवारा कुत्तों के खतरे को रोकने में विफल रही, जो सेवा में स्पष्ट कमी का मामला है। इसी आधार पर आयोग ने RWA को आदेश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर बच्ची के परिजनों को 1.5 लाख रुपये मुआवजे के रूप में अदा करे। हालांकि आयोग ने नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ दर्ज शिकायत को खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि प्राधिकरण शिकायतकर्ता से सीधे कोई मेंटेनेंस या सुरक्षा शुल्क नहीं लेता, इसलिए उपभोक्ता सेवा के आधार पर उसकी जवाबदेही इस मामले में स्थापित नहीं होती।

सोसायटियों के लिए संदेश

यह फैसला नोएडा और आसपास की अन्य हाईराइज सोसायटियों के लिए भी अहम माना जा रहा है, जहां आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के आदेश RWA प्रबंधनों को सोसायटी परिसर में सुरक्षा इंतजामों और आवारा जानवरों के प्रबंधन को लेकर अधिक जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों और मुआवजे से जुड़े मामलों में विभिन्न उपभोक्ता फोरम और अदालतें पहले भी नगर निकायों और स्थानीय निकायों को जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़ितों को मुआवजा देने के आदेश दे चुकी हैं, जिससे यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना रहता है।

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