बॉलीवुड और हॉरर में एक साथ निराशा: ‘इक्का’, ‘धमाल 4’ और ‘ईविल डेड बर्न’ की समीक्षाएं बताती हैं क्यों दर्शक थिएटर से खाली हाथ लौट रहे 

बॉलीवुड और हॉरर में एक साथ निराशा: इस सप्ताह बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों मोर्चों पर दर्शकों को निराशा ही हाथ लगी। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई सनी देओल और अक्षय खन्ना की कोर्टरूम थ्रिलर ‘इक्का’, अजय देवगन, अरशद वारसी और रितेश देशमुख की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी ‘धमाल 4’ तथा हॉरर फ्रैंचाइजी की नई कड़ी ‘ईविल डेड बर्न’ – तीनों फिल्में अपनी-अपनी कैटेगरी में पुरानी सूत्रों, कमजोर लेखन और अतिरिक्त हिंसा/कॉमेडी के बोझ तले दबकर रह गईं।

‘इक्का’: दो दशक पुरानी कहानी
सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा द्वारा निर्देशित ‘इक्का’ में सनी देओल एक principled डिफेंस वकील अर्जुन की भूमिका में हैं, जो अक्षय खन्ना (शौर्यमान) के खिलाफ केस लड़ते हैं। फिल्म privilege, justice और family crisis को जोड़ती है, लेकिन समीक्षकों के अनुसार यह 90 के दशक की कोर्टरूम ड्रामाओं की तरह लगती है। ट्विस्ट्स पूर्वानुमानित हैं, महिलाओं के किरदार कमजोर हैं और डायरेक्टर बहुत कुछ एक साथ पैक करने की कोशिश में कहानी बिखेर देते हैं। टिल्लोतमा शोमे और संजीदा शेख जैसे कलाकारों के बावजूद फिल्म में ताजगी की कमी साफ झलकती है। कुछ दर्शक सनी देओल के गुस्सैल अंदाज को पसंद कर रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह “दो दशक लेट” महसूस होती है।

‘धमाल 4’: खजाना मिल जाए, हंसी नहीं
इंद्रा कुमार निर्देशित ‘धमाल 4’ फ्रैंचाइजी के पुराने फॉर्मूले – treasure hunt, misunderstandings और chaos – पर टिकी है। अजय देवगन, संजय मिश्रा, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी मुख्य भूमिकाओं में हैं। लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट, dated humor, body-shaming jokes और खराब AI-generated visuals ने फिल्म को नुकसान पहुंचाया। ओपनिंग डे पर फिल्म ने अनुमान से बेहतर ₹13-14 करोड़ नेट कलेक्शन किया (worldwide ~₹21 करोड़), लेकिन रिव्यूज मिक्स्ड हैं। कुछ इसे “family entertainer” बता रहे हैं, जबकि ज्यादातर समीक्षक कह रहे हैं कि “खजाना ढूंढना आसान होगा, असली हंसी ढूंढना मुश्किल”। फ्रैंचाइजी के पुराने किरदारों की chemistry बची हुई है, लेकिन नई एंट्रीज और execution ने निराश किया।

‘ईविल डेड बर्न’: खून ज्यादा, डर कम
सेबेस्टियन वानिएक निर्देशित ‘ईविल डेड बर्न’ फ्रैंचाइजी की सबसे खूनी कड़ी है। सौहेला याकूब मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म grieving widow और possessed family की कहानी है, जिसमें practical effects और gore बेमिसाल हैं। लेकिन समीक्षकों के मुताबिक यह “gore को horror समझने” की गलती करती है – scares कम, bloodbath ज्यादा। कुछ सीन (खासकर car sequence) दर्शकों को प्रभावित करते हैं, लेकिन overall narrative undercooked लगती है। Rotten Tomatoes पर 70%+ स्कोर के बावजूद, कई रिव्यूज इसे “exhausting” और “humorless” बताते हैं।

क्यों हो रही है निराशा?
तीनों फिल्में अलग-अलग genres की हैं, लेकिन एक समान समस्या है  पुराने फॉर्मूले, predictable twists, weak character development और execution की कमी। बॉलीवुड में कॉमेडी और थ्रिलर, जबकि हॉरर में gore पर अत्यधिक भरोसा दर्शकों को अब संतुष्ट नहीं कर पा रहा।

बॉक्स ऑफिस और ऑडियंस रिएक्शन:
‘धमाल 4’ ने मास और फैमिली ऑडियंस को कुछ हद तक आकर्षित किया, लेकिन वर्ड ऑफ माउथ मिक्स्ड है। ‘इक्का’ OTT पर बेहतर परफॉर्म कर सकती है। ‘ईविल डेड बर्न’ gore fans के लिए है, लेकिन mainstream horror lovers निराश हो सकते हैं। 2026 की शुरुआती रिलीज से यह साफ है कि दर्शक अब सिर्फ नाम और फ्रैंचाइजी पर नहीं, बल्कि ताजा कहानी, मजबूत स्क्रिप्ट और सच्ची entertainment पर भरोसा कर रहे हैं। फिल्ममेकर्स को नई सोच की जरूरत है, वरना थिएटरों में सीटें खाली रहती रहेंगी। दर्शक अपनी राय कमेंट में साझा करें।

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