TCS ‘Corporate Jihad’: तात्कालिक बहुचर्चित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) नाशिक बीपीओ मामले में एक अहम मोड़ आया है, जहां अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केदार जी. जोशी की अदालत ने मुख्य आरोपी निदा खान को नियमित जमानत दे दी है। 6 जुलाई को सुनाए गए अपने आदेश में अदालत ने कहा कि निदा खान पांच महीने की गर्भवती हैं, और कोई भी बच्चा भगवान श्रीकृष्ण की तरह जेल में जन्म लेने की पीड़ा और सामाजिक कलंक झेले, यह उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि अजन्मे बच्चे के पालन-पोषण और कल्याण को सुरक्षित रखने के लिए आवेदक के पक्ष में न्यायिक विवेक का प्रयोग करना उचित और न्यायसंगत होगा। गौरतलब है कि निदा खान को 42 दिनों तक चली तलाश के बाद 7 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था, और वह इस मामले में गिरफ्तार एकमात्र महिला आरोपी हैं। उनके साथ ही सह-आरोपी तौसीफ अत्तार को भी जमानत मिल गई, जबकि एक अन्य आरोपी मोहम्मद दानिश शेख की जमानत अर्जी आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए खारिज कर दी गई।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा प्रकरण टीसीएस से जुड़े नाशिक बीपीओ में महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने भगवान शिव, कृष्ण और ब्रह्मा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को आहत किया। जांच में यह भी सामने आया कि निदा खान ने पीड़िता को बुर्का और पैगंबर मोहम्मद के जीवन पर आधारित एक किताब दी थी, और उसे नमाज़ अदा करने तथा अन्य धार्मिक रीति-रिवाज सिखाए थे। पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में मार्च-अप्रैल 2026 के बीच कई एफआईआर दर्ज कीं, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया। एसआईटी फिलहाल देवलाली कैंप थाने में दर्ज एक और मुंबई नाका थाने में दर्ज आठ मामलों समेत कुल नौ आपराधिक मामलों की जांच कर रही है, जिनमें यौन शोषण, जबरन धर्मांतरण के प्रयास, धार्मिक भावनाएं आहत करने, पीछा करने, छेड़छाड़ और कार्यस्थल पर उत्पीड़न के आरोप शामिल हैं। निदा खान, दानिश शेख और तौसीफ अत्तार के अलावा शफी बिखान शेख, रज़ा रफीक मेमन, शाहरुख कुरैशी और आसिफ अफताब अंसारी भी इन मामलों में आरोपी हैं।
जांच पूरी, कस्टडी की जरूरत नहीं: अदालत
बचाव पक्ष के वकील बाबा सय्यद ने अदालत में दलील दी, जबकि राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमित मिसार पेश हुए। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि खान के खिलाफ प्रथम दृष्टया सामग्री जरूर मौजूद है, लेकिन चूंकि उनसे अब कुछ बरामद नहीं करना है और अभियोजन पक्ष ने आगे की जांच के लिए उनकी हिरासत की मांग भी नहीं की, इसलिए उन्हें हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि मुकदमे में अभी समय लगेगा, इसलिए एफआईआर में लगे आरोपों और मामले की समग्र परिस्थितियों को देखते हुए आवेदक जमानत की हकदार हैं।
टीसीएस का रुख
टीसीएस ने दोहराया है कि कंपनी किसी भी तरह के उत्पीड़न या दबाव के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाती है। कंपनी ने यह भी पुष्टि की है कि इस मामले में नामजद कर्मचारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

