‘Satluj’ controversy: दिलजीत दोसांझ अभिनीत बहुचर्चित फिल्म ‘सतलुज’ (पूर्व नाम ‘पंजाब 95’) रिलीज़ के महज दो दिन बाद ही ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 से हटा ली गई है, जिसने एक बार फिर फिल्म को लेकर छिड़े विवाद को हवा दे दी है। तीन शीर्षक, तीन साल का इंतज़ार हनी त्रिहान द्वारा निर्देशित यह फिल्म शुरू में ‘घल्लूघारा’ नाम से बनाई गई थी, यह शब्द सिखों के खिलाफ हुए ऐतिहासिक नरसंहारों के लिए इस्तेमाल होता है। इसके बाद इसका नाम ‘पंजाब 95’ और अंततः पंजाब से बहने वाली नदी के नाम पर ‘सतलुज’ रखा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोडक्शन हाउस RSVP ने 2022 के आखिर में सेंसर बोर्ड (CBFC) के पास सर्टिफिकेशन के लिए फिल्म जमा की थी। शुरुआती छह महीने की प्रक्रिया के बाद फिल्म को 21 कट्स के साथ पास किया गया और शीर्षक बदलने की शर्त रखी गई, जिसके खिलाफ RSVP बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा। इसी दौरान फिल्म को 2023 के टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के प्रीमियर से भी वापस लेना पड़ा था। 2025 की शुरुआत में दिलजीत ने फरवरी में थिएटर रिलीज़ की घोषणा की थी, लेकिन फिल्म तय समय पर नहीं आ सकी। तब तक मांगे गए कट्स की संख्या 21 से बढ़कर 120 हो चुकी थी, जबकि हनी त्रिहान लगातार यह कहते रहे कि वे बिना किसी कट के ही फिल्म रिलीज़ करेंगे।
3 जुलाई को चुपचाप रिलीज़, 5 जुलाई को हटी आखिरकार 3 जुलाई को फिल्म बिना किसी शोर-शराबे के Zee5 पर स्ट्रीम होने लगी। दावा किया गया कि यह निर्देशक का ओरिजिनल कट है, जिसमें सेंसर बोर्ड द्वारा मांगे गए बदलाव नहीं किए गए, सिर्फ शीर्षक बदला गया। लेकिन अच्छी समीक्षाओं के बावजूद, 5 जुलाई को Zee5 ने फिल्म को भारतीय कैटलॉग से “अगली सूचना तक” हटा दिया। मंच ने इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिए यह पुष्टि तो की, लेकिन हटाने की वजह के तौर पर सिर्फ “मौजूदा घटनाक्रम” का हवाला दिया, कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। गौरतलब है कि फिल्म अब भी Zee5 Global के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए उपलब्ध है। दिलचस्प बात यह है कि दिलजीत को यह अंदेशा पहले से था। एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान उन्होंने कहा था कि फिल्म को सोमवार तक हटाया जा सकता है, इसलिए फैंस इसे डाउनलोड कर लें। रिलीज़ पर उन्होंने साफ किया कि फिल्म में कोई कट नहीं है और थिएटर वर्जन व होम वर्जन बिल्कुल एक जैसे हैं।
कहानी जसवंत सिंह खालरा की फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में उग्रवाद के दौर में हुई कथित पुलिस ज्यादतियों और लापता हुए हजारों युवाओं के मामलों को उजागर किया था। अमृतसर में बैंक अधिकारी रहे खालरा ने श्मशान घाटों के रिकॉर्ड खंगालकर दावा किया कि हजारों शवों का अंतिम संस्कार लावारिस बताकर किया गया। इन खुलासों के कुछ महीने बाद, 6 सितंबर 1995 को उन्हें उनके घर से उठा लिया गया और वे कभी वापस नहीं लौटे। बाद में सीबीआई जांच में उनकी हत्या की पुष्टि हुई और अदालती कार्यवाही में कई पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया। फिल्म में दिलजीत ने खुद खालरा की भूमिका निभाई है, जबकि अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम किरदारों में हैं।
अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल फिल्म को हटाए जाने की घटना ने एक बार फिर भारत में फिल्म सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस छेड़ दी है। निर्देशक हनी त्रिहान इस फैसले से स्तब्ध बताए जा रहे हैं, वहीं फैंस और फिल्म बिरादरी के कई लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बिना किसी आधिकारिक वजह के फिल्म को क्यों हटाया गया। फिलहाल Zee5 की तरफ से इस पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, और यह देखना बाकी है कि फिल्म भारतीय दर्शकों के लिए दोबारा कब उपलब्ध होगी।

