उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्री विभाग से जुड़े डीड राइटर्स, वकील, स्टाम्प वेंडर्स तथा उनसे जुड़े कर्मचारी 13वें लगातार दिन भी हड़ताल पर हैं। नोएडा से लेकर लखनऊ और प्रदेश के कई जिलों तक फैली इस हड़ताल के कारण प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का काम लगभग ठप्प हो गया है, जिससे आम नागरिकों को न केवल रजिस्ट्री कराने में दिक्कतें आ रही हैं बल्कि प्रदेश सरकार को भी राजस्व नुकसान व कारोबार प्रभावित होने की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
हड़ताल की वजह और मांग
हड़ताली संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-पंजीयन प्रणाली और उससे जुड़े नियमों ने रजिस्ट्री प्रक्रिया में निजी दखल और दर्जनों पारंपरिक कामकाज को प्रभावित कर दिया है। डीड राइटर्स व वकीलों का दावा है कि सरकार ने बिना व्यापक परामर्श और पर्याप्त तकनीकी व प्रशासनिक तैयारी के यह व्यवस्था लागू की है, जिससे उनके रोज़गार व आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। हड़ताली पक्ष की एक प्रमुख मांग है कि सरकार ई-पंजीयन से जुड़ा अपना निर्णय वापस ले या कम-से-कम उस पर व्यापक परामर्श व संशोधन करे, जिस पर वे सहमत हो सकें।
हड़ताली संख्या और असर
हड़ताल के आयोजकों का कहना है कि प्रदेशभर में डीड राइटर्स, वकील, स्टाम्प वेंडर्स तथा उनके कर्मचारी मिलाकर करीब 10 लाख लोग हड़ताल में शामिल हैं। नोएडा के रजिस्ट्री क्षेत्र में काम कर रहे अधिवक्ता सचिन कुमार ने बताया कि इन परिवारों की रोज़ी-रोटी पर प्रत्यक्ष संकट मंडरा रहा है। रजिस्ट्री न होने के कारण संपत्ति लेन-देन रुके हुए हैं, बैंक संबंधी क्लोज़िंग, आईन्वेस्टमेंट और विकास परियोजनाओं के दस्तावेजी काम प्रभावित हुए हैं, जिससे स्थानीय व सूबाई स्तर पर राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है।
बार एसोसिएशन का रुख
नोएडा स्थित बार एसोसिएशन (एडवोकेट एवं डीड राइटर्स) ने सरकार की इस नीति को काला कानून कहा है और उसकी वापसी तक हड़ताल जारी रखने का संकल्प व्यक्तिगत कर लिया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीन डेढ़ा ने बताया कि संगठन किसी भी प्रकार के बहकावे या दबाव में नहीं आएगा। श्री डेढ़ा ने कहा, “हमारे लोग और उनके परिवार भूख-भोजन की चिंता कर रहे हैं; सरकार इस मसले को हल्के में न ले।” उन्होंने आगे कहा कि हड़ताल को और मज़बूत करने के लिए वे आम जनता तथा सामाजिक संगठनों को जोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
आंदोलन के तरीके और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
हड़ताली कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में मशॉल जुलूस, कैंडिल मार्च, पैदले रैले और अन्य शान्तिपूर्ण अभियान शुरू किए हैं ताकि अपनी मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सके। कुछ स्थानों पर रजिस्ट्री कार्यालयों के बाहर धरने और प्रदर्शन भी जारी रहे।
सरकार की ओर से अब तक सीमित टिप्पणी
राज्य सरकार की ओर से शुक्रवार तक इस मामले पर आधिकारिक रूप से विस्तृत घोषणा नहीं आई है। अधिकारियों का कहना है कि ई-पंजीयन का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और रजिस्ट्री से जुड़े धांधली के मामलों को कम करना है। वहीं कुछ प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि सरकार छोटे-छोटे तकनीकी संशोधनों की पेशकश कर बातचीत से मसला सुलझाने का प्रयास कर रही है, पर हड़ताली संघ इसका पर्याप्त समाधान न मान रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि यदि हड़ताल लंबी खींची गई तो राज्य को दैनिक आधार पर करोड़ों रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।
जनता की परेशानियां
हड़ताल से प्रभावित आम नागरिकों का कहना है कि घर खरीद-विक्री, बंधक मुक़दमे, बैंकिंग कार्य और अन्य कानूनी रजिस्ट्री कार्य रुक जाने से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी हो रही है। कई लोग जिनकी डील लाइनबाउंड है, वे देनदारियों व समयबध्द कार्यों को पूरा नहीं कर पा रहे। रियल एस्टेट कारोबारियों ने भी चेतावनी दी है कि यदि रजिस्ट्री प्रक्रिया लंबी अवधि तक ठप रही तो प्रोजेक्ट फंडिंग व क्लाइंट भरोसा प्रभावित होगा।
आगे का रास्ता
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पक्षों के लिए वार्ता के द्वार खुले रखना आवश्यक है। जहां सरकार के लिए ई-पंजीयन के लाभ (पारदर्शिता, डिजिटल रिकॉर्ड, फ्रॉड रिडक्शन) महत्वपूर्ण हैं, वहीं डीड राइटर्स व वकीलों की रोज़ी-रोटी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव की चिंताएं भी गम्भीर हैं। तात्कालिक विकल्प के रूप में मध्यस्थता, चरणबद्ध कार्यान्वयन, उन जिलों में विकल्प बनाए रखना जहाँ डिजिटल कवरेज कम है, तथा पेशेवरों के लिए समायोजित प्रशिक्षण व सर्मथन पैकेज पर विचार किया जा सकता है।
समाप्ति
हड़ताल के 13वें दिन भी उत्तर प्रदेश की जमीन पर प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का काम ठहरा हुआ है और दोनों पक्ष अभी तक निर्णायक समझौते पर नहीं पहुंचे हैं। आने वाले दिनों में सरकार—हड़ताली संगठनों की बातचीत तथा सामाजिक समर्थन-प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह गतिरोध कब खुलेगा और राज्य की रजिस्ट्री व्यवस्था किस दिशा में जाएगी।

