नोएडा जिला अस्पताल विवाद: मरीजों से बदसलूकी, इलाज में लापरवाही और गंदगी के आरोप, सीएम योगी से जांच की मांग

नोएडा जिला अस्पताल विवाद: नोएडा,  सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। सेक्टर-51 के महासचिव और डीडीआरडब्लूए फेडरेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने अस्पताल प्रशासन पर मरीजों के साथ दुर्व्यवहार, इलाज में लापरवाही और बदहाल व्यवस्थाओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला

संजीव कुमार के अनुसार, 9 जुलाई की रात वह अपनी घरेलू सहायिका की बेटी को भर्ती कराने जिला अस्पताल पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि एक सड़क दुर्घटना में घायल महिला के परिजन डॉक्टरों के इंतजार में काफी देर तक परेशान होते रहे। उनका आरोप है कि इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने समय पर मरीज की जांच नहीं की, जिससे नाराज़ परिजन बिना इलाज कराए ही अस्पताल से लौट गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ का व्यवहार मरीजों, खासकर गरीब परिवारों के प्रति असंवेदनशील है। संजीव कुमार के मुताबिक, उनकी घरेलू सहायिका की बेटी को भी सिफारिश के बाद ही भर्ती किया जा सका, और परिवार अस्पताल के इलाज व स्टाफ के रवैये को लेकर लगातार शिकायत कर रहा है। इसके अलावा उन्होंने अस्पताल परिसर में गंदगी, बेड पर गंदी चादरों, दुर्गंध और आवारा कुत्तों की मौजूदगी का भी आरोप लगाया है।

अस्पताल की पुरानी शिकायतें भी सामने आईं

यह पहला मौका नहीं है जब नोएडा जिला अस्पताल में मरीजों के साथ अभद्रता या व्यवस्थागत खामियों की शिकायत सामने आई हो। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी एक मरीज की शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन को डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ से लिखित स्पष्टीकरण मांगना पड़ा था, जिसमें एक मरीज के साथ कथित अभद्रता और जांच के दौरान अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने का आरोप लगाया गया था। इसके साथ ही अस्पताल के सफाई कर्मचारियों ने भी हाल ही में वेतन और सेवा शर्तों को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला है। जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों से आर्थिक शोषण किया जा रहा है, और यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो 13 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरना-हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में अगर हड़ताल होती है तो अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था और बिगड़ सकती है, जिसका सीधा असर मरीजों पर पड़ने की आशंका है। इसके अतिरिक्त, 240 बेड क्षमता वाले इस आठ मंजिला अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित रैंप निर्माण भी फिलहाल फाइलों में अटका हुआ है। डिजाइन और तकनीकी मंजूरी की प्रक्रिया में देरी के चलते आपात स्थिति में मरीजों की निकासी के लिए अभी सिर्फ लिफ्ट और सीढ़ियों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने हाल ही में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आवास की व्यवस्था कराने की दिशा में भी पहल शुरू की है, ताकि स्टाफ की उपलब्धता और सेवाओं में सुधार हो सके।

प्रशासन की चुप्पी, जांच की मांग तेज

संजीव कुमार ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषी डॉक्टरों व स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इन ताजा आरोपों पर जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अस्पताल की व्यवस्थाओं में ठोस सुधार नहीं हो पा रहा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को हर बार परेशानी झेलनी पड़ती है। अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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