महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय के छात्रों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के समान शिक्षा संबंधी लाभ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह फैसला मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की हालिया मांगों और भूख हड़ताल के संदर्भ में आया है, जिसके बाद सरकार ने कुणबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को और सरल तथा तेज बनाने के उपाय किए हैं। सरकार ने जस्टिस (रिटायर्ड) संदीप शिंदे समिति का कार्यकाल 30 जून 2027 तक बढ़ा दिया है। इस समिति का मुख्य कार्य ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स (जैसे हैदराबाद गजेटियर) के आधार पर पात्र मराठा परिवारों को कुणबी-मराठा या मराठा-कुणबी प्रमाणपत्र जारी करना है, ताकि वे ओबीसी कोटे के तहत शिक्षा और नौकरियों में लाभ उठा सकें। इसके अलावा, मंत्रालय में एक विशेष हेल्पलाइन (9326562815) शुरू की गई है और जिलों में रिजर्वेशन सहायता सेल स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि प्रमाणपत्र संबंधी समस्याओं का त्वरित निपटारा हो सके। अधिकारियों को देरी करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
पृष्ठभूमि और महत्व
मराठा समुदाय, जो महाराष्ट्र की जनसंख्या का लगभग 30 प्रतिशत है, लंबे समय से शिक्षा, सरकारी नौकरियों और विकास योजनाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग कर रहा है। पहले 2018-19 में 16 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रयास किया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया। 2024 में विधानसभा ने 10 प्रतिशत सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) आरक्षण पारित किया, जो मौजूदा कोटे से अलग है। हालांकि, कई पात्र मराठा परिवार कुणबी श्रेणी (ओबीसी) में शामिल होकर लाभ लेना चाहते हैं। सरकार की नई पहल इसी दिशा में है, जिसमें कुणबी प्रमाणपत्र के जरिए ओबीसी के शिक्षा लाभ (स्कॉलरशिप, फीस रियायत, छात्रवृत्ति आदि) सीधे उपलब्ध होंगे, बिना अलग कोटा बढ़ाए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि मराठा हितों का ध्यान रखते हुए ओबीसी समुदाय के अधिकारों पर कोई आंच नहीं आएगी।
प्रतिक्रियाएं
मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने इस कदम को सकारात्मक बताया है, हालांकि वे पूर्ण समाधान की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं, ओबीसी संगठनों में कुछ चिंता बनी हुई है कि इससे मौजूदा कोटे पर दबाव न पड़े। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी दबाव में लिया गया फैसला करार दिया है। यह विकास महाराष्ट्र की सामाजिक-राजनीतिक गतिशीलता को दर्शाता है, जहां आरक्षण एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। सरकार का दावा है कि ये सुविधाएं संवैधानिक सीमाओं के अंदर रहते हुए लागू की जा रही हैं और पात्र उम्मीदवारों को जल्द लाभ मिलेगा। यह खबर विकासशील है। आगे अपडेट होते रहेंगे।

