श्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। इसके बाद दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम युद्धविराम भी गंभीर विवादों में घिर गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा, हालांकि उन्होंने बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं बताई है।
ईरान का आरोप- अमेरिका ने तोड़ा समझौता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिका पर सीधा आरोप लगाया कि तेहरान ने अब तक युद्धविराम की सभी शर्तों का पालन किया, लेकिन अमेरिका ने समझौते का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि अमेरिका बार-बार अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटता रहा है। अराघची ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के उल्लंघन जारी रहे तो शांति प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बेहद सख्त चेतावनी जारी की। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान ने उन पर जानलेवा हमला करने या उनकी हत्या की किसी भी कथित धमकी को अमल में बदलने की कोशिश की, तो अमेरिका की ओर से “1000 मिसाइलें तैयार” हैं। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद हजारों अतिरिक्त मिसाइलें भी दागी जाएंगी और अमेरिकी सेना लंबे समय तक ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने में सक्षम है।
होर्मुज बना सबसे बड़ा विवाद
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों देशों के बीच टकराव जारी है। अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दे कि वह अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले नहीं करेगा और समुद्री मार्ग खुला रहेगा। वहीं ईरान का कहना है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा और नियंत्रण उसके अधिकार क्षेत्र से जुड़ा विषय है।
वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य टकराव या जहाजों पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर व्यापक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा तो इसका प्रभाव पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

