Ayodhya News: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में राम मंदिर के चढ़ावा और चंदा चोरी के गंभीर मामले में महासचिव चंपत राय तथा ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। नैतिकता के आधार पर दिए गए इन इस्तीफों को ट्रस्ट की बैठक में मंजूरी दे दी गई, जिससे देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों की आस्था के केंद्र में हुए इस कथित घोटाले पर सियासी और प्रशासनिक घमासान तेज हो गया है। चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंपा था। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है और भक्तों के दान की सुरक्षा के लिए नए इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने राम भक्तों को आश्वासन दिया कि आस्था के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चोरी का खुलासा और गिरफ्तारियां
मामला तब सामने आया जब मंदिर में लगे छिपे कैमरों की फुटेज से चढ़ावा गिनती के दौरान हेराफेरी का पता चला। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर पहली FIR दर्ज की गई। अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तारी हुई है, जिनमें चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामाशंकर यादव (उर्फ तिन्नू), कैश काउंटिंग टीम के सदस्य लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा सहित अन्य शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों से ₹79,85,493 की नकदी बरामद की है। SIT की जांच में कैमरे की फुटेज में आरोपी चढ़ावे को कपड़ों, जुराबों आदि में छिपाकर ले जाते दिखे हैं। चंपत राय ने पूछताछ में किसी संलिप्तता से इनकार किया और दावा किया कि चोरी उनके निर्देश पर लगाए गए कैमरों से ही उजागर हुई। उन्होंने इसे “भरोसे का कत्ल” बताया।
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
ट्रस्ट की बैठक में इस्तीफों के अलावा सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने, नई निगरानी प्रणाली लगाने और जांच रिपोर्ट पर चर्चा हुई। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि चंपत राय या अनिल मिश्रा के खिलाफ सीधे FIR में नाम नहीं है, लेकिन ट्रस्ट की छवि और निष्पक्ष जांच के लिए उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी ली। मामले में राजनीतिक बवाल भी तेज है। विपक्ष ने इसे बड़े स्तर का घोटाला बताया है, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने इसे अलग-थलग घटना करार दिया और पूर्ण जांच का आश्वासन दिया। अयोध्या प्रशासन ने कुछ आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई भी शुरू की है।
पृष्ठभूमि
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर के निर्माण, रखरखाव और दान प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालता है। चंपत राय लंबे समय से विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े रहे हैं और ट्रस्ट के प्रभावशाली चेहरे माने जाते थे। इस घोटाले ने पूरे राम मंदिर आंदोलन की छवि को प्रभावित किया है। ट्रस्ट ने भरोसा दिलाया है कि दोषी किसी भी स्तर के हों, उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। राम भक्तों से अपील की गई है कि वे दान जारी रखें, क्योंकि नई सुरक्षा व्यवस्था से अब ऐसा दोबारा नहीं होगा। यह घटनाक्रम राम मंदिर की पवित्रता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, लेकिन ट्रस्ट की त्वरित कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि आस्था का यह प्रतीक भक्तों के विश्वास को पुनः मजबूत करेगा। जांच जारी है और आगे की रिपोर्ट का इंतजार है।

