ग्रेटर नोएडा जेवर दुर्घटना: ग्रेटर नोएडा, जेवर, एक बार फिर सड़क दुर्घटना ने मजदूरों की जिंदगी को बर्बाद कर दिया। ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र के नीमका गांव के समीप बुधवार रात करीब 10:30 बजे जेवर-खुर्जा मार्ग पर तेज रफ्तार काली स्कॉर्पियो ने सड़क किनारे पैदल जा रहे तीन युवक मजदूरों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि तीनों युवक दूर तक उड़ते हुए खेत में जा गिरे और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मृतकों की पहचान बिहार के अररिया जिले के निवासी करन (22 वर्ष), विश्वजीत (24 वर्ष) और मिथुन (25 वर्ष) के रूप में हुई है। ये तीनों करीब एक महीने पहले धान की रोपाई के मौसमी काम पर ठेके पर जेवर के गांवों में आए थे। काम खत्म कर घर लौट रहे थे, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। तीनों परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है।
पुलिस कार्रवाई कहां तक पहुंची?
जेवर पुलिस ने तुरंत मामले को गंभीरता से लिया। घटना स्थल पर पहुंचकर शवों को जेवर के कैलाश अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। मृतकों के परिजनों की तहरीर पर जेवर थाने में BNS की धाराओं (लापरवाही से वाहन चलाकर मौत का कारण बनना आदि) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने आसपास के CCTV फुटेज, मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूत्रों के आधार पर छापेमारी की। गुरुवार शाम 4 बजे आरोपी दीपांशु (32 वर्ष), दस्तमपुर गांव का निवासी, को गिरफ्तार कर लिया गया। दुर्घटना में इस्तेमाल स्कॉर्पियो वाहन भी उसकी निशानदेही पर बरामद कर लिया गया। पुलिस पूछताछ जारी है और जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि हादसा शराब, तेज रफ्तार या अन्य लापरवाही का परिणाम था।
मजदूरों की पीड़ा: धरना दें तो आतंकवादी, सड़क पर चलें तो कीड़ा-मकौड़ा
यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रवासी मजदूरों की बदहाली की तस्वीर है। बिहार जैसे राज्यों से मौसमी काम के लिए उत्तर प्रदेश आने वाले गरीब मजदूर अक्सर बिना किसी सुरक्षा के सड़कों पर पैदल चलने को मजबूर होते हैं। ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक परिवहन की कमी, अधूरी सड़कें और तेज रफ्तार वाहनों का तांडव उनकी जिंदगी को हर रोज खतरे में डालता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यदि ये मजदूर अपनी मांगों के लिए धरना देते हैं तो उन्हें ‘आतंकवादी’ करार दिया जाता है, लेकिन सड़क किनारे चलते हुए वे ‘कीड़े-मकौड़े’ समझकर कुचल दिए जाते हैं। ग्रेटर नोएडा-जेवर क्षेत्र में विकास कार्यों के बीच सड़क दुर्घटनाओं की संख्या चिंताजनक है। इस साल मई तक जिले में दर्ज 68 दुर्घटनाओं में 36 मौतें हो चुकी हैं। जेवर पुलिस स्टेशन क्षेत्र हाई-रिस्क कॉरिडोर में शामिल है।
प्रशासन से अपील:
मजदूर यूनियनों और स्थानीय नेताओं ने मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा, नौकरी और सड़क सुरक्षा पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। एडीसीपी संतोष कुमार ने आश्वासन दिया है कि दोषी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और ऐसे हादसों को रोकने के लिए अभियान चलाया जाएगा। यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा, मजदूर कल्याण और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत पर सवाल उठाती है। परिवारों का दर्द कम नहीं हो सकता, लेकिन न्याय और मुआवजे से कुछ राहत जरूर मिल सकती है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच जारी।

