ओमान के समुद्र में तीन जहाजों पर अमेरिकी हमले, भारत सरकार का ‘कड़ा विरोध’, मृतकों के परिजनों ने मांगा न्याय
ओमान के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत से पूरे देश में शोक और गुस्से की लहर है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को तीन दिनों के भीतर दूसरी बार अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया और खाड़ी ओमान में भारतीय नाविकों को ले जा रहे व्यावसायिक जहाजों पर अमेरिकी नौसेना के जारी हमलों पर “कड़ा विरोध” दर्ज कराया।
क्या हुआ था 10 जून को?
10 जून 2026 की सुबह पलाऊ-ध्वज वाहक तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो ओमान के समुद्र में चल रहा था, तभी अमेरिकी विमान ने उसके इंजन रूम में सटीक मिसाइलें दागीं जिससे भीषण आग लग गई और काले धुएँ का गुबार उठा। 28 चालक दल के सदस्यों में से 24 भारतीय थे, जिनमें से 21 को बचाया गया, जबकि तीन की जान चली गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आरोप लगाया कि जहाज अमेरिकी नाकेबंदी की अवहेलना करते हुए ईरानी तेल ले जा रहा था।
तीनों शहीद नाविकों की पहचान
मारे गए तीनों नाविकों की पहचान हुई है — आदित्य शर्मा (डेक कैडेट), शिवानंद चौरसिया (इंजन फिटर) और पटनाला सुरेश (चीफ इंजीनियर)। आदित्य शर्मा हिमाचल प्रदेश के युवा नाविक थे और पिछले नवंबर से ही इस जहाज पर प्रशिक्षु के रूप में काम कर रहे थे। आदित्य के पिता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि हमले से दो हफ्ते पहले जहाज को अमेरिकी नौसेना ने दो बार चेतावनी दी थी। 44 वर्षीय पटनाला सुरेश विशाखापट्टनम के रहने वाले थे और उनके पीछे उनकी पत्नी और 13 तथा 10 वर्ष के दो बेटे हैं।
परिजनों का दर्द: “हमारे दिल टूट गए”
शिवानंद चौरसिया के पिता रमी का ANI को दिया आँसूओं भरा वीडियो पूरे देश को हिला गया। आदित्य शर्मा के दादा ने PTI से कहा — “हम पूरी सच्चाई जानना चाहते हैं। हमारे दिल टूट गए हैं।”
आदित्य के पिता राजेश शर्मा ने ANI से कहा — “मेरी बस एक माँग है: मेरे बेटे के अवशेष वापस लाए जाएँ। मैं जानना चाहता हूँ उसके अंतिम क्षणों में क्या हुआ। क्या उसे कोई बचाव सहायता दी गई?”
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पटनाला सुरेश के परिवार को सरकार की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया और कहा कि दूतावास के माध्यम से पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की कोशिश जारी है।
तीन जहाजों पर हमला — एक हफ्ते का काला इतिहास
8 जून से 11 जून के बीच ओमान की खाड़ी में तीन जहाजों पर अमेरिकी हमले हुए। 8 जून को एमटी मेरीवेक्स पर हमले के बाद ओमान के अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर से 24 भारतीय नाविकों को बाहर निकाला। फिर 10 जून को एमटी सेटेबेलो पर हुए घातक हमले में तीन भारतीय शहीद हुए। 11 जून को गिनी-बिसाऊ-ध्वज वाहक एमटी जलवीर पर हमला हुआ जिसमें 20 भारतीय सवार थे, जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया।
भारत का कूटनीतिक प्रतिरोध
शुक्रवार को अमेरिकी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जेसन मीक्स को दोपहर 2 बजे जवाहरलाल नेहरू भवन बुलाया गया, जहाँ अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने उनसे मुलाकात की। इस बार टेलीविजन कैमरे मंत्रालय के बाहर और अंदर दोनों जगह लगाए गए थे — जो भारत की नाराजगी का सार्वजनिक प्रदर्शन था।MEA ने अमेरिकी राजनयिक को स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन हमलों से “तीन भारतीय जीवन का दुखद और टाला जा सकने वाला नुकसान” हो चुका है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा “इस क्षेत्र में शिपिंग पर जारी हमलों की घटनाएँ अत्यंत चिंताजनक हैं। व्यावसायिक शिपिंग और नागरिक बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाना बंद होना चाहिए।”
राजनीतिक विरोध और सवाल
हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखे शब्दों में कहा — “मोदी सरकार बार-बार अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों की जान बचाने में विफल रही है। यह भारत सरकार का पहला कर्तव्य है। यह दुखद और परेशान करने वाला है कि प्रधानमंत्री के पास उत्सव के लिए समय है लेकिन अमेरिकी सेना द्वारा भारतीयों की हत्या की निंदा करने के लिए नहीं।”
मोदी-ट्रंप मुलाकात की उम्मीद
प्रधानमंत्री मोदी अगले सप्ताह G7 नेताओं के सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने की उम्मीद है, जहाँ यह मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है।
भारत: दुनिया का सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता
भारत विश्व के सबसे बड़े व्यावसायिक नौवहन श्रम आपूर्तिकर्ताओं में से एक है — फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव के अनुसार दुनिया भर में 3 लाख से अधिक भारतीय नाविक कार्यरत हैं। ऐसे में ओमान की खाड़ी में बढ़ते अमेरिकी हमले भारतीय नाविकों के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। यह विवाद उस वक्त आया है जब भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंध पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। तीन भारतीय माताओं के लाल समुद्र की तलहटी में सो गए, और उनके परिवार इंसाफ की राह देख रहे हैं।
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